नंदू भैय्या को आखिरी विदाई देते रो पड़े CM शिवराज, केंद्रीय मंत्रियों समेत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी दी अंतिम विदाई

Author विकास सिंह| Last Updated: बुधवार, 3 मार्च 2021 (23:33 IST)
बुरहानपुर। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सांसद नंदकुमारसिंह चौहान की पार्थिव देह बुधवार दोपहर पंचतत्व में विलीन हो गई। नंदू भैया के पैतृक नगर शाहपुर में धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे हर्षवर्धन ने उन्हें मुखाग्नि दी। नंदू भैया की अंतिम यात्रा हजारों की‌ संख्या में लोग शाहपुर पहुंचे‌ थे।

नंदू भैया को अंतिम विदाई देने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्रसिंह तोमर, थावरचन्द गेहलोत, फग्गनसिंह कुलस्ते, प्रहलाद पटेल, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित पार्टी के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता भी‌ शाहपुर ‌पहुंचे और नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
अपने साथी नंदू भैया को‌ आखिरी विदाई देते हुए मुख्यमंत्री ‌शिवराज सिंह चौहान भावुक हो गए। नंदू भैया को नम आंखों से श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री शिवराज‌सिंह चौहान ने खंडवा मेडिकल कॉलेज और बुरहानपुर के नए जिला अस्पताल तथा गन्ना केंद्र का नाम नंदू भैया के नाम पर रखे जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नंदु भैया की कमी पूरी नहीं हो सकती, उनकी स्मृति बनी रहे। यही हमारा प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शाहपुर में उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरे पास शब्द नहीं हैं, कैसे नंदू भैया को श्रद्धांजलि दूं। कभी ऐसा सोचा नहीं था कि इतनी जल्दी नंदू भैया को श्रद्धांजलि देना पड़ेगी। आपसे माफी चाहता हूं। हमने कोशिश बहुत की, लेकिन नहीं बचा पाए। मुझे तो आज सूना सूना लगता है। शाहपुर, खंडवा, बुरहानपुर, रेवा तट सब सूना है।

नंदू भैया को श्रद्धांजलि देते हुए प्रदेश विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि हमने ऐसे नेता को खोया है, जिनकी सहजता और सरलता के कारण आज उन्हें प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ता और आमजन हृदय की गहराइयों से याद कर रहे हैं। नंदू भैया जब प्रदेश अध्यक्ष थे, तब मैं महामंत्री था। उन्होंने बहुत सहजता के साथ मुझे बहुत कुछ सिखाने का प्रयास किया।
नंदू भैया को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि नंदू भैया का इस तरह जाना बहुत दुखद है। हमें भरोसा नहीं होता कि हम सबके अपने नंदू भैया अब नहीं हैं, चले गए हैं।



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