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Written By WD Feature Desk
Last Updated : सोमवार, 9 फ़रवरी 2026 (16:57 IST)

कुंभ संक्रांति पर विजया एकादशी का दुर्लभ संयोग, जानें स्नान-दान और पूजा का सही तरीका

चित्र में सूर्य ग्रह और कुंभ राशि, कैप्शन में कुंभ संक्रांति का महत्व
Kumbh Sankranti 2026: 13 फरवरी, 2026 को कुंभ संक्रांति पर इस बार कुछ बेहद खास और दुर्लभ संयोग लेकर आ रही है। जब सूर्य देव अपने पुत्र शनि की राशि 'कुंभ' में कदम रखेंगे, तो उस दिन विजया एकादशी का पावन साथ भी मिलेगा। यह मेल साधना, दान और मोक्ष के द्वार खोलने वाला है।
 

कुंभ संक्रांति 2026: पिता-पुत्र का मिलन और एकादशी का संगम

ज्योतिष की दुनिया में कुंभ संक्रांति एक 'पॉवरफुल' घटना है। सूर्य (आत्मा) का प्रवेश शनि (न्याय) की राशि में होना, अनुशासन और आत्मज्ञान का प्रतीक है। इस बार प्रयागराज की त्रिवेणी पर संगम स्नान और विजया एकादशी का उपवास इस दिन के पुण्य को अनंत गुना बढ़ा देगा।
 

इस दिन का 'स्पिरिचुअल' महत्व

1. मोक्ष का मार्ग: माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में डुबकी लगाने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।
2. आरोग्य और आयु: सूर्य की उपासना से न केवल स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मानसिक स्पष्टता भी आती है।
3. शनि-सूर्य सामंजस्य: शनि देव सूर्य के पुत्र हैं। इस दिन तिल का दान और पूजा करने से शनि दोषों में भी राहत मिलती है।
 

विजया एकादशी पर कैसे करें पूजा? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

1. यदि आप इस दिन का पूर्ण लाभ उठाना चाहते हैं, तो इस सरल विधि का पालन करें:
2. ब्रह्म मुहूर्त स्नान: सुबह जल्दी उठें। यदि गंगा किनारे न जा सकें, तो घर पर ही जल में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें।
3. संकल्प: सूर्य देव और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
4. सूर्य अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, तिल और अक्षत लेकर 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र के साथ अर्घ्य दें।
5. पंचोपचार पूजा: दीप, धूप और पुष्प अर्पित करें। कुंभ संक्रांति और विजया एकादशी की कथा का श्रवण करें।
6. मंत्रों की शक्ति: सूर्य मंत्रों और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें।
7. पितृ तर्पण: यह दिन पितरों को याद करने के लिए भी श्रेष्ठ है। काले तिल मिले जल से उनका तर्पण करें।
 

क्या दान करें? (महापुण्य की पोटली)

संक्रांति पर 'दान' का अर्थ है ऊर्जा का आदान-प्रदान। इस दिन इन वस्तुओं का दान श्रेष्ठ माना गया है:
तिल और गुड़: शनि और सूर्य दोनों को प्रसन्न करने के लिए।
वस्त्र और कंबल: शीत ऋतु के अंत में इनका दान विशेष फलदायी है।
अन्न दान: किसी जरूरतमंद को भोजन कराना या कच्चा अनाज देना।
खास बात: 13 फरवरी को प्रयागराज में संगम के तट पर स्नान और दान का संगम होगा। यदि आप घर पर हैं, तो सात्विक भोजन ग्रहण करें और मानसिक जाप पर ध्यान केंद्रित करें।