Hanuman Chalisa

मकर संक्रांति और सूर्य के उत्तरायण के पर्व में क्या है अंतर?

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 13 जनवरी 2026 (11:03 IST)
What is Makar Sankranti: मकर संक्रांति वह पर्व है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और यह एकमात्र ऐसा हिंदू त्योहार है जो सौर गणना पर आधारित है, इसलिए लगभग हर वर्ष 14 या 15 जनवरी को ही आता है। वहीं सूर्य उत्तरायण एक खगोलीय घटना है, जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तर दिशा की ओर अपनी गति शुरू करता है, जिसे देवताओं का दिन भी कहा गया है। इस काल को शुभ, सकारात्मक, उन्नति और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण मकर संक्रांति पर स्नान, दान, जप, तप, पितृ तर्पण, पतंग उड़ाना, तिल-गुड़ का सेवन जैसी परंपराएं प्रचलित हैं।ALSO READ: Vastu Tips for Makar Sankranti: मकर संक्रांति पर करें वास्तु के अनुसार ये खास उपाय, चमकेगी 12 राशियों की किस्मत
 
मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी या कैलेंडर के अनुसार कभी-कभी 15 जनवरी को होती है। मकर संक्रांति और उत्तरायण को अक्सर एक ही मान लिया जाता है, लेकिन वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इनमें एक बारीक अंतर है। इसे आप इस तरह समझ सकते हैं:
 
1. परिभाषा का अंतर:
मकर संक्रांति: यह वह क्षण है जब सूर्य मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश करते हैं। 'संक्रांति' का अर्थ ही है एक राशि से दूसरी राशि में जाना। चूंकि यह सूर्य के राशि परिवर्तन पर आधारित है, इसलिए इसे 'मकर संक्रांति' कहते हैं।
 
उत्तरायण: इसका अर्थ है सूर्य का 'उत्तर की ओर अयन' या गमन। जब सूर्य दक्षिणी गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) की ओर बढ़ना शुरू करते हैं, तो उस काल को 'उत्तरायण' कहा जाता है।
 
2. खगोलीय अंतर: प्राचीन काल में मकर संक्रांति और उत्तरायण एक ही दिन होते थे, लेकिन पृथ्वी की धुरी के झुकने के कारण अब इनमें अंतर आ गया है:
 
वास्तविक उत्तरायण: वैज्ञानिक रूप से उत्तरायण 21 या 22 दिसंबर से ही शुरू हो जाता है। इस दिन साल की सबसे लंबी रात होती है और इसके बाद से दिन बड़े होने लगते हैं। उत्तरायण का समय 14 जनवरी से शुरू होता है, जो मकर संक्रांति के साथ मेल खाता है, लेकिन यह खगोलीय घटना है, जो हर साल उसी दिन होती है, चाहे वह तिथि मकर संक्रांति के साथ मेल खाती हो या न हो।
 
धार्मिक उत्तरायण: हिंदू पंचांग के अनुसार, हम मकर संक्रांति (14-15 जनवरी) से सूर्य को उत्तरायण मानते हैं। शास्त्रों में मकर संक्रांति को ही उत्तरायण का प्रारंभिक बिंदु माना गया है। इस दिन को पतंग उड़ाने, दान देने और स्नान करने की परंपराएं जुड़ी होती हैं।ALSO READ: मकर संक्रांति के 5 खास उपाय, हर संकट से निजात दिलाए

मकर संक्रांति का पर्व मुख्य रूप से भारत और नेपाल में मनाया जाता है, और यह विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न नामों से जाना जाता है- जैसे पंजाब में इसे लोहड़ी, दक्षिण भारत में पोंगल, कर्नाटका में संक्रांति और महाराष्ट्र में संक्रांति कहते हैं।
 
अत: यह कहा जा सकता है कि मकर संक्रांति यानी सूर्य का मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण अर्थात् सूर्य की दिशा का उत्तर की ओर झुकाव। यह एक विशेष क्षण या दिन है यह 6 महीने की एक लंबी अवधि है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे 'देवताओं का दिन' शुरू होना माना जाता है। भीष्म पितामह ने देह त्याग के लिए इसी काल की प्रतीक्षा की थी।
 
संक्षेप में देखा जाए तो मकर संक्रांति पर्व है, जबकि उत्तरायण सूर्य की स्थिति है। गुजरात जैसे राज्यों में इस पूरे त्योहार को 'उत्तरायण' के नाम से ही जाना जाता है, जबकि उत्तर भारत में इसे 'खिचड़ी' या 'मकर संक्रांति' कहते हैं।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: मकर संक्रांति पर करते हैं ये 10 तरह के दान तो मिलता है इस दिन हजार गुना पुण्य

लेखक के बारे में
WD Feature Desk
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 09 अगस्‍त 2026: रविवार का पंचांग और शुभ समय

दूसरे सोमवार को करें ये आसान उपाय, श्रावण के 12वें दिन इस मंत्र से प्रसन्न होंगे शिवजी और चंद्रदेव

श्रावण मास में रविवार का खास उपाय, 11वें दिन इस मंत्र का जाप करने से प्रसन्न होंगे शिवजी और सूर्यदेव

12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण: इन 5 राशियों के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें, रहें सतर्क

सावन का दूसरा सोमवार और सोम प्रदोष का महासंयोग: जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और विशेष उपाय

अगला लेख