अगस्त के आखिरी हफ्ते में क्यों दबाव में रहा शेयर बाजार? सितंबर में Nifty-Sensex की कैसी रहेगी चाल
Share Market Weekly Review : भारतीय शेयर बाजार के लिए अगस्त का आखिरी हफ्ता भी रेंज बाउंड ही रहा। सेंसेक्स में 276 अंकों की गिरावट दर्ज की गई तो निफ्टी भी 77 अंकों की गिरा। 3 दिन बाजार लाल निशान में तो 2 दिन हरे निशान में रहा। जानिए मार्केट ट्रेड और निवेशकों के लिए कैसा रहेगा सितंबर का पहला सप्ताह।
कैसी रही सेंसेक्स और निफ्टी की चाल
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सेंसेक्स 172 अंकों की गिरावट के साथ 77369 पर बंद हुआ। निफ्टी 33 अंक गिरकर 24219 पर था। मंगलवार को सेंसेक्स 287 अंक बढ़कर 77656 पर पहुंच गया, इस समय निफ्टी 115 अंकों की बढ़त के साथ 24334 पर था।
इसके बाद लगातार 2 दिन शेयर बाजार लाल निशान में रहा। बुधवार को सेंसेक्स 183 अंकों की गिरावट के साथ 77473 पर था तो निफ्टी 127 अंक गिरकर 24208 पर बंद हुआ। गुरुवार को सेंसेक्स 539 अंक गिरकर के साथ 76933 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 117 अंक गिरकर 24090 पर आ गया। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को सेंसेक्स 331 अंकों की बढ़त के साथ 77264 पर बंद हुआ, निफ्टी 85 अंक बढ़कर 24,175 पर बंद हुआ।
CAS से बढ़ा रिस्क
बाजार विशेषज्ञ योगेश बागौरा ने कहा कि शेयर बाजार में दिन की आखिरी कीमत तय करने के नए तरीके ने ऑपशन ट्रेडर्स को हैरान कर दिया है। गुरुवार को बीएसई पर एक्सपायरी के दिन बैंकेक्स का 65100 का 55 रुपए का पुट 1100 रुपए पर पहुंच गया। इस तरह सेंसेक्स की 77000 वाली कॉल और 77100 की पुट में भी भारी उठापटक दिखाई दी। इससे निवेशकों के लिए रिस्क काफी बढ़ गया है। सही समय पर खरीदने वालों को बंपर फायदा होगा तो कुछ सेकंड की देरी से पूरा पैसा खत्म हो सकता है। बाजार अंतिम क्षणों में किस तरफ जाएगा कहना मुश्किल है। बहरहाल सेबी ने CAS में किसी तरह के बदलाव से इनकार किया है।
जियो के सबसे बड़े IPO को सेबी की मंजूरी
जियो के IPO को SEBI की मंजूरी मिल गई। यह आईपीओ करीब 37 हजार करोड़ का हो सकता है, जो अब तक के इतिहास में सबसे बड़ा माना जा रहा है। Jio Platforms ने 27 करोड़ तक के इक्विटी शेयर जारी करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें ऑफर-फ़ॉर-सेल का कोई हिस्सा नहीं है। इसका मतलब है कि मौजूदा शेयरहोल्डर IPO के तहत अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे। इससे पहले 2024 में Hyundai Motor India का 27,870 करोड़ रुपए का IPO आया था।
इन फैक्टर्स से तय हुई बाजार की चाल
क्रूड ऑयल भारतीय बाजार के लिए अहम फैक्टर बना रहा। ऊंची तेल कीमतों से भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका बाजार की चिंता रही। हालांकि सप्ताह के अंत में ब्रेंट क्रूड में गिरावट आई। रुपए की चाल, अमेरिकी फेड के ब्याज दर संकेत, ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट और IT शेयरों में खरीदारी ने भी बाजार की चाल तय की। FII की गतिविधियां बाजार के लिए दबाव का कारण बनी रहीं। 28 अगस्त को भी बाजार के प्रमुख ट्रिगर्स में विदेशी फंड आउटफ्लो शामिल था।
कैसा रहेगा अगला हफ्ता?
बाजार विशेषज्ञ सुयश राठौर ने बताया कि अमेरिकी फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इस वजह से अगले हफ्ते अमेरिकी शेयर बाजारों के साथ ही दुनियाभर के बाजार में गिरावट हो सकती है। हीरो मोटोकॉर्प ने एथर एनर्जी में 1758 करोड़ रुपये का निवेश कर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 32.8% कर ली है। इससे ऑटोमोबाइल सेक्टर की कंपनियों में कुछ सकारात्मकता दिखाई दे सकती है। बाजार फिलहाल पॉजिटिव खबर का इंतजार कर रहा है। अमेरिका ईरान समझौते पर भी नजर है। सोने चांदी में इंपोर्ट ड्यूटी घटाई जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो सोने चांदी की कीमतों में और गिरावट आ सकती है।
वहीं योगेश बागौरा ने बताया कि निफ्टी में ऊपर में 24600-24800 की रेंज बनी हुई है। इसके ऊपर क्लोजिंग आने पर ही बाजार को मजबूती मिलेगी। नीचे में 23700 से 23900 की रेंज टूटने में बाजार में गिरावट दिखाई दे सकती है। फिलहाल बाजार रेंज बाउंड ही रहने की संभावना है।
अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

