0

वट सावित्री का व्रत अमावस्या और पूर्णिमा को दो बार क्यों रखा जाता है?

बुधवार,जून 23, 2021
0
1
आज हमारे समाज में कई ऐसी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं जैसे रात्रि में झाड़ू ना लगाना,कांच टूटना,स्वर्ण का खोना,सूतक,गर्भवती स्त्री का नदी पार ना करना,देहरी पर बैठना, पैर पर पैर रखकर नहीं सोना आदि।
1
2
आज भी एक पथ प्रदर्शक के रूप में प्रासंगिक है संत कबीर दास के दोहे। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं कबीर के दोहे सर्वाधिक प्रसिद्ध व लोकप्रिय दोहे-
2
3
संतों की संगत कभी निष्फल नहीं होती । मलयगिर की सुगंधी उड़कर लगने से नीम भी चन्दन हो जाता है, फिर उसे कभी कोई नीम नहीं कहता।
3
4
21 जून 2021 को निर्जला एकादशी है। एकादशी के दिन विष्णुजी की विशेष पूजा की जाए तो अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन पर वेबदुनिया की तरफ से विशेष सामग्री,महत्व,मुहूर्त, कथा,दान और उपाय संबंधी खास जानकारियां....
4
4
5
पांडव पुत्र भीम के लिए कोई भी व्रत करना कठिन था, क्योंकि भूखे रहना उनके लिए संभव न था। लेकिन वे एकादशी व्रत करना चाहते थे।
5
6
21 जून 2021 को निर्जला एकादशी है। इस दिन प्रातःकाल से लेकर दूसरे दिन द्वादशी की प्रातःकाल तक उपवास करने की अनुशंसा की गई है। दूसरे दिन जल कलश का विधिवत पूजन किया जाता है। तत्पश्चात कलश को दान में देने का विधान है। इसके बाद ही व्रती को जलपान, ...
6
7
योग के प्रचलन के इतिहास को हम दो भागों में विभक्त कर सकते हैं पहला हिन्दू परंपरा से प्राप्त इतिहास और दूसरा शोध पर आधारित इतिहास। योग का इतिहास बहुत ही वृहद है हमनें इसे यहां पर संक्षिप्त रूप से लिखा है। कहते हैं कि भारत में योग लगभग 15 हजार वर्षों ...
7
8
गायत्री मंत्र जप के लिए 3 समय बताए गए हैं, जप के समय को संध्याकाल भी कहा जाता है।
8
8
9
"ॐ जय शिव ओंकारा" की आरती आप शिव जी मानते आए हैं लेकिन सच तो है कि यह केवल शिवजी की आरती नहीं है बल्कि ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों की आरती है ...
9
10
कलश विश्व ब्रह्मांड, विराट ब्रह्मा एवं भू-पिंड यानी ग्लोब का प्रतीक माना गया है। इसमें सम्पूर्ण देवता समाए हुए हैं। पूजन के दौरान कलश को देवी-देवता की शक्ति, तीर्थस्थान आदि का प्रतीक मानकर स्थापित किया जाता है।
10
11
अक्सर आपने देखा और सुना होगा कि पत्नी को पति के बाएं तरफ ही बैठना चाहिए। पत्नी को पति का वामांग ही माना गया है लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों है...
11
12
हम सभी के घर में भगवान का मंदिर होता है लेकिन अज्ञानतावश हम कुछ गलतियां कर जाते हैं। प्रस्तुत है कुछ आवश्यक महत्वपूर्ण जानकारियां...
12
13
कार्तिकेय जी के दिव्‍य नाम दिए जा रहे हैं। जो इनका पाठ करता है, वह धन, कीर्ति तथा स्‍वर्गलोक प्राप्‍त कर लेता है, इसमें संशय नहीं है। कार्तिकेय के प्रसिद्ध नामों की सूची इस प्रकार है। आइए जानें...
13
14
मोर के विषय में माना जाता है कि यह पक्षी किसी भी स्थान को बुरी शक्तियों और प्रतिकूल चीजों के प्रभाव से बचाकर रखता है। यही वजह है कि अधिकांश लोग अपने घरों में मोर के खूबसूरत पंखों को लगाते हैं।
14
15
आज 15 जून को ज्येष्ठ मास का तीसरा बड़ा मंगलवार है। बड़े मंगलवार के दिन हनुमान जी पूजा करने से विशेष लाभ होता है।
15
16
मिथुन संक्रांति के दिन सिलबट्टे को भूदेवी के रूप में पूजा जाता है। सिलबट्टे को इस दिन दूध और पानी से स्नान कराया जाता है।
16
17
ईसा के लगभग 100 वर्ष पूर्व उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने रामजन्मभूमि पर संतों के निर्देश से एक भव्य मंदिर के साथ ही कूप, सरोवर, महल आदि बनवाए। विक्रमादित्य के बाद के राजाओं ने समय-समय पर इस मंदिर की देख-रेख की। अंतत: 1527-28 में अयोध्या ...
17
18
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि वेदों में वायु की 7 शाखाओं के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है। अधिकतर लोग यही समझते हैं कि वायु तो एक ही प्रकार की होती है, लेकिन उसका रूप बदलता रहता है, जैसे कि ठंडी वायु, गर्म वायु और समान वायु, लेकिन ऐसा नहीं है।
18
19
गणपति के 12 प्रमुख नाम हैं- सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लम्बोदर, विकट, विघ्ननाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र और गजानन। उनके प्रत्येक नाम के पीछे एक कथा है और प्रत्येक अवतार का रंग अलग अलग है।
19