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जगन्नाथ पुरी में मरणासन्न व्यक्ति के लिए क्यों बनता है विशेष महाप्रसाद, जानिए सच्चाई
jagannath puri prasad mystery: भारत के चार धामों में से एक, ओडिशा का जगन्नाथ पुरी मंदिर, अपनी भव्यता, सदियों पुरानी परंपराओं और सबसे बढ़कर, अपने महाप्रसाद के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ केवल भगवान को ही नहीं, बल्कि भक्तों को भी विशेष रूप से तीन तरह के प्रसाद दिए जाते हैं। इन प्रसादों की अपनी अलग महिमा और मान्यता है, जिनमें से एक तो विशेष रूप से मरणासन्न व्यक्ति के लिए बनाया जाता है। आइए, जानते हैं जगन्नाथ पुरी के इस अद्भुत महाप्रसाद और इसके पीछे छिपे रहस्यों के बारे में।
क्यों कहते हैं इसे महाप्रसाद?
सामान्यतः किसी भी मंदिर में भगवान को अर्पित किए जाने वाले भोग को प्रसाद कहा जाता है, लेकिन पुरी में इसे महाप्रसाद की संज्ञा दी गई है। ऐसी मान्यता है कि जगन्नाथ मंदिर में जो भोग बनता है, उसे स्वयं देवी लक्ष्मी की देखरेख में तैयार किया जाता है। कहते हैं कि प्रसाद को जब बनाया जाता है, तो उसमें कोई सुगंध नहीं आती है। इसके बाद इसे माता बिमला देवी के मंदिर में ले जाकर भोग लगाया जाता है। फिर इस प्रसाद का भोग मुख्य मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को लगाया जाता है। इसके बाद जैसे ही इस प्रसाद को मंदिर से बाहर लाया जाता है, उससे सुगंध आने लगती है। इसी वजह से इसे महाप्रसाद कहा जाता है। इसके बाद भक्तों को मंदिर में स्थित आनंद बाजार में मिलता है।
सामान्यतः किसी भी मंदिर में भगवान को अर्पित किए जाने वाले भोग को प्रसाद कहा जाता है, लेकिन पुरी में इसे महाप्रसाद की संज्ञा दी गई है। ऐसी मान्यता है कि जगन्नाथ मंदिर में जो भोग बनता है, उसे स्वयं देवी लक्ष्मी की देखरेख में तैयार किया जाता है। कहते हैं कि प्रसाद को जब बनाया जाता है, तो उसमें कोई सुगंध नहीं आती है। इसके बाद इसे माता बिमला देवी के मंदिर में ले जाकर भोग लगाया जाता है। फिर इस प्रसाद का भोग मुख्य मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को लगाया जाता है। इसके बाद जैसे ही इस प्रसाद को मंदिर से बाहर लाया जाता है, उससे सुगंध आने लगती है। इसी वजह से इसे महाप्रसाद कहा जाता है। इसके बाद भक्तों को मंदिर में स्थित आनंद बाजार में मिलता है।
तीन तरह का बनता है जगन्नाथ पुरी का प्रसाद
जगन्नाथ पुरी का महाप्रसाद मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है, और प्रत्येक का अपना विशेष महत्व है:
1. संकुदी महाप्रसाद:
सबसे पहले आता है संकुदी महाप्रसाद। यह वह प्रसाद है जिसे भक्त मंदिर परिसर के भीतर ही ग्रहण कर सकते हैं और इसे घर ले जाने की अनुमति नहीं होती। इसमें विभिन्न प्रकार के भोग शामिल होते हैं, जैसे चावल (भात), दाल, तरह-तरह की सब्जियां, साग, और दलिया आदि। यह प्रसाद गर्मागर्म और ताज़ा होता है, जिसे सीधे रसोई से भक्तों के लिए परोसा जाता है। इसे ग्रहण करने का अनुभव ही अपने आप में एक आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। माना जाता है कि इस प्रसाद को मंदिर परिसर में ग्रहण करने से व्यक्ति को तत्काल पुण्य प्राप्त होता है।
जगन्नाथ पुरी का महाप्रसाद मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है, और प्रत्येक का अपना विशेष महत्व है:
1. संकुदी महाप्रसाद:
सबसे पहले आता है संकुदी महाप्रसाद। यह वह प्रसाद है जिसे भक्त मंदिर परिसर के भीतर ही ग्रहण कर सकते हैं और इसे घर ले जाने की अनुमति नहीं होती। इसमें विभिन्न प्रकार के भोग शामिल होते हैं, जैसे चावल (भात), दाल, तरह-तरह की सब्जियां, साग, और दलिया आदि। यह प्रसाद गर्मागर्म और ताज़ा होता है, जिसे सीधे रसोई से भक्तों के लिए परोसा जाता है। इसे ग्रहण करने का अनुभव ही अपने आप में एक आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। माना जाता है कि इस प्रसाद को मंदिर परिसर में ग्रहण करने से व्यक्ति को तत्काल पुण्य प्राप्त होता है।
2. सुखिला महाप्रसाद:
दूसरे प्रकार का महाप्रसाद सुखिला कहलाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इसमें मुख्य रूप से सूखी मिठाइयां और नमकीन वस्तुएं शामिल होती हैं। यह प्रसाद भक्तों के लिए विशेष रूप से सुविधाजनक होता है, क्योंकि इसे वे अपने घर भी लेकर आ सकते हैं और अपने परिवार व रिश्तेदारों को बांटते हैं। इस प्रसाद को बांटना एक पुण्य का कार्य माना जाता है, जिससे भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद सभी को प्राप्त होता है। इसमें खस्ता, लड्डू, और अन्य सूखी मिठाइयाँ शामिल होती हैं जो लंबे समय तक खराब नहीं होतीं।
दूसरे प्रकार का महाप्रसाद सुखिला कहलाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इसमें मुख्य रूप से सूखी मिठाइयां और नमकीन वस्तुएं शामिल होती हैं। यह प्रसाद भक्तों के लिए विशेष रूप से सुविधाजनक होता है, क्योंकि इसे वे अपने घर भी लेकर आ सकते हैं और अपने परिवार व रिश्तेदारों को बांटते हैं। इस प्रसाद को बांटना एक पुण्य का कार्य माना जाता है, जिससे भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद सभी को प्राप्त होता है। इसमें खस्ता, लड्डू, और अन्य सूखी मिठाइयाँ शामिल होती हैं जो लंबे समय तक खराब नहीं होतीं।
3. निर्मला प्रसाद: मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला अद्भुत प्रसाद
इन सबमें सबसे अद्भुत और चमत्कारी प्रसाद है निर्मला प्रसाद। इसमें मुख्य रूप से सूखे चावल होते हैं, जिन्हें खास तौर पर मंदिर के पास स्थित कोइली वैकुंठ में बनाया जाता है। यह प्रसाद किसी सामान्य व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि मरणासन्न व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति अपनी अंतिम साँसें ले रहा होता है और इस निर्मला प्रसाद को ग्रहण करता है, उसके सभी पापों का नाश होता है और उसे सहजता से मोक्ष प्राप्त होता है। यह मृत्यु के भय को कम कर, आत्मा को शांति प्रदान करने वाला माना जाता है। कोइली वैकुंठ वह स्थान है जहाँ भगवान जगन्नाथ की पुरानी प्रतिमाओं को दफनाया जाता है, जिससे इस प्रसाद की पवित्रता और भी बढ़ जाती है।
इन सबमें सबसे अद्भुत और चमत्कारी प्रसाद है निर्मला प्रसाद। इसमें मुख्य रूप से सूखे चावल होते हैं, जिन्हें खास तौर पर मंदिर के पास स्थित कोइली वैकुंठ में बनाया जाता है। यह प्रसाद किसी सामान्य व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि मरणासन्न व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति अपनी अंतिम साँसें ले रहा होता है और इस निर्मला प्रसाद को ग्रहण करता है, उसके सभी पापों का नाश होता है और उसे सहजता से मोक्ष प्राप्त होता है। यह मृत्यु के भय को कम कर, आत्मा को शांति प्रदान करने वाला माना जाता है। कोइली वैकुंठ वह स्थान है जहाँ भगवान जगन्नाथ की पुरानी प्रतिमाओं को दफनाया जाता है, जिससे इस प्रसाद की पवित्रता और भी बढ़ जाती है।
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