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Written By WD Feature Desk
Last Modified: शनिवार, 10 जनवरी 2026 (15:27 IST)

सबरीमाला मंदिर के सामने स्थित पहाड़ी पर 3 बार दिखाई देने वाले दिव्य प्रकाश का क्या है रहस्य?

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Makaravilakku festival Makarajyothi 2026: सबरीमाला मंदिर में दिखाई देने वाले उस दिव्य प्रकाश को 'मकरज्योति' (Makarajyothi) कहा जाता है। हर साल मकर संक्रांति की शाम को सबरीमाला के सामने 'पोन्नम्बलमेडु' (Ponnambalamedu) पहाड़ी पर यह ज्योति तीन बार चमकती है। इसके रहस्य और वास्तविकता को लेकर दो मुख्य पहलू हैं: एक आध्यात्मिक विश्वास और दूसरा प्रशासनिक स्पष्टीकरण।
 
1. आध्यात्मिक मान्यता (Faith)
भक्तों का अटूट विश्वास है कि मकर संक्रांति के दिन भगवान अयप्पा के आभूषण (थिरुवभरणम) मंदिर पहुँचते हैं और उनकी विशेष आरती होती है। ठीक उसी समय सामने वाली पहाड़ी पर भगवान स्वयं ज्योति के रूप में दर्शन देते हैं। इसे एक दिव्य चमत्कार माना जाता है और लाखों श्रद्धालु 'स्वामी शरणम अयप्पा' के जयघोष के साथ इसके दर्शन करते हैं। अयप्पा स्वामी के मंदिर के पास आकाश में मकर संक्रांति की रात घने अंधेरे में रह-रहकर यहां एक ज्योति दिखाई देती है। बताया जाता है कि जब-जब ये रोशनी दिखती है, इसके साथ शोर भी सुनाई देता है।
 
इस ज्योति के दर्शन के लिए दुनियाभर से करोड़ों श्रद्धालु हर साल आते हैं। भक्त मानते हैं कि ये देव ज्योति है और भगवान इसे जलाते हैं। इस मकर ज्योति तारे की पूजा होती है। मकर संक्रांति के दिन भगवान अय्यप्पा के सहस्रों भक्त मकरविलक्कु अर्थात् दिव्य ज्योति के दर्शन के लिए एकत्रित होते हैं।
 
2. मकर तारा (Makar star)
मंदिर प्रबंधन के कुछ पुजारियों के अनुसार मकर माह के पहले दिन आकाश में दिखने वाला एक खास तारा मकर ज्योति है। मकर ज्योति सूरज के बाद दूसरा सबसे चमकीला तारा है, जो हमारे आसमान में दिखता है जिसकी रोशनी दिखाई देती है। हालांकि लोगों का मानना कुछ और ही है, क्योंकि यदि ऐसा होता तो यह ज्योति और कहीं क्यों नहीं दिखाई देती है?
 
3. ऐतिहासिक और प्रशासनिक स्पष्टीकरण (The Reality)
समय-समय पर उठने वाले विवादों और अदालती हस्तक्षेप के बाद, मंदिर प्रशासन (त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड) ने यह स्पष्ट किया है कि यह कोई प्राकृतिक चमत्कार या दैवीय शक्ति नहीं है, बल्कि एक मानव-निर्मित अनुष्ठान है।
 
प्राचीन काल: पुराने समय में इस पहाड़ी पर 'मलय अराया' (Malay Araya) जनजाति के लोग रहते थे। वे संक्रांति के दिन वहाँ पूजा और दीप प्रज्वलन करते थे।
 
वर्तमान प्रक्रिया: अब इस परंपरा को केरल पुलिस, विद्युत विभाग और मंदिर बोर्ड के कर्मचारी मिलकर निभाते हैं। पहाड़ी पर एक बड़े बर्तन में भारी मात्रा में कपूर (Camphor) जलाया जाता है।
 
3 बार क्यों?: कपूर को जलाते समय उसे एक बड़े बर्तन से ढका और हटाया जाता है, जिससे दूर से देखने पर वह प्रकाश तीन बार 'चमकता' (Flash) हुआ प्रतीत होता है।
 
4. 'मकर ज्योति' और 'मकर विलक्कू' में अंतर
अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनमें सूक्ष्म अंतर है:
मकर ज्योति: वह तारा है जो आकाश में मकर संक्रांति के दिन सबसे पहले दिखाई देता है (खगोलीय घटना)।
मकर विलक्कू: वह दीपक या प्रकाश है जो पहाड़ी पर जलाया जाता है (अनुष्ठान)।
 
भले ही प्रशासन ने इसे मानव-निर्मित बताया है, लेकिन भक्तों के लिए इसका महत्व कम नहीं हुआ है। उनके लिए यह प्रकाश उस दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है जो कठिन उपवास और यात्रा के बाद उनके कष्टों को दूर करती है।
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