योग से दूर भगाएँ मौसमी बीमारी
योग से दूर रहेंगी मौसमी बीमारियाँ
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यह रखें सावधानी- किसी योग विशेषज्ञ के निर्देशन में ही योगासन की शुरुआत करें। जहाँ तक हो सके सुबह खाली पेट योगासन करना चाहिए। अगर शाम या दोपहर के समय आसन किया जा रहा है तो खाने व योग के बीच तीन घंटे का अंतर रखना जरूरी है। जबर्दस्ती कोई भी आसन नहीं करना चाहिए। आसन करते समय अपने शरीर की क्षमता व जरूरत का ध्यान रखा जाना चाहिए। बीमारी की हालत में आसन न करें।
बारिश के मौसम में कैसा हो आहार- डायटीशियन व योग विशेषज्ञ ममता गुरु ने बताया कि बरसात के मौसम में अगर खान-पान का ध्यान न रखा जाए तो, सर्दी-खाँसी, अस्थमा, पेट व गला खराब होने आदि की शिकायत हो सकती हैं।
इससे बचने के लिए इस मौसम में फ्रिज से निकाले गए खाद्य पदार्थ नहीं खाने चाहिए बल्कि इन्हें कुछ समय पहले निकालकर सामान्य तापमान होने पर खाना चाहिए। फ्रिज का ठंडा पानी भी गला खराब कर सकता है। बासे या खूब खट्टे दही से बने खाद्य पदार्थ भी नुकसान पहुँचा सकते हैं।
बारिश के दिनों में सब्जियों का जूस पीने के बजाय इनका सूप पिएँ। कोई भी सब्जी काटने से पूर्व अच्छी तरह धोएँ। खाना खाने के आधा घंटे बाद गुनगुना पानी पिएँ। इससे खराब पानी के कारण होने वाली पेट की बीमारियों से बचा जा सकता है।
मौसम में परिवर्तन के साथ ही सर्दी, जुकाम, खाँसी, अस्थमा, जोड़ों का दर्द जैसी बीमारियाँ परेशान करने लगती हैं। इनसे बचने के लिए सही आहार-विहार के साथ योग के विविध आसनों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।
सही जानकारी के साथ किए गए आसनों से श्वसन तंत्र मजबूत होता है व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। जिसके कारण बीमारियों से बचाव होता है।
यह जानकारी गांगुली योग विद्यापीठ द्वारा तीन केंद्रों में आयोजित पाँच दिवसीय निःशुल्क योग शिविर में दी जा रही है। इसका शुभारंभ सोमवार को हुआ। 16 जुलाई तक चलने वाले इस शिविर के दौरान कमला पार्क स्थित आचार्य नरेन्द्रदेव लाइब्रेरी में सुबह साढ़े छह बजे से, पत्रकार कॉलोनी में शाम 5 बजे से तथा तुलसी नगर स्थित आंकाक्षा गेस्ट हाऊस में शाम सवा छःबजे से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिविर में योग विशेषज्ञ राकेश श्रीवास्तव, राकेश नेमा, राजीव नेमा, अशोक गोधानी, अजय श्रीवास्तव, विकास शुक्ला, विमल भास्कर व डी.सी. जैन सहयोग कर रहे हैं।
ऐसे भगाएँ रोग- संस्था के योग विशेषज्ञ पवन गुरु ने बताया कि शिविर में इस मौसम में विशेष रूप से लाभकारी भस्त्रिका प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, पवन मुक्तासन, मत्स्य आसन व वज्र सुप्तासन का प्रशिक्षण देकर सही आहार के संबंध में भी जानकारी दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि भस्त्रिका व अनुलोम-विलोम प्राणायाम से श्वसन तंत्र मजबूत होता है, नाड़ियों की सफाई होती है। नियमित रूप से इसे करने से सर्दी-जुकाम, कफ आदि की परेशानी से निजात मिलती है। वहीं पवन मुक्तासन के जरिए शरीर के सभी हिस्सों की हड्डियों व माँसपेशियों का संचालन होता है जिससे उन्हें मजबूती मिलती है।
इस आसन को करने के बाद शरीर अन्य आसनों के लिए भी तैयार हो जाता है। सुप्त वज्रासन व मत्स्य आसन करने से थाइराइड, गायनिक, सर्वाइकल, अस्थमा आदि रोगों के कारण होने वाली परेशानियों से राहत मिलती है।

