7 बड़े धर्मान्तरण और भारत बन गया बहुधर्मी देश

धर्मांतरण किसी ऐसे नए धर्म को अपनाने का कार्य है, जो धर्मांतरित हो रहे व्यक्ति के पिछले धर्म से भिन्न हो। दुनिया में स्वेच्छा से धर्मांतरित होने के कम ही किस्से सुनने को मिलते हैं। इतिहास में ईसाई और मुस्लिमों के धर्मयुद्ध के बारे में तो पढ़ने को मिलता है। इसे क्रूसेड और जिहाद कहा जाता है। यह सब कुछ धर्म के
विस्तार के लिए ही हुआ था। पहला क्रूसेड 1096-99 के बीच हुआ। इसी दौर में जैंगी के नेतृत्व में मुसलमान दमिश्क में एकजुट हुए और पहली दफा अरबी भाषा के शब्द 'जिहाद' का इस्तेमाल किया गया जबकि उस दौर में इसका अर्थ संघर्ष हुआ करता था। इस्लाम के लिए संघर्ष नहीं, लेकिन इस शब्द को इस्लाम के लिए संघर्ष बना दिया गया। दूसरा क्रूसेड 1144 ईस्वी में फ्रांस के राजा लुई और जैंगी के गुलाम नूरुद्‍दीन के बीच हुआ। 1191 में तीसरे क्रूसेड की कमान उस काल के पोप ने इंग्लैड के राजा रिचर्ड प्रथम को सौंप दी जबकि यरुशलम पर सलाउद्दीन ने कब्जा कर रखा था।> > दुनिया में तीन ऐसे बड़े धर्म हैं जिनके कारण दुनिया में 'धर्मांतरण' जैसा शब्द अस्तित्व में आया। ये बड़े धर्म हैं- बौद्ध, ईसाई और इस्लाम। तीनों ही धर्मों ने दुनिया के पुराने धर्मों के लोगों को अपने धर्म में स्वेच्छा से दीक्षित किया और अस्वेच्छा से धर्मांतरित किया। उस काल में इन तीनों धर्मों के सामने थे हिन्दू, यहूदी धर्म के अलावा दुनिया के कई तमाम छोटे और बड़े धर्म।
भारत में प्राचीनकाल से ही दो धर्म अस्तित्व में रहे हैं- पहला जैन और दूसरा हिन्दू धर्म। यह आर्यों द्वारा स्थापित धर्म है। उक्त दोनों ही धर्म के लोगों को धर्मांतरण के लिए कहीं-कहीं स्वेच्छा से तो ‍अधिकतर जगह मजबूरी के चलते अपना धर्म छोड़कर दूसरा धर्म अपनाना पड़ा। प्राचीनकाल से लेकर आज तक भारतीय समाज में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण होते आए हैं। प्राचीनकाल में जैन और बौद्ध धर्मों में हिन्दुओं का धर्मांतरण हुआ, मध्यकाल में इस्लाम और सिख धर्म में और आधुनिक काल में हिन्दुओं का ईसाई, बौद्ध और इस्लाम में धर्मांतरण जारी है।

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