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धन चाहिए? खूब सारा चाहिए? तो यह 12 अच्छी आदतें अपनाइए

शुक्रवार,अक्टूबर 2, 2020
Dhan ke upay
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प्रभु आशुतोष के पूजन में अभिषेक व बिल्वपत्र का प्रथम स्थान है। ऋषियों ने कहा है कि बिल्वपत्र भोले-भंडारी को चढ़ाना एवं 1 करोड़ कन्याओं के कन्यादान का फल एक समान है।
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जूते चप्पल घर के बाहर रखना, शुद्धि-अशुद्धि विचार, सुतक व मुक्ति विचार, रसोईघर में शुद्धि, जल वायु व अन्न को शुद्ध रखना।अनावश्यक वस्तु या व्यक्ति के स्पर्श से बचना जैसी मर्यादाएं ही तो वैज्ञानिक आवरण ले कर प्रस्तुत की जा रही है। तुलसी, हल्दी, ...
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इस दिन भगवान विष्णु के चरणों से धरती पर गंगा अवतरित हुई। सतयुग, द्वापर व त्रेतायुग के प्रारंभ की गणना इस दिन से होती है।
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पीड़ित जातक को चाहिए कि वह पीड़ित ग्रह के दंड को पहचान कर उक्त ग्रह की अनुकूलता हेतु उक्त ग्रह का रत्न धारण करें और संबंधित ग्रह के मंत्र को जपें तो जातक सुखी बन सकता है। साथ में जातक संबंधित ग्रह के क्षेत्र का दान और उस ग्रह के रत्न की माला से जप ...
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पहली बात यह समझने की है कि सामान्य रोग, बुखार या बीमारी के लिए औषधि काम आती है लेकिन महामारी के लिए नहीं। भारत प्राचीन काल से ही अपने लोगों को महामारी से बचाने के 4 तरीके अपना रहा है।
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ऐसी मान्यता है कि 1918 में सांई बाबा ने समाधि लेने के पूर्व कहा था कि वे जल्द ही फिर से जन्म लेंगे अर्थात अवतार लेंगे, लेकिन उनके यह कहने के कोई प्रमाण नहीं मिलते हैं। इसी तरह की बातों को चलते कुछ लोग खुद को सांई का अवतार कहते हैं और आने वाले समय ...
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शिरडी के साईं बाबा एक चमत्कारिक संत हैं। उनकी समाधि पर जो भी गया झोली भरकर ही लौटा है। सांई बाबा का दशहरे या विजयादशमी से क्या कनेक्शन है आओ जानते हैं इस संबंध में 5 खास बातें।
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संतों में सांई बाबा सर्वोच्च हैं। वे सिद्ध पुरुष, सर्वव्यापी, सर्वज्ञ, दलायु और चमत्कारिक हैं। जिन्होंने साईं को भजा उसके संकट उसी तरह दूर हो गए जिन्होंने हनुमान को भजा और तुरंत ही आराम पाया। आप जानिए साई बाबा और हनुमानजी के बीच क्या है कनेक्शन।
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शिरडी में जब साईं बाबा पधारे तो उन्होंने एक मस्जिद को अपने रहने का स्थान बनाया। आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया। क्या वहां रहने के लिए और कोई स्थान नहीं था या उन्होंने जान-बूझकर ऐसा किया?
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सांई बाबा ने अपना प्रारंभिक जीवन मुस्लिम फकीरों के संग बिताया था, लेकिन उन्होंने किसी के साथ कोई भी व्यवहार धर्म के आधार पर नहीं किया। उनके लिए हिन्दू और मुस्लिम एक ही थे। वे जब मुस्लिमों से मिलते तो कहते थे, राम भला करेगे और जब हिन्दुओं से मिलते तो ...
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शिरडी के साईं बाबा के अनमोल वचन जो उन्होंने विभिन्न अवसरों पर कहे थे। कहते हैं कि जो भी शिरडी के साईं बाबा को दिल से पुकारता है बाबा उसके आसपास होने की अनुभूति दे ही देते हैं। आओ जानते हैं कि साईं बाबा अपने भक्तों के बारे में क्या कहते हैं।
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यूं तो शिरडी साईं बाबा के सैंकड़ों चमत्कार है लेकिन हम यहां बता रहा है मात्र दस ही चमत्कार। हो सकता है कि हमें कुछ महत्वपूर्ण चमत्कार या बाबा की कृपा के किस्से छुट गए हों।
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सांईं बाबा के पास एक ईंट हमेशा रहती थी। वे उस ईंट पर ही सिर रखकर सोते थे। उसे ही उन्होंने अपना तकिया बनाकर रखा था। दरअसल, यह ईंट उस वक्त की है, जब सांईं बाबा वैंकुशा के आश्रम में पढ़ते थे। वैकुंशा के दूसरे शिष्य सांईं बाबा से वैर रखते थे, लेकिन ...
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दशहरे का दिन खास तौर पर साईं की आराधना और उनके मंत्रों का जाप करना बहुत ही लाभकारी होता है। उनके इन चमत्कारी मंत्रों का जाप करने से सभी मनोकामनाएं चाहे नौकरी की हो या शादी की
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शिरडी के साईं बाबा को लेकर कई फिल्में बनाई गई है। फिल्मों के अलावा उनके जीवन चरित्र पर एनिमेटेड स्टोरी भी बनाई गई है। आप ये फिल्लें या एनिमेटेड स्टोरी यूट्यूब पर देख सकते हैं। इसके अलावा साईं बाबा पर कई भाषओं में टीवी सीरियल भी बन चुके है और बन रहे ...
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बचपन में मां-बाप मर गए तो सांईं और उनके भाई अनाथ हो गए। फिर सांईं को एक वली फकीर ले गए। बाद में वे जब अपने घर पुन: लौटे तो उनकी पड़ोसन चांद बी ने उन्हें भोजन दिया और वे उन्हें लेकर वैंकुशा के आश्रम ले गईं और वहीं छोड़ आईं।
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साईं बाबा के दशहरे के दिन समाधि लेने लेना का रहस्य क्या है? इससे पहले उन्होंने रामविजय प्रकरण क्यों सुना? इस प्रकरण में कथा है कि राम ने रावण से 10 दिनों तक युद्ध लड़ा था और दशमी के दिन रावण मारा गया था। रावण के मारे जाने के कारण दशमी को ही दशहरा ...
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वर्तमान में साईं बाबा के विरोधी उन्हें चांद मिया मानते हैं। साईं विरोधियों अनुसार वे एक मुस्लिम थे और हिन्दुओं को किसी मुस्लिम की पूजा नहीं करनी चाहिए। आओ जानते हैं कि आखिर यह चांद मिया कौन थे। who is chand miya, chand miya sai baba in hindi, chand ...
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शिर्डी स्थित श्री साईं बाबा महा समाधि के 100 वर्ष पूर्ण हो गए हैं। सन् 1918 में जब 15 अक्टूबर को दशहरा आया था, उस दशहरे के दिन दोपहर के समय श्री साईं बाबा ने आखिरी सांस ली थी।
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