Heart Patients के लिए खुशखबर, शॉक वेव के साथ किया जा सकेगा कोरोनरी ब्लॉकेज का इलाज

Last Updated: रविवार, 19 जनवरी 2020 (18:08 IST)
अहमदाबाद के सुप्रसिद्ध अस्पताल सीम्स में 13 जनवरी 2020 को 'ट्रांस रेडियल इंस्ट्रावस्कुलर लिथोट्रिप्सी' (शॉक वेव IVL) से 3 मामलों में केल्सीफाइड कोरोनरी धमनियों का सफलतापूर्वक इलाज मेडिकल की दुनिया में एक बड़ी सफलता हासिल की है।
ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया द्वारा अनुमोदन पर कोरोनरी धमनियों में जमे कैल्शियम के निर्माण को चुनौती देने के लिए एक लंबा इंतजार किया जा रहा था।
पिछले सप्ताह ही 3 मामलों में शॉक वेव इंस्ट्रावस्कुलर लिथोट्रिप्सी द्वारा उपचार कर सीम्स अस्पताल ने इस क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
शॉक वेव इंस्ट्रावस्कुलर लिथोट्रिप्सी ध्वनि तरंगों और लिथोट्रिप्सी के सिद्धांत का उपयोग करता है, जो कि कम दबाव पर बनाया गया है और कैल्शियम बिल्डअप को चुनौती देता है।
इन लगातार तीन मामलों में भारत के शॉकवेव इंट्रावस्कुलर लिथोट्रिप्सी के सिद्धांत का प्रयोग जाने-माने डॉ. केयूर पारिख, डॉ. तेजस वी पटेल और सीम्स के विशेषज्ञ और कार्डियोलॉजी टीम के साथ किया गया।

शॉक वेव को एक अद्वितीय पल्स जनरेटर के बटन को दबाकर संचालित किया जाता है, जो सिस्टम के कंसोल से केवल 30-40 सेकंड जुड़ा होता है।
सुरक्षित डिवाइस बटन के कुछ प्रेस के साथ जो कैल्शियम को चुनौती देने की अनुमति देता है।

सीम्स के डॉ. केयूर परिख ने बताया कि शॉक वेव इंस्ट्रावस्कुलर लिथोट्रिप्सी वास्तव में एक बहुत बड़ी जीत है।

शॉक वेव से हार्ड कैल्शियम के साथ जटिल ब्लॉकेज को बहुत सरल तरीके से प्रतिकूल घटनाओं का कम खर्च में इलाज संभव है।


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