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राजस्थान के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत इन 5 कारणों से सचिन पायलट पर पड़े भारी...

राजस्थान के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत इन 5 कारणों से सचिन पायलट पर पड़े भारी... - Ashok Gehlot becomes chief minister of Rajasthan
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम पर मुहर लगा दी है। जानिए अशोक गेहलोत से जुड़ी खास बातें...


पार्टी के तारणहार : अशोक गहलोत दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और पार्टी के अनुभवी नेता माने जाते हैं। वे कई बार मुश्किल परिस्थितियों में पार्टी के तारणहार भी बने हैं। हालांकि 2013 में हुए विधानसभा चुनावों में उनके नेतृत्व में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। बहरहाल पार्टी नेतृत्व ने जोश पर अनुभव को प्राथमिकता दी।

जमीन से जुड़े नेता : अशोक गहलोत को प्रदेश की सियासत में जमीन से जुड़ा नेता माना जाता है। लंबे समय से राजनीति में सक्रिय गहलोत राजस्थान में काफी लोकप्रिय रहे हैं और उन्हें 'राजनीति का जादूगर' और 'मारवाड़ का गांधी' जैसे उपनामों से भी बुलाया जाता है।

इंदिरा लाई थीं राजनीति में : अशोक गहलोत इंदिरा गांधी के जमाने के नेता हैं। वे पूर्वोत्तर क्षेत्र में शरणार्थियों के बीच अच्छा काम कर रहे थे और इंदिरा उनके काम से काफी प्रभावित थीं। 1974 में वे एनएसयूआई अध्यक्ष बने। वे 1979 तक इस पद पर रहे। 1979 से 1982 तक वे कांग्रेस पार्टी के जोधपुर जिला अध्यक्ष रहे और 1982 में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव बने।

पांच बार सांसद, पांच बार विधायक : अशोक गहलोत पांच बार सांसद रह चुके हैं और पांचवीं बार विधायक चुने गए हैं। वे केंद्र और राज्य दोनों ही जगह मंत्री पद संभाल चुके हैं। अशोक गहलोत तीन बार कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रहे हैं। सचिन पायलट की तुलना में उन्हें राजनीति का काफी अनुभव है।

लोकसभा चुनाव : आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी तीनों ही राज्यों की कमान अनुभवी नेताओं को सौंपना चाहती थी। इसी वजह से मध्यप्रदेश में कमलनाथ और राजस्थान में गहलोत को मौका मिला। सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी में भविष्य का चेहरा माना जाता है।