COVID 19 : योग से कैसे बढ़ाएं घर पर ही ऑक्सीजन लेवल, जानिए

(coronavirus) का संक्रमण फेफड़ों को कमजोर कर देता है। इस दौर में जहां इम्युनिटी पावर (Immunity power) बढ़ाना जरूरी है वहीं फेफड़ों (Lungs) को सुरक्षित और मजबूत बनाए रखना भी जरूरी है और सबसे जरूरी है शरीर के भीतर का लेवल बढ़ाना। ऑक्सीजन (Oxygen) का स्तर कम होने पर सबसे जल्दी और सबसे बुरा असर हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है। ऐस स्थिति में कोई भी वायरस (Virus) और बैक्टीरिया (Bacteria) हमारे शरीर पर जल्दी हावी हो सकता है। ऐसे में यदि कोई गंभीर समस्या नहीं है तो घर में ही की कुछ टिप्स से आप अपना ऑक्सीजन लेवल बढ़ाकर राहत पा सकते हैं।
नोट :कोरोना रोगियों को डॉक्टर की सलाह पर ही कोई योगासन करना चाहिए।
सबसे पहले तो आपको हवादार कमरे में रहना चाहिए अर्थात जहां धूप और हवा का प्रवाह बना रहता हो।

1. अनुलोम विलोम करें : करते समय 3 क्रियाएं करते हैं- 1.पूरक, 2.कुंभक और 3.रेचक। इसे ही हठयोगी अभ्यांतर वृत्ति, स्तम्भ वृत्ति और बाह्य वृत्ति कहते हैं। यही अनुलोम और विलोम है। यही नाड़ीशोधन प्रणायाम की प्रारंभिक क्रिया है। इसे 5 से 10 मिनट तक क्षमता अनुसार करना चाहिए।

(1) पूरक- अर्थात नियंत्रित गति से श्वास अंदर लेने की क्रिया को पूरक कहते हैं। श्वास धीरे-धीरे या तेजी से दोनों ही तरीके से जब भीतर खींचते हैं तो उसमें लय और अनुपात का होना आवश्यक है।

(2) कुंभक- अंदर की हुई श्वास को क्षमतानुसार रोककर रखने की क्रिया को कुंभक कहते हैं। श्वास को अंदर रोकने की क्रिया को आंतरिक कुंभक और श्वास को बाहर छोड़कर पुन: नहीं लेकर कुछ देर रुकने की क्रिया को बाहरी कुंभक कहते हैं। इसमें भी लय और अनुपात का होना आवश्यक है।
(3) रेचक- अंदर ली हुई श्वास को नियंत्रित गति से छोड़ने की क्रिया को रेचक कहते हैं। श्वास धीरे-धीरे या तेजी से दोनों ही तरीके से जब छोड़ते हैं तो उसमें लय और अनुपात का होना आवश्यक है।

2. वायु भक्षण करें : वायु भक्षण का अर्थ होता है वायु को खाना। हवा को जानबूझकर कंठ से अन्न नली में निगलना। यह वायु तत्काल डकार के रूप में वापस आएगी। वायु निगलते वक्त कंठ पर जोर पड़ता है तथा अन्न नलिका से होकर वायु पेट तक जाकर पुन: लौट आती है। इसे 5 से 10 मिनट तक क्षमता अनुसार करना चाहिए।
3. : मकरासन की गिनती पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसनों में की जाती है। इस आसन की अंतिम अवस्था में हमारे शरीर की आकृति मगर की तरह प्रतीत होती है इसीलिए इसे मकरासन कहते है। इससे श्वास की गति की रुकावट समाप्त होकर शांति महसूस होती है।

दोनों पैरों में इतना अंतर रखते हैं कि भूमि को स्पर्श करें। सीना भूमि से उठा हुआ रखते हैं। दोनों हाथों की कैंची जैसी आकृति बनाने के बाद ही सिर को बीच में रखते हैं। श्वास-प्रश्वास स्वाभाविक अवस्था हो। इसे 5 से 10 मिनट तक क्षमता अनुसार करना चाहिए।यह आसन कई तरह से किया जाता है। आप अपनी कोहनी को भूमि पर और हथेली से ठुड्डी को सपोट करके भी रखकर लेटकर गहरी गहरी श्वास प्रश्वास ले सकते हैं।

लाभ : मकरासन आरामदायक आसनों के अंतरगत आता है जब भी पेट के बल लेटकर यह आसन किया जाता है श्वास-प्रश्वास की गति बढ़ जाती है, उस श्वास-प्रश्वास की दृष्‍टि स्वाभाविक अवस्था में लाने के लिए मकरासन का अभ्यास किया जाता है। इस दौरान आप लंबी लंबी श्‍वास खींचे और छोड़ें। ऐसा सोने से फेफड़े पूरी तरह काम करने लगते हैं और शरीर में ऑक्सीजन लेवल मेंटेन रहता है।
दूसरी ओर वायु भक्षण क्रिया अन्न नलिका को शुद्ध व मजबूत करती है। इससे फेफड़े भी शुद्ध और मजबूत बनते हैं। यह क्रिया शुद्ध वायु में करें और यदि कंठ में किसी भी प्रकार की समस्या हो तो ना करें। इसी प्रकार अनुलोम और विलोम करने से मन का भय और तनाव मिट जाता है और सभी प्रकार की नाड़ियों को भी स्वस्थ लाभ मिलता है। इससे फेंफड़ों में जमा गंदगी बहार होती है और फेंफड़े मजबूत बनते हैं।

नोट : कोरोना रोगियों को डॉक्टर की सलाह पर ही कोई योगासन करना चाहिए।



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