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सदियों पहले छोटी नावों में सात हजार किलोमीटर का सफर करने वाले लोग

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निखिल रंजन
दक्षिण प्रशांत महासागर के ईस्टर आईलैंड से समुद्री नाविकों का एक दल छोटी नावों में बैठकर पृथ्वी के सबसे बड़े महासागर को पार कर हवाई द्वीप तक पहुंच गया। उत्तरी गोलार्ध का यह अकेला पोलेनेसियाई द्वीप था। यह दूरी करीब 7,100 किलोमीटर लंबी है। ये लोग अपने साथ जरूरी चीजें लेकर इतनी लंबी यात्रा के बाद अपना घर बसाने आए थे। यही लोग बाद में हवाई द्वीप के मूलनिवासी कहलाए। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कहानी सच्ची है। ALSO READ: 100 साल पहले मिले जीवाश्म ने दी नए डायनासोर की खबर
 
मानव इतिहास में यह एक बिल्कुल अकल्पनीय और असाधारण कारनामा था। हालांकि, सदियों पुरानी यह लंबी समुद्री यात्रा अब कोई मिथक नहीं है। रिसर्चरों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि हवाई द्वीप के मूल निवासी ईस्टर आइलैंड के लोगों के करीबी रिश्तेदार हैं, कम से कम जेनेटिक रूप से। ईस्टर आइलैंड को रापा नुई भी कहा जाता है।
 

जेनेटिक विश्लेषणों से मिले सबूत 

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के कंप्युटेशनल जेनेटिसिस्ट यानी कंप्यूटर, गणित और डेटा विश्लेषण का उपयोग कर जीन, डीनएन और वंशानुगत गुणों का पता लगाने वाले आलेक्जांडर लोआनिडिस साइंस जर्नल में प्रकाशित नई रिसर्च रिपोर्ट के सह लेखक हैं। उनका कहना है, "पूरे जीनोम का इस्तेमाल कर हमारे अल्गोरिद्म दोनों द्वीपों के निवासियों की डीएनए सीक्वेंस से सीधे मेल खाते दिखा रहे हैं जो उनके साझे पूर्वजों की विरासत हैं। इन आकड़ों के इस्तेमाल से द्वीपों की पारिवारिक वंशावली तैयार की जा सकती है।
 
यह खोज इशारा करती है कि ज्वालामुखी वाले हवाई द्वीप पर बसने वाले पहले मानव समूह ईस्टर द्वीप से आए थे। पोलेनेसियाई लोग लंबी समुद्री यात्राओं के लिए जाने जाते हैं।
 
लोआनिडिस के मुताबिक, आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ईस्टर द्वीप पर बसने वाले लोग यहां तेरहवीं सदी में आए थे। ये लोग फ्रेंच पोलिनेसिया मांगारेवा आइलैंड से 2,400 किलोमीटर की यात्रा कर आए थे। उन्हीं में से कुछ लोगों का समूह हवाई के लिए आगे बढ़ गए। यह यात्रा भी उसी सदी में हुई।
 
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के जीनोम साइंटिस्ट और रिसर्च रिपोर्ट के सहलेखक केउलु फॉक्स ने बताया, "हमने डीएनए के साझे हिस्सों, जेनेटिक बदलावों और दोबारा बनाई गईं हजारों पारिवारिक वंशावलियों का परीक्षण किया है। उन वंशावलियों में 61 फीसदी हवाई और रापा नुई के आपस में जुड़ गए। हमने उन्हें चार अलग अलग तरीकों से परखा क्योंकि नतीजे इतने हैरान करने वाले थे कि हमें खुद पर ही भरोसा नहीं हो रहा था।"
 

कौन हैं पोलेनेसियाई लोग

लोआनिडिस ने कहा है कि यह यात्रा अतुलनीय रही होगी। लोआनिडिस के मुताबिक, "अपनी नावों में अपने साथ वे उन पौधों को भी लाए थे जिनकी उन्हें नए द्वीप पर जरूरत होगी और उनमें केला, टारो और शकरकंद और मुर्गे जैसे जीव भी शामिल थे। माना जाता है कि पोलिनेसिया संसाधनों के धनी और बसने के लिए जमीन वाले द्वीपों की खोज में हजारों मीलों की समुद्री यात्रा पर गए।"
 
रिसर्चरों ने जेनेटिक डेटा के आधार पर लंबी यात्राओं के सिरे जोड़े हैं। अलग-अलग पोलिनेसियाई द्वीपों के रहने वालों का रिश्ता पता लगाने के लिए 1,000 से अधिक पोलिनेसियाई लोगों के डीएनए का विश्लेषण किया गया है। इनमें 317 हवाई मूल निवासी, 12 रापा नूई के और आठ मांगारेवैंस के लोग शामिल हैं। इनके अलावा सोसायटी, तुआमोतू, मारक्वेसास, ऑस्ट्राल, समोआ और टोंगा द्वीपों के भी लोग शामिल हैं। ALSO READ: 194 साल का कछुआ जोनाथन बता सकता है लंबे जीवन का रहस्य
 

महासागर को पार करने की कवायद

रिसर्चरों ने महासागरों के पार जाने की इस भारी भरकम कवायद का श्रेय लंबी यात्रा करने वाली आबादी को दिया है जिन्हें वे होलमोआना नुई कहते हैं। इन हवाईयन शब्दों का मतलब है "महासागरों की लंबी यात्राएं।" इनलोगों की आखिरी मंजिल हवाई थी।
 
फॉक्स खुद भी मूल रूप से हवाईयन हैं। उनके मुताबिक ये लोग मानव इतिहास के सबसे महान यात्री समुदाय थे। उनका कहना है, "पोलिनेसियाई लोग यूरोपीय लोगों की महान यात्राओं से कई सदी पहले से प्रशांत महासागर में घूम रहे थे और बस्तियां बना रहे थे। किन लोगों को खोजी कहा जाए इस बारे में दोबारा सोचने का वक्त आ गया है।"
 
जेनेटिक आंकड़ों का इस्तेमाल कर रिसर्चरों ने पहले पता लगाया है कि पोलेनेसियाई यात्री कैसे सदियों के दौर में एक के बाद एक द्वीपों पर पहुंचे। यह मानव इतिहास की सबसे महान यात्राओं में से हैं, हालांकि, रिसर्च अब तक ईस्टर द्वीप तक ही पहुंच सकी हैं।
 

ताहिती का विकास

नई रिसर्च में ताहिती के लोगों के जीनोम का एक विस्तृत विश्लेषण किया गया है। यह सोसायटी द्वीपसमूह का एक द्वीप है जिसके निवासियों के सबसे ज्यादा जीनोम रिसर्चरों को मिले हैं। वे उनकी नींव डालने वाली पीढ़ी का आकार और यहां पहुंचने का समय तय करने में सफल हुए हैं। रिसर्चरों को मुताबिक, लगभग 800 लोग साल 1070 के करीब ताहिती पहुंचे थे।
 
लोआनिडिस का कहना है, "हवाई की यात्रा बहुत लंबी थी तो हमें उम्मीद है कि उसकी नींव जिन लोगों ने डाली थी वह ज्यादा बड़ी ना हो कर छोटी रही होगी।" रिसर्चर बताते हैं कि हवाई के मूल निवासी और ईस्टर द्वीपवासियों के बीच कई सांस्कृतिक समानताएं भी हैं जो पूर्वी पोलेनिसियाई लोगों में पाई जाती हैं। इनमें ऑस्ट्रोनेसियाई भाषा और एक तरह का खाना भी शामिल है। इनमें शकरकंद, तारो, केला, गन्ना समेत कई ऐसी चीजें हैं जो दोनों जगह खाने में शामिल की जाती हैं। 
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