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Last Updated : गुरुवार, 16 सितम्बर 2021 (14:57 IST)

चीन और पाकिस्तान से निपटेगी राकेट फोर्स, तालिबान के खतरे को देखते हुए पश्चिमी-उत्तरी सीमा पर बनेगी थिएटर कमांड : जनरल बिपिन रावत

चीन और पाकिस्तान से निपटेगी राकेट फोर्स, तालिबान के आशंकित खतरे को देखते हुए पश्चिमी-उत्तरी सीमा पर बनेगी थिएटर कमांड : जनरल बिपिन रावत  | Bipin Rawat
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने एक कार्यक्रम में कहा कि चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को अपनी हवाई ताकत और बढ़ानी होगी। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय सेना राकेट फोर्स गठित करने की तैयारी कर रही है।

 
सीडीएस बिपिन रावत ने भारत की सैन्य चुनौतियों, सुरक्षा सिद्धांत और सशस्त्र सेना में सुधार प्रक्रिया के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि भारत का दो शत्रु पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद चल रहा है और चीन और पाकिस्तान ने बीते दिनों काफी आक्रामकता का परिचय दिया है। जनरल रावत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से इन जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की जरूरत पड़ेगी।

 
अफगानिस्तान में तालिबान का शासन भारत के लिए नया खतरे से जुड़े प्रश्न पर जनरल रावत ने कहा कि किसी ने भी नहीं सोचा था कि तालिबान इतनी तेजी से अफगानिस्तान पर कब्जा कर लेगा। इसके साथ ही जनरल रावत ने आगाह किया कि चीन अफगानिस्तान में अपने पैर मजबूती के साथ जमाना चाहेगा। इसके साथ ही उसकी आक्रामकता समय के साथ और भी बढ़ेगी। 
 
ऐसे में पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान और उत्तरी मोर्चे पर चीन के रूप में दो चुनौतियां भारत के सामने मुंह बाए खड़ी हैं। इनसे निपटने के लिए न सिर्फ दोनों ही मोर्चों पर थिएटर कमांड स्थापित करने की योजना है, बल्कि रॉकेट फोर्स बनाने की भी दिशा में काम करना पड़ेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पैदा होने वाली चुनौतियों से उच्च स्तरीय तकनीक और तीनों सेनाओं के बेहतर समन्वय से निपटा जा सकेगा।

 
सीमावर्ती राज्यों की चुनौतियों पर सीडीएस बिपिन रावत ने कहा कि चीन के समर्थन से पाकिस्तान भारत के खिलाफ छद्म युद्ध जारी रखे हुए है। वह जम्मू-कश्मीर में तो छद्म युद्ध लड़ ही रहा है और अब पंजाब और कुछ अन्य इलाकों में ऐसा ही युद्ध शुरू करने की कोशिश कर रहा है। चीन ने भी देश की उत्तरी सीमा पर अपनी हरकतें दिखानी शुरू कर दी है। अब हमें इस तरह के आक्रमणों से तकनीक से ही निपटना है। इसके लिए तीनों सेनाओं को साथ मिलकर कार्य करना होगा।