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महिलाओं को मिलें राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक समानता का अधिकार

शनिवार,मार्च 9, 2019
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घर, परिवार, समाज और संसार की जिम्मेदारियों के बीच, उसे याद ही नहीं कि ईश्वर ने उसे पूरी सृष्ट‍ि की जिम्मेदारी दी है, केवल समाज की नहीं...। सृष्ट‍ि के साथ सामंजस्य हो गया, तो संसार खुद ब खुद चल जाएगा...। कई सकारात्मक परिवर्तन खुद ब खुद हो जाएंगे...। ...
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सन् 1939, सितंबर का महीना था। केप टाउन से एक समुद्री जहाज इंग्लैंड के लिए आ रहा था। जहाज पर हर रोज गुमशुदा वस्तुओं की सूची एक तख़्ते पर लगती थी जैसे की लॉस्ट - रेड बैग, वन हैट...वगैरा वगैरा।
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सदियों से नारी को एक वस्तु तथा पुरुष की संपत्ति समझा जाता रहा है। पुरुष नारी को पीट सकता है, उसके दिल और शरीर के साथ खेल सकता है
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आचार्य कौटिल्य ने अर्थशास्त्र में कहा था कि महिलाओं की सुरक्षा ऐसी होनी चाहिए कि महिला खुद को अकेली सूनसान सड़कों पर भी बिल्कुल सुरक्षित समझे।
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अगर आप नौकरीपेशा महिला नहीं है, इसका ये मतलब नहीं कि आपको अपनी पर्सनालिटी पर ध्यान नहीं देना चाहिए। आप चाहे गृहिणी ही क्यों न हो, लेकिन आपका व्यक्तित्व भी दमदार होना चाहिए, क्योंकि आप पूरा घर और घर के सभी सदस्यों को संभालती हैं
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अभिनय किसी भी भाव, विचार या परिस्थिति को अभिव्यक्त करने का सबसे प्रभावशाली, सशक्त और दिलचस्प माध्यम है, छोटे पर्दे से लेकर सिनेमा जगत के फलने-फूलने का यही एक बड़ा कारण भी है। लेकिन इस क्षेत्र को और भी समृद्ध बनाती है इसमें महिलाओं की उपस्थिति।
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लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि महिलाओं को अपनी उम्र बताने में परेशानी क्या है? क्यों वे इसे छुपाना चाहती हैं? फिर चाहे दिखने में वे अब भी कितनी ही शालीन और आकर्षक क्यों न लगें?
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नाम है ऋचा कर्पे... सकारात्मकता से लबरेज, उमंग से भरपूर एक ऐसी शख्सियत जिसने विषम परिस्थितियों में धैर्य, लगन, उत्साह और आशा की सुनहरी किरणों को थाम कर अपना आकाश खुद बनाया है। उनकी असाध्यता राहों में बाधक नहीं वरन प्रेरक बनी। वे न दया चाहती हैं, न ...
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समाज में वक्त के साथ महिलाओं का जीवन के प्रति नजरिया बदला है। उनकी शिक्षा, परवरिश, रहन-सहन आदि सभी कुछ बदला है जिससे उनकी सोच में भी काफी सकारात्मक बदलाव हुए हैं। अब वे केवल दूसरों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लिए भी जीती हैं। वे अपने प्रति पहले से ...
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जब नारीवाद नारे और आंदोलन के रूप में चर्चित नहीं था, तब भी नारीवादी लेखन किया गया है।
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एक नारी के बिना किसी भी व्यक्ति जीवन सृजित नहीं हो सकता है। जिस परिवार में महिला नहीं होती, वहां पुरुष न तो अच्छी तरह से जिम्मेदारी निभा पाते हैं और ना ही लंबे समय तक जीते हैं।
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आज महिला दिवस है। मैं कहती हूं कि विश्वभर को महिला दिवस मनाने की आवश्यकता ही नहीं है। ऐसा नहीं है कि हमारे देश में देवी की पूजा नहीं होती है। भारत में कई रूपों में देवियों का पूजन किया जाता है।
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दुनिया में ऐसा कोई विषय नहीं, जो महिलाओं की उपस्थिति से वंचित हो। घर से लेकर व्यवसाय और शिक्षा से लेकर राजनीति तक महिलाओं की दमदार उपस्थिति का इतिहास साक्षी रहा है। प्राचीन काल से लेकर अब तक राजनीति में भी महिलाओं ने यह साबित किया है कि वे ग्रहकार्य ...
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महिलाओं के लिए स्वच्छता कई मायनों में बहुत जरूरी होती है। ये न केवल उनकी सेहत को दुरुस्त रखती है, बल्कि कई तरह के इंफेक्शन से भी बचाती है बल्कि आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है। हर महिला चाहे,
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नाम से उल्लिखित है जिसमें शीघ्र ही ब्रिटिश शासकों की शोषणकारी नीतियों और दमनात्मक कार्रवाई से पीड़ित शासक व विशाल जनसमूह व्यापक स्तर पर शामिल हो गया।
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मैं यह नहीं कहती कि नारी उपलब्धियाँ नगण्य हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि इनके समक्ष नारी अत्याचार की रेखा समाज ने इतनी लंबी खींच दी है कि उपलब्धि रेखा छोटी प्रतीत होती है।
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महान व्यक्तित्वों द्वारा नारी को लेकर कहे गए सुविचार आज भी उतने ही सम्मान के साथ अस्तित्व में है। जानि‍ए महिलाओं के बारे में किसने क्या कहा -
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अब वे केवल दूसरों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लिए भी जीती हैं। वे अपने प्रति पहले से काफी उदार हुई हैं। कई मायनों में अब उन्हें स्वतंत्रता मिली है जिसे आधुनिक महिलाओं के इन खास गुणों से समझा जा सकता है।
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अन्य अवसरों की तरह ही महिला दिवस पर भी खास तौर से महिला दोस्तों व सहेलियों को तोहफे व उपहार देने का चलन है। अगर आप खुद एक महिला है, तो भी इस खास मौके पर उन महिलाओं को तोहफे दे सकती हैं
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