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Covid-19 : मन की शक्ति से जीतेंगे हम कोरोना को, 10 बड़ी बातें

सोमवार,मार्च 1, 2021
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यदि ध्यान आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है तो यह आपके दिन का सबसे बढ़िया समय बन जाता है। आपको इससे आनंद की प्राप्ति होती है। फिर आप इसे पांच से दस मिनट तक बढ़ा सकते हैं। पांच से दस मिनट का ध्यान आपके मस्तिष्क में शुरुआत में तो बीज रूप से रहता है, ...
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अष्टांग योग का 7वां अंग है ध्यान। दरअसल, ध्यान 7वीं सीढ़ी है। योग में ध्यान 7वीं स्टेप है। लेकिन वर्तमान में कुछ संस्थान ऐसे हैं, जो व्यक्ति को डायरेक्ट ध्यान लगाने या सिखाने का कार्य करते हैं। उन्होंने अपनी अलग ध्यान विधियां विकसित करके उसकी ...
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यदि निम्नलिखित 10 नियम आपने अपना लिए तो निश्चित ही शर्तिया आपको कभी भी कोई गंभीर रोग नहीं होगा और आप जीवनभर निरोगी बने रहेंगे, परंतु उससे पूर्व आपको 3 शर्तों का पालन करना होगा। जैसे कुछ पाने के लिए खोना पड़ता है उसी तरह यह 3 शर्तें अपनाएं।
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तनाव या पीड़ा शारीरिक हो या मानसिक उसका सारे जीवन पर असर पड़ता है। योग की परंपरा सदियों पुरानी है जो आज भी उतनी ही सक्षम है जितनी पहले हुआ करती थी।
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अभी लॉकडाउन का समय चल रहा है, ऐसे समय में आप सूर्य नमस्कार को अपना कर अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं-
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तोंद को कम करके कमर को छरहरा या पतला बनाने के लिए योग के मात्र 4 ऐसे स्टेप जिन्हें नियमित करने से बहुत ही तेजी से लाभ होगा और आपकी कमर पतली बन जाएगी। लेकिन इसे पहले आपको अत्यधिक भोजन और भोजन के अनियमित समय से बचना होगा यानि आपको भोजन का कोई निश्चित ...
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सिर के बल किए जाने की वजह से इसे शीर्षासन कहते हैं। शीर्षासन को करना गठिन होता है। किसी योग्य योग शिक्षक की देखरेख में करना चाहिए अन्यथा गर्दन में समस्या उत्पन्न हो सकती है या और किसी तरह की समस्या खड़ी हो सकती है। आओ जानते हैं शीर्षासन करना का ...
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कब्ज एक आम समस्या हो चली है। यह अनियमित भोजन शैली, तामसिक भोजन और कसरत ना करने के कारण भी होता है। इसके कारण पाचनतंत्र सुचारू रूप से कार्य नहीं करता है। यदि खाना अच्छे से पचने लगे तो कब्ज भी नहीं हो परंतु समय पर खाना नहीं पचना ही सबसे बड़ी समस्या ...
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शरीर की तंत्रिका प्रणाली में अवरोध उत्पन्न होने से कई प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक रोग होते हैं। इन्हीं तंत्रिका प्रणाली की शुद्धिकरण हेतु प्राणायाम का अभ्यास किया जाता है।
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अष्टांग योग में ध्यान को सातवां योगांग माना गया है। मतलब यह कि पहले आप छह सीढ़ियां क्रास करें फिर ही ध्यान में हो पाएंगे परंतु कुछ ऐसे भी लोग रहते हैं कि जो सीधे ध्यान ही सीखते हैं। कई लोग योगा सेंटर में जाकर ध्यान करते हैं या किसी से सीख कर ध्यान ...
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प्रचलित भाषा में इसे हवाखोरी कहते हैं। इसका अर्थ है बगैर खाए-पीए वर्षों तक रहना। हालांकि इसका अर्थ टहलना भी होता है। आखिर ऐसा कैसा संभव हो सकता है। कोई व्यक्ति किस तरह बगैर खाए पीए जिंदा रह सकता है?
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बहुत बेचैनी है? तनावग्रस्त हैं? किसी दु:ख को लेकर चिंता में घिरे हैं? या यूं ही चिंता में रहने की आदत हो चली है? यह भी हो सकता है कि आपको सिरदर्द की शिकायत हो। कहीं ऐसा तो नहीं कि दिमागी झंझावतों की वजह से आप रातभर करवटें बदलते रहते हों। खैर, जो भी ...
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मुद्रा और दूसरे योगासनों के बारे में बताने वाला सबसे पुराना ग्रंथ घेरण्ड संहिता है। हठयोग के इस ग्रंथ को महर्षि घेरण्ड ने लिखा था। घेरंड में 25 और हठयोग प्रदीपिका में 10 मुद्राओं का उल्लेख मिलता है, लेकिन सभी योग के ग्रंथों की मुद्राओं को मिलाकर कुल ...
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अनियमित जीवन शैली और सांसारिक भागमदौड़ के चलते से कई तरह के रोग, शोक और मानसिक त्रास पैदा हो जाते हैं। ऐसे में धीरे धीरे व्यक्ति वक्त के पहले ही वृद्ध होकर रोगी हो जाता है, क्योंकि न तो खाना पच रहा है और ना ही दिमाग शांत रह रहा है तो फिर निश्चित ही ...
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हिमालय में कुछ ऐसी जगहें हैं जहां पर शून्य से 45 डीग्री से भी नीचे तापमान रहता है फिर भी वहां पर निर्वस्त्र रूप से रहकर साधुओं को तप करते देखे जाने की घटना से भारतीय सैकिन वाकिफ है। एक ओर जहां पर भारतीय सैनिक खून को जमा देवे और हाड़ कपा देने वाली ...
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अष्टांग योग में ध्यान को 7वीं सीढ़ी या योगांग माना गया है, परंतु जब से ध्यान का भी बाजारीकरण हुआ है तब से अब इसे डायरेक्ट किया या सीखा जा सकता है। मतलब यह कि आप छह सीढ़ियों को लांघकर सीधे सातवीं सीढ़ी पर पहुंच सकते हैं। यह चमत्कार तो ध्यान सिखाने ...
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भारतीय दर्शनशास्त्र कहता है कि हमारा मस्तिष्क ही हमें सफल या असफल करता है कोई बाहरी व्यक्ति, परिवार, समाज या देश नहीं। आपकी असफलता के लिए आप खुद ही जिम्मेदार हैं किसी को दोष देने का मतलब यह है कि आप अपनी कमजोरी को छिपा रहे या दबा रहे हैं। जब व्यक्ति ...
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उम्र बढ़ने के साथ ही शरीर फैलने लगता है और चेहरे पर झुर्रियां भी दिखाई देने लगती है। ऐसे में हम चेहरे की चमक या कांति खो बैठते हैं। आंखों के नीचे कालापन भी आ जाता है। ऐसा महसूस होने लगता है कि हम अधेड़ता या बुढापे की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में आप योग ...
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