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दूसरा मंगला गौरी व्रत 2026: कब करें पूजा? जानिए शुभ मुहूर्त, विधि और 5 खास उपाय

mangala gauri vrat vidhi
दूसरा मंगला गौरी व्रत 2026: भक्ति, सौभाग्य और प्रेम का पावन पर्व—जानिए शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और 5 महाउपाय सावन का पवित्र महीना केवल शिव भक्ति का ही नहीं, बल्कि आद्यशक्ति माँ पार्वती की असीम कृपा प्राप्त करने का भी अति पावन अवसर है। सावन के हर मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत दांपत्य जीवन में खुशहाली और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। आइए जानते हैं इस पावन व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त, संपूर्ण पूजन विधि और वे 5 खास उपाय जो आपके भाग्य को बदल सकते हैं।
 

मंगला गौरी व्रत का महिमा व महत्व

शास्त्रों के अनुसार, सावन के मंगलवार का दिन माँ पार्वती के 'मंगला गौरी' स्वरूप को समर्पित है:
अखंड सौभाग्य की प्राप्ति: सुहागिन महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए यह व्रत रखती हैं।
मनचाहा वर: अविवाहित कन्याएँ यदि पूरी श्रद्धा से यह व्रत रखें, तो उन्हें योग्य और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है।
सकारात्मक ऊर्जा का वास: माँ मंगला गौरी की कृपा से घर-परिवार से गृहक्लेश, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
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पूजन के शुभ मुहूर्त (11 अगस्त 2026)

पूजा के लिए सावन के इस पावन दिन पर निम्नलिखित शुभ मुहूर्त रहेंगे:
ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः साधना): सुबह 04:49 बजे से 05:34 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 12:18 बजे से 01:09 बजे तक
विजय मुहूर्त (शुभ कार्य हेतु): दोपहर 02:52 बजे से 03:43 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:09 से 07:31 तक
संध्या पूजा: शाम 07:09 से 08:16 तक
 

संपूर्ण पूजन विधि (चरण-दर-चरण)

प्रातः स्नान व संकल्प: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ व लाल/पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर निम्न मंत्र से व्रत का संकल्प लें:
"मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरीप्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरीव्रतमहं करिष्ये।"
(अर्थात्: मैं अपने पति, पुत्र-पौत्रों के सौभाग्य की वृद्धि तथा माँ मंगला गौरी की असीम कृपा प्राप्त करने हेतु इस व्रत का संकल्प लेती/लेता हूँ।)
 
चौकी स्थापना व दीपक: एक स्वच्छ लकड़ी की चौकी पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाकर माँ मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। माँ के समक्ष आटे से बना 16 बत्तियों वाला घी का दीपक प्रज्वलित करें।
आवाहन एवं षोडशोपचार पूजन: माँ का ध्यान करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें:
"कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम्। नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्॥"
इसके बाद माँ का विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन करें।
 
16 की संख्या में सामग्री अर्पण: माँ मंगला गौरी की पूजा में 16 की संख्या का विशेष महत्व है। माँ को 16 मालाएँ, 16 लौंग, 16 सुपारियाँ, 16 इलायची, 16 चूड़ियाँ, सुहाग की 16 सामग्रियाँ, फल, पान, लड्डू और मिठाई अर्पित करें। साथ ही 5 प्रकार के सूखे मेवे और 7 प्रकार के अनाज (गेहूँ, उड़द, मूँग, चना, जौ, चावल और मसूर) अर्पित करें।
कथा व आरती: व्रत कथा का पाठ करें या श्रद्धापूर्वक सुनें। अंत में आरती करें। इस व्रत में एक ही समय शुद्ध सात्विक अन्न ग्रहण करने का विधान है।
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5 अचूक उपाय (जो बदल सकते हैं आपका भाग्य)

शीघ्र विवाह एवं मनचाहे वर के लिए (16 श्रृंगार का दान): अविवाहित कन्याएँ इस दिन माँ मंगला गौरी को सुहाग की 16 वस्तुएँ अर्पित करें और पूजा के बाद इन्हें किसी योग्य ब्राह्मणी या सुहागिन स्त्री को दान कर दें। इससे विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं।
 
वैवाहिक जीवन में कड़वाहट दूर करने हेतु (लाल पुष्प व शहद): यदि दांपत्य जीवन में तनाव या अनबन रहती है, तो माँ मंगला गौरी को 16 लाल गुड़हल के फूल और शहद अर्पित करें। इसके बाद "ॐ ह्रीं मंगला गौर्यै नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
 
आर्थिक तंगी व कर्ज मुक्ति के लिए (16 बत्तियों का दीपक): इस दिन संध्या समय घर के मंदिर में आटे का 16 बत्तियों वाला दीपक जलाएं और उसमें थोड़ा-सा कपूर डाल दें। इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और धन वृद्धि के योग बनते हैं।
 
पति की दीर्घायु और आरोग्य हेतु (अन्न व वस्त्र दान): पूजा के पश्चात 7 प्रकार के अनाज का मिश्रण बनाकर किसी जरूरतमंद को दान करें। साथ ही किसी वृद्ध सुहागिन स्त्री के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें।
 
मंगल दोष शांत करने हेतु (सफेद इलायची और बताशे): यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष के कारण जीवन में परेशानियाँ आ रही हैं, तो मंगला गौरी पूजा के समय माँ को 16 छोटी इलायची और 16 बताशे चढ़ाएं और बाद में इसे प्रसाद स्वरूप परिवार में बाँट दें।
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