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Gangaur festival 2020 : लोक कला और संस्कृति का सौंधा सा पर्व गणगौर

शुक्रवार,मार्च 27, 2020
gangaur festival 2020
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घर में फालतू का सामान बहुत होता है और छूट जाती है वे जरूरी वस्तुएं जो हमारे जीवन में संकट के दौरान काम में आती है। आधुनिक युग में व्यक्ति उन वस्तुओं पर ज्यादा आश्रित हो गया है जो विज्ञान के द्वारा जन्मी है, लेकिन उन वस्तुओं के अभाव में व्यक्ति खुद ...
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गणगौर गीतों को झालरिया गीत कहते हैं। झालरिया गीत गणगौर के विशेष गीत हैं। कुछ गीत हैं जिनमें कन्या अपने पिता से अनुरोध करती है कि पिता हमें अभी ससुराल मत भेजो, अभी तो हमारे बाग-बगीचों में खेलने के दिन हैं। दादाजी हमारे बाप के कुआं-बावड़ी हैं, हमारे ...
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प्रतिवर्ष आने वाला यह गुड़ीपड़वा पर्व फिर आया। बधाइयां लाया, पर हम तो वहीं हैं जहां कल खड़े थे। समय बदल गया,कैलेंडर बदल गया, हम नहीं बदले। बधाई दे देना, नव वर्ष शुभ हो कहने भर से खुशियां कभी नहीं बरसतीं। नया बनना होगा, नया भाव जगाना होगा।
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'गुड़ी पड़वा' यानी सिर्फ वस्त्रालंकार, गुड़, धनिए, श्रीखंड पुरी का पर्व नहीं वरन विद्या विनय की सीख देने का दिन हैं। तन कर खड़ी 'गुड़ी'स्वाभिमान से जीने और जमीन पर लाठी की तरह गिरते ही साष्टांग नमस्कार कर जिंदगी के उतार-चढ़ाव में बगैर टूटे उठने का ...
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ताली बजाना सिर्फ खुशी जाहिर करने का तरीका ही नहीं बल्कि सेहत के लिए फायदेमंद भी है। अगर आप भी जानेंगे इसके यह गजब के फायदे, तो हैरान रह जाएंगे -
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कोरोना वायरस के चलते देश के प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अनुरोध किया था कि शाम 5 बजे अपने घर पर रहकर कोरोना योद्धाओं के सम्मान में तालियां और घंटियां बजाएं। आइए जानें घंटी के चमत्कार...
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शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही चंद्र की कला का प्रथम दिवस है। अतः इसे छोड़कर किसी अन्य दिवस को वर्षारंभ मानना उचित नहीं है।
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भारत का सबसे प्राचीन संवत है कल्पाब्ध, इसके बाद सृष्टि संवत और प्राचीन सप्तर्षि संवत का उल्लेख मिलता है। युग भेद से सतयुग में ब्रह्म-संवत, त्रेता में वामन-संवत एवं परशुराम-संवत तथा श्रीराम-संवत, द्वापर में युधिष्ठिर संवत और कलि काल में कलि संवत एवं ...
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करसोग घाटी ढेरों जड़ी-बूटियों आदि के पेड़ों से सजी एक ऐसी अनछुई घाटी है जिसका सौंदर्य देखते ही बनता है। शिमला से इसकी दूरी 106 किमी है। आओ जानते हैं इसके 7 अद्भुत रहस्य।
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पीतल, तांबे या लोहे का कड़ा कलाई में पहनने का प्रचलन सदियों से रहा है। कड़ा पहनने के फायदे हैं लेकिन यदि इसे नियम से नहीं पहना जाए तो नुकसान भी है। आओ जानते हैं 5 फायदे और पांच नुकसान
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सभी देवताओं ने हनुमानजी को वरदान दिए। इन वरदानों से ही हनुमानजी परम शक्तिशाली बन गए। आइए जानते हैं 8 शुभ वरदान कौन से हैं...
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हनुमान जी की निरंतर आराधना के बाद भी आपको लाभ नहीं मिल रहा है तो अवश्य ही आप कोई बड़ी गलती कर रहे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर क्यों नहीं मिलता कुछ लोगों को हनुमान चालीसा का लाभ...
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होली का त्योहार प्रकृति का पर्व है। इस पर्व को भक्ति और भावना से इसीलिए जोड़ा जाता है ताकि प्रकृति के इस रूप से आदमी जुड़े और उसकी अमूल्य धरोहरों को समझे जिनसे ही आदमी का जीवन है। मनुष्य का
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चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने नीति, धर्म, राजनीति और समाज की कई बातें लिखी हैं। उन्हीं में से 5 बातें जानिए। यह आपके जीवन में बहुत काम आएगे।
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प्राचीनकाल से ही लोग खाना खाने के बाद मीठा जरूर खाते हैं। हिन्दू शास्त्र और आयुरर्वेद में भी इसका उल्लेख मिलता है। मीठा खाने के संबंध में तो आपको पता ही होगा लेकिन बहुत कम लोग नहीं जानते होंगे कि खाने के पहले तीखा या कहें कि चरका क्यों खाते हैं। आओ ...
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संत गाडगे बाबा ने मानवता की भलाई के लिए कई संदेश दिए हैं। यहां पाठकों के लिए प्रस्त‍ुत हैं उनका दशसूत्री संदेश, जो हमें ईश्वर के करीब ले जाने की एक कड़ी है, आइए जानें
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एक छोटी-सी ज्ञान-गोष्ठी में स्वामी दयानंद के कुछ भक्त बैठे थे। उनमें से एक ने कहा- 'स्वामी जी, जो कुछ मैं पूछना चाहता हूं वह आपके निजी जीवन से संबंध रखता है, इसलिए पूछते हुए संकोच हो रहा है।'
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कभी आपने सोचा कि शिव प्रतीकों के पीछे का रहस्य क्या है? शिव की वेशभूषा ऐसी है कि प्रत्येक धर्म के लोग उनमें अपने प्रतीक ढूंढ सकते हैं। आओ जानते हैं शिव प्रतीकों के रहस्य...
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मंत्रों की तरंगे सूक्ष्म होती हैं और हमारे चारों ओर फैल जाती हैं। अब यह हम पर निर्भर है कि हम खुद को उसे ग्रहण करने के कितने योग्य बना पाते हैं।
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