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स्मृति और जेमीमा की धीमी पारी से कप्तान और फैंस नाराज, हारने की बड़ी वजह

India
स्मृति मंधाना और जेमीमा रॉड्रिगेस बहुत अच्छी सहेलियां है लेकिन इन दो सहलियों की धीमी पारी ने भारत को टी-20 विश्वकप से बाहर का रास्ता दिखाने में अहम भूमिका निभाई। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ स्मृति मंधाना ने 6 चौकों की मदद से 37 गेंदों में 38 रन बनाए। वहीं जेमीमा ने 28 गेंदों में एक चौका और छक्का लगाकर 34 रन बनाए। इसमें से एक चौका शुरुआत में और छक्का पारी के अंत में आया। इनकी धीमी बल्लेबाजी से ना केवल फैंस बल्कि कप्तान हरमनप्रीत कौर नाराज है जिन्होंने प्रेस वार्ता में यह स्पष्ट किया।


कप्तान हरमनप्रीत कौर ने आस्ट्रेलिया से मिली हार के बाद महिला टी20 विश्व कप से बाहर होने के बाद रविवार को कहा कि भारतीय टीम अपने स्तर की क्रिकेट नहीं खेल सकी और अब पुनर्विचार का समय आ गया है।हरमनप्रीत ने मैच के बाद कहा ,‘‘ हम कुछ समय तक मैच में थे लेकिन अपने स्तर का खेल नहीं दिखा सके। एक ईकाई के रूप में हमें कई चीजों पर विचार करना होगा।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ हमारा स्कोर ठीक ठाक था। एक समय हमें लगा कि हम कुछ पीछे रह गए हैं लेकिन आखिरी ओवर में मैने भरपाई की। लेकिन हम अच्छा नहीं खेले। आस्ट्रेलिया ने उम्दा गेंदबाजी की। पूरे टूर्नामेंट में अच्छी टीमों के खिलाफ हमारा प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा।’’

कोच ने भी कोसा धीमी बल्लेबाजी को

भारत के महिला टी20 विश्व कप के ग्रुप चरण से बाहर होने के बाद मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने स्वीकार किया कि टीम ने तीनों विभाग में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया और उसे खेल के सबसे छोटे प्रारूप में अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने की जरूरत है।मजूमदार ने मैच के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘हमें अपनी रणनीति या अपने टी20 खेल पर फिर से विचार करना होगा। हमें वास्तव में यह तय करना होगा कि हम किस संयोजन के साथ खेलने जा रहे हैं।’’

भारतीय कोच ने हालांकि कहा कि उनकी टीम ने चुनौती पूर्ण स्कोर बनाया था लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने उनसे बेहतर प्रदर्शन किया।उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमने अच्छा स्कोर बनाया था। हमने पारी के अंत में लय भी हासिल कर ली थी और मुझे लगता है कि हमने इसे मैदान पर भी बरकरार रखा। लेकिन आखिर में ऑस्ट्रेलिया हमसे बेहतर टीम साबित हुई।’’

बल्लेबाजी कभी भी लय में नहीं दिखी

असल में पूरे टूर्नामेंट में भारत की बल्लेबाजी कभी भी लय में नहीं दिखी। शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों के नियमित योगदान के बावजूद मध्य क्रम के बल्लेबाज अच्छी शुरुआत का फायदा उठाने में बार-बार नाकाम रहे।टूर्नामेंट के दौरान भी तेज आक्रमण, मध्यक्रम के संयोजन और हरफनमौलाओं के विकल्प को लेकर सवालों के जवाब नहीं मिल सके।

तेज गेंदबाजी में विकल्प कम

पांच ग्रुप मैचों में तेज आक्रमण में कई बदलाव किये गए। नंदनी शर्मा और क्रांति गौड़ ने तीन तीन मैच खेले जबकि रेणुका सिंह और अरूंधति रेड्डी को दो ही मैचों में उतारा गया। हरफनमौला तेज गेंदबाज अमनजोत कौर और आफ स्पिनर श्रेयंका पाटिल की चोट ने मुश्किलें बढाई।बायें हाथ की स्पिनर श्री चरणी ने छह से कम की किफायत दर से 14 विकेट चटकाये। रेणुका जैसी अनुभवी गेंदबाज का पूरा इस्तेमाल नहीं करना भी समझ से परे रहा।

बल्लेबाजी में बीच के ओवरों में रनगति बहुत ही कम रही। यास्तिका भाटिया और जेमिमा रौड्रिग्स ने निराश किया जिससे रिचा घोष और दीप्ति शर्मा पर दबाव बना। स्मृति मंधाना का स्ट्राइक रेट भी चिंता का विषय रहा।

लचर फील्डिंग ने बढ़ाई टेंशन

इसके अलावा भारत की फील्डिंग काफी लचर रही। भारतीय टीम ने पांच मैचों में दस कैच टपकाये और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मरियाने काप का कैच छोड़ना भारी पड़ा जिससे भारत को पराजय का सामना करना पड़ा।बांग्लादेश के खिलाफ भी पहले पांच ओवर में चार कैच छूटे।

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