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शार्ट कवरिंग के कारण शेयर बाजार में तेजी, क्या करें निवेशक?

Updated: मंगलवार, 17 मार्च 2026 (16:05 IST)
Share Market : 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार ने एक भीषण गिरावट का सामना किया है, जिसमें सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण (market cap) से 639 बिलियन डॉलर (लगभग 53 लाख करोड़ रुपए) से अधिक साफ हो गए हैं। यह पिछले 15 वर्षों में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि पिछले 2 कारोबारी दिनों में बाजार हरे निशान में दिखाई दे रहा है लेकिन अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।
 
शेयर बाजार में 17 मार्च को लगातार दूसरे दिन भी बढ़त दिखाई दी। सेंसेंक्स करीब 568 अंक की तेजी के साथ 76,070 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी करीब 172 अंक की तेजी के साथ 23,581 के स्तर पर बंद हुआ।
 
शेयर मार्केट एक्सपर्ट योगेश बागौरा ने बताया कि बाजार का आउटलुक फिलहाल अनिश्चित है। जब तक तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं और भू-राजनीतिक जोखिम कम नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। फिलहाल रिकवरी के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में निवेशकों को अलर्ट रहना चाहिए। शॉर्ट कवरिंग के कारण यह तेजी दिखाई दे रही है। बाजार में वास्तविक तेजी निफ्टी की 24500 के ऊपर क्लोजिंग होने पर बनेगी।

मार्केट कैप में गिरावट

कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग 4.77 ट्रिलियन डॉलर रह गया है, जो साल की शुरुआत में 5.3 ट्रिलियन डॉलर था। यह अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। इस साल अब तक सेंसेक्स में 10.8% और निफ्टी में 9.5% की गिरावट आई है। मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

गिरावट के मुख्य कारण

शेयर बाजार में इस भारी बिकवाली के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:
 
भू-राजनीतिक तनाव: मध्य पूर्व में बढ़ता संघर्ष (विशेष रूप से अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच) सबसे बड़ा कारण है।
कच्चे तेल की कीमतें: तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं (17 मार्च, 2026 तक लगभग $103)। भारत एक बड़ा तेल आयातक है, इसलिए महंगी ऊर्जा से मुद्रास्फीति (inflation) और चालू खाता घाटा (current account deficit) बढ़ने का खतरा है।
विदेशी निवेशकों की निकासी: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा भारी मात्रा में पैसा निकालने से बाजार पर दबाव बढ़ा है।
अन्य कारक: कंपनियों के तिमाही नतीजों का कमजोर रहना, शेयरों का अत्यधिक मूल्यांकन (high valuation), और वैश्विक AI बूम में भारत की सीमित भागीदारी ने निवेशकों को निराश किया है।

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

मॉर्गन स्टेनली जैसी संस्थाओं ने भारतीय बाजार की रेटिंग को घटाकर इक्वलवेट कर दी है। इस रेटिंग को मूल रूप से न्यूट्रल रेटिंग के बराबर माना जाता है। दुनिया भर में जारी अनिश्चितताओं और भारतीय शेयर बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। जीएसटी और अन्य कारणों से सोने चांदी के दाम यहां दिए गए दाम से अलग भी हो सकते हैं। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

edited by : Nrapendra Gupta
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