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विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में राजस्थान के प्रो. आशुतोष पारीक

फार्माकोलॉजी एवं फार्मेसी में 1.66 लाख से अधिक शोधकर्ताओं के बीच शीर्ष 2500 में स्थान, भारत के शीर्ष 45 शोधकर्ताओं में भी शामिल

Prof Ashutosh Pareek
Prof Ashutosh Pareek: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के मूल निवासी तथा वर्तमान में वनस्थली विद्यापीठ के फार्मेसी विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत प्रो. आशुतोष पारीक को वर्ष 2026 की प्रतिष्ठित एल्सेवियर विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है। यह उपलब्धि राजस्थान के फार्मास्यूटिकल शोध क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
 
फार्माकोलॉजी एवं फार्मेसी क्षेत्र में उनका स्थान 1,66,116 शोधकर्ताओं में 2403वां है। इस आधार पर वे विश्व के लगभग शीर्ष 1.45 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल हैं। भारत स्तर पर भी उनका शोध प्रभाव उल्लेखनीय है। इस क्षेत्र में सूचीबद्ध 371 भारतीय शोधकर्ताओं के तुलनात्मक विश्लेषण में वे प्रति शोधपत्र प्राप्त नॉन-सेल्फ साइटेशन के आधार पर शीर्ष 45 में शामिल हैं।

राजस्थान के 20 वैज्ञानिक इस सूची में

राजस्थान से फार्माकोलॉजी एवं फार्मेसी क्षेत्र में कुल 20 वैज्ञानिक इस सूची में शामिल हुए हैं। इनमें वनस्थली विद्यापीठ के प्रो. पारीक प्रति शोधपत्र 9.02 नॉन-सेल्फ साइटेशन के साथ शीर्ष पांच वैज्ञानिकों में शामिल हैं। राजस्थान से इस सूची में बिट्स पिलानी, वनस्थली विद्यापीठ और सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान जैसे नामी संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हैं, जो राज्य में फार्मास्यूटिकल एवं स्वास्थ्य विज्ञान शोध की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाता है।
 
प्रो. पारीक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, रायला से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजेंद्र मार्ग, भीलवाड़ा से पूर्ण की। आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने बी.एन. कॉलेज ऑफ फार्मेसी, उदयपुर से बी.फार्म तथा एम.फार्म (फार्मास्यूटिक्स) किया और दोनों पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए स्वर्ण पदक प्राप्त किया। विद्यार्थी जीवन से ही उनमें अध्ययन, अनुशासन और शोध के प्रति विशेष रुचि रही, जिसने आगे चलकर उनके वैज्ञानिक जीवन की दिशा निर्धारित की।
शिक्षा से जुड़े परिवार में पले-बढ़े प्रो. पारीक के पिता देवीलाल पारीक राजस्थान शिक्षा सेवा से सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हैं, जबकि उनकी माता भी राजकीय विद्यालय में गणित शिक्षिका रही हैं। पढ़ाई में उत्कृष्ट रहने के साथ प्रो. पारीक खेलों में भी सक्रिय रहे और कॉलेज के समय सॉफ्टबॉल में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया।

अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में शोध पत्र प्रकाशित

लगभग 18 वर्षों से औषधि विज्ञान, उच्च शिक्षा और शोध से जुड़े प्रो. पारीक के प्रमुख शोध क्षेत्रों में अस्थमा के लिए उन्नत ड्रग-डिलीवरी सिस्टम, न्यूरोफार्माकोलॉजी तथा कैंसर थेरेप्यूटिक्स शामिल हैं। उनके शोध द लैंसेट माइक्रोब सहित कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।
 
प्रो. पारीक को शोध के विभिन्न चरणों में भारत सरकार की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं डीबीटी, आईसीएमआर तथा डीएसटी-एसईआरबी से यंग साइंटिस्ट इंटरनेशनल ट्रैवल अवॉर्ड भी प्राप्त हुए हैं। उन्होंने अमेरिका में आयोजित अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंटिस्ट्स (एएपीएस) जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंचों पर अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए हैं।

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान 

प्रो. पारीक को उनके शोध और नवाचार कार्यों के लिए पूर्व में भी प्रो. एम.एल. श्रॉफ मेमोरियल नेशनल अवॉर्ड, आईपीजीए यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड तथा ज़ी नेशनल अचीवर्स अवॉर्ड सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

यह वैश्विक सूची अमेरिका स्थित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े प्रो. जॉन पी. ए. आयोनिडिस एवं सहयोगी वैज्ञानिकों द्वारा विकसित मानकीकृत शोध-साइटेशन संकेतकों पर आधारित है और एल्सेवियर डेटा रिपॉजिटरी पर प्रकाशित होती है।
 
यह सूची केवल शोधपत्रों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि शोध के प्रभाव का आकलन करने वाले कई मानकों पर तैयार की जाती है। इसमें शोधपत्रों को प्राप्त उद्धरण, एच-इंडेक्स, सह-लेखन, शोधपत्र में लेखक की भूमिका तथा सेल्फ-साइटेशन जैसे मानकों को शामिल किया जाता है। वर्ष 2026 की सूची स्कोपस के वर्ष 2025 तक के शोध एवं साइटेशन आंकड़ों पर आधारित है। प्रो. पारीक की यह उपलब्धि राजस्थान के वैज्ञानिक एवं औषधि शोध समुदाय की अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करती है।
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