PM मोदी ने दशहरे पर RSS प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की क्यों की तारीफ? बोले- आपका बयान प्रेरणादायी है...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के विजयादशमी उत्सव पर संघ प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की सराहना की। उन्होंने कहा कि भागवत ने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। उन्होंने संघ की 100 साल की यात्रा को सेवा, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सद्भाव का उल्लेखनीय शतक बताया।
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— Narendra Modi (@narendramodi) October 20, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के विजयादशमी उत्सव पर संघ प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की सराहना की। उन्होंने कहा कि भागवत ने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के विजयादशमी उत्सव पर संघ प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की सराहना की। उन्होंने कहा कि भागवत ने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।
इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में विजयादशमी उत्सव में भाग लिया। मोहन भागवत ने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन नहीं होगा। उन्होंने व्यवस्था को ख़त्म करने की कोशिश कर रही ताक़तों पर भी निशाना साधा। फ्रांस, अल्बानिया और बांग्लादेश में अशांति का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलनों का मक़सद समाधान तलाशना होना चाहिए।
आरएसएस प्रमुख ने कहा, यह तूफ़ान पश्चिम से उठा है, जो व्यवस्था के हर स्वरूप के ख़िलाफ़ है। उन्होंने कहा, हमारा देश प्राकृतिक विविधता, धर्मों, जातियों, खानपान और अन्य कई रूपों में विविधता से भरा है, इसलिए हमें ऐसी विचारधारा की ज़रूरत है, जो इन सभी को स्वीकार करे और उनका सम्मान करे। हमारी परंपरा, हमारी सनातन परंपरा, इस विचार को स्वीकार करती है।
मोहन भागवत ने कहा कि भारत को तोड़ने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि यह सोचना ग़लत है कि सत्ता बदलने से परिस्थितियां बदल जाएंगी। उन्होंने कहा, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है और आगे भी ऐसा नहीं होगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) में कथित अपारदर्शिता को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भागवत ने यह भी कहा कि आंदोलनों से बदलाव नहीं आता और समस्याओं का समाधान समाज के भीतर से ही निकलता है।
उन्होंने कहा, भारत उनका मुख्य निशाना है, क्योंकि भारत प्रगति कर रहा है। इन ताक़तों को पता है कि पिछले कुछ दशकों में निर्णायक नीतियों के साथ भारत ने जिस तरह आगे बढ़ा है, उसे वे बाधित नहीं कर सकते, इसलिए वे भारत और संघ को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। भागवत ने आगाह किया कि जब विरोध प्रदर्शन राजनीतिक होते हैं या उन्हें उकसाया जाता है, तो उनका इस्तेमाल तनाव, अराजकता और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए किया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, नागपुर में शताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उत्सव के दौरान परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का अत्यंत प्रेरणादायी संबोधन हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और समाज के चरित्र को सुदृढ़ करने जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। विशेष रूप से उल्लेखनीय था उनका वह जोर, जो उन्होंने 'सेवा' और 'राष्ट्र निर्माण' के प्रति उस प्रतिबद्धता पर दिया, जो हर आरएसएस स्वयंसेवक के जीवन का अभिन्न अंग है।
उन्होंने 'पंच परिवर्तन' के बारे में भी बात की और बताया कि किस प्रकार ये सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने में सार्थक योगदान दे सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना दिवस पर स्वयंसेवकों को बधाई दी। उन्होंने संघ की 100 साल की यात्रा को सेवा, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सद्भाव का उल्लेखनीय शतक बताया।
आज विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। राष्ट्रपति ने धर्म और न्याय की जीत का संदेश देते हुए विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की अपील की। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने सभी को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उल्लास और विश्वास का यह विजय पर्व हर किसी के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे। सभी का जीवन सुख-सौभाग्य और सफलता से समृद्ध हो, यही कामना है।

