हां, मैं थी. मैं हूं..मैं रहूंगी..
महिला दिवस विशेष : कविता
WD |
जुबां बंद है
पलकें भीगीं
सच मुट्ठी में
पढ़ा आसमान ने
मैं अपने पंख खुद बनूंगी
हां, मैं थी. मैं हूं..मैं रहूंगी..
WD |
जुबां बंद है
पलकें भीगीं
सच मुट्ठी में
पढ़ा आसमान ने
मैं अपने पंख खुद बनूंगी
हां, मैं थी. मैं हूं..मैं रहूंगी..