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Share Bazaar अप्रैल में चुनौतियों से आगे निकला, Sensex करीब 4 प्रतिशत उछला, Nifty भी रहा बढ़त में

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Share Bazaar News : अमेरिकी सीमा शुल्क और भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच बीएसई सेंसेक्स में पिछले महीने करीब 4 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स पिछले महीने कुल 2,827.32 अंक यानी 3.65 प्रतिशत बढ़ा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का सूचकांक निफ्टी 814.85 अंक यानी 3.46 प्रतिशत चढ़ा। इस तेजी के बीच अप्रैल महीने में निवेशकों की संपत्ति 10.37 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 4,23,24,763.25 करोड़ रुपए (4.98 लाख करोड़ डॉलर) हो गई।
 
घरेलू बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की वापसी, दक्षिण-पश्चिम मानसून में सामान्य से अधिक बारिश होने के अनुमान और संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उम्मीद ने इस सकारात्मक धारणा को बल देने का काम किया।
इसके अलावा, पिछले कुछ महीनों में बाजार में आई गिरावट के बाद शेयरों के मूल्यांकन में आई नरमी ने भी खरीदारी को नए सिरे से बढ़ावा दिया। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स पिछले महीने कुल 2,827.32 अंक यानी 3.65 प्रतिशत बढ़ा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का सूचकांक निफ्टी 814.85 अंक यानी 3.46 प्रतिशत चढ़ा।
 
इस तेजी के बीच अप्रैल महीने में निवेशकों की संपत्ति 10.37 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 4,23,24,763.25 करोड़ रुपए (4.98 लाख करोड़ डॉलर) हो गई। यह लगातार दूसरा महीना है जब सेंसेक्स एवं निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए हैं। मार्च के महीने में भी सेंसेक्स में 4,216.82 अंक यानी 5.76 प्रतिशत और निफ्टी में 1,394.65 अंक यानी 6.30 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली थी।
एक विशेषज्ञ ने कहा कि अमेरिकी सीमा शुल्क से जुड़े जोखिम में कमी आने, संभावित अमेरिका-भारत व्यापार समझौते और मजबूत एफआईआई प्रवाह के कारण पिछले महीने बाजारों ने अच्छा प्रदर्शन किया। मास्टर ट्रस्ट ग्रुप के निदेशक पुनीत सिंघानिया ने कहा, वैश्विक चिंताओं और पाकिस्तान के साथ तनाव के बावजूद अप्रैल में भारतीय शेयर बाजार की मजबूती और तेज उछाल के लिए कई कारक मददगार रहे। पिछले कुछ महीनों में बाजार में गिरावट आने से मूल्यांकन कम हुआ जिससे खरीदारी गतिविधि फिर से शुरू हो गई।
 
इसके अलावा, अमेरिका के सीमा शुल्क पर अस्थाई रोक लगाने और देशों के साथ संभावित व्यापार वार्ता शुरू होने से भी तेजी को बढ़ावा मिला। मास्टर ट्रस्ट ग्रुप के निदेशक पुनीत सिंघानिया ने कहा, विदेशी निवेशकों के लंबे समय तक बिकवाली करने के बाद यह देखा जा रहा है कि एफआईआई अप्रैल में भारतीय इक्विटी के शुद्ध खरीदार बन गए।
सिंघानिया ने कहा कि रिजर्व बैंक के रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती करने और नीतिगत रुख को 'तटस्थ' से 'उदार' में बदलने से भी बाजार की धारणा को बल मिला। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, बाजार का आश्चर्यजनक तरीके से लचीलापन दिखना अहम है। जवाबी शुल्क से जुड़े घटनाक्रम और भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बाद भी निफ्टी अप्रैल में ऊपर है। यह बताता है कि संकट के समय घबराने की जरूरत नहीं है।
 
सिंघानिया ने मई में बाजार की तेजी कायम रहने की संभावना पर कहा कि यह काफी हद तक कंपनियों के अनुकूल तिमाही नतीजों और सीमा पर बनने वाली स्थिति से तय होगा। उन्होंने कहा, निवेशक अमेरिकी बाजार के घटनाक्रमों पर भी नजर रखेंगे, क्योंकि इसका भारत जैसे उभरते बाजारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। (भाषा)
Edited By : Chetan Gour
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