खराब फॉर्म से गुजर रहे नंबर 1 T20I बल्लेबाज और गेंदबाज क्या फाइनल में होंगे बाहर?
भारत एक बार फिर T-20I विश्वकप के फाइनल में है और इस बार कुछ कड़े प्रशन उसके सामने खड़े हैं जो टूर्नामेंट की शुरुआत में नहीं थे। भारतीय टीम प्रबंधन पर फैंस और प्रदर्शन के पैमाने के तहत दुनिया के नंबर 1 बल्लेबाज अभिषेक शर्मा और नंबर 1 गेंदबाज वरुण चक्रवर्ती को अंतिम एकादश से बाहर रखने का दबाव बनाया जा रहा है।
इस टूर्नामेंट में भारत के दो सलामी बल्लेबाजों की किस्मत एकदम से विपरीत रही। जब प्रतियोगिता शुरू हुई तो अभिषेक को शीर्ष क्रम में मजबूत आधार माना जा रहा था जबकि संजू सैमसन के स्थान को लेकर सवाल बने हुए थे और कहा जा रहा था कि यह प्रतियोगिता उनके करियर के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर आठ के करो या मरो वाले मुकाबले ने परिस्थितियों में काफी बदलाव कर दिया है। सैमसन ने पिछले दो मैच में शानदार प्रदर्शन किया जिससे अब सभी का ध्यान अभिषेक की फॉर्म पर केंद्रित हो गया है।
इस बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज को पूरे टूर्नामेंट में लय हासिल करने में काफी संघर्ष करना पड़ा है। अपने पिछले छह मैचों में उन्होंने क्रमशः 0, 0, 0, 15, 10 और 9 रन बनाए हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ अर्धशतक को छोड़कर उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है।
मुंबई में पहले लीग मैच के बाद अभिषेक के पेट में संक्रमण हो गया था जिसके लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। इससे उनका वजन कम हो गया और प्रतियोगिता के महत्वपूर्ण चरण के दौरान उनकी लय बिगड़ गई। यही नहीं विरोधी टीमों ने उसे शांत रखने का स्पष्ट तरीका ढूंढ लिया है।
कप्तानों ने बार-बार उनके खिलाफ शुरुआती ओवरों में धीमी गति के गेंदबाजों का इस्तेमाल किया है, विशेषकर ऑफ स्पिनरों और बाएं हाथ के स्पिनरों का। इससे उन्हें पारी की शुरुआत में वह गति नहीं मिल पाती जिसके साथ वे खेलना पसंद करते हैं। इस कारण वह जल्द ही पवेलियन लौटते रहे हैं।
पाकिस्तान के खिलाफ पावरप्ले में उन्होंने ऑफ स्पिनर पर आक्रामक शॉट खेलने के प्रयास में गेंद को हवा में लहरा दिया। नीदरलैंड के खिलाफ ऑफ स्पिनर ने उन्हें कोण लेती गेंद पर आउट किया। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भी धीमी गेंद पर शॉट खेलने की कोशिश में वह फिर से जल्दबाजी कर बैठे और मनचाहा शॉट नहीं लगा पाए।
एक और तकनीकी पहलू उनके बल्ले के डाउनस्विंग की गति है। जब गेंद तेजी ये आती है तो तेज डाउनस्विंग के कारण उन्हें धीमी गेंदों से तालमेल बिठाने में मुश्किल हो सकती है।
भारत के पास रिंकू सिंह को टीम में शामिल करने का विकल्प है लेकिन इससे बल्लेबाजी संयोजन पर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में रिंकू को सातवें या आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करनी पड़ सकती है और तब वह अच्छा प्रभाव छोड़ पाएंगे इसकी संभावना कम है।
वहीं वरुण चक्रवर्ती के खराब प्रदर्शन को देखकर लग रहा है कि उनकी रहस्यमयी गेंदबाजी का रहस्य अब सुलझता नजर आ रहा है।अगर टीम प्रबंधन रविवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 विश्व कप के फाइनल में दुनिया के शीर्ष गेंदबाज को टीम में बनाए रखने का फैसला करता है, तो वह भारत के लिए कमजोर कड़ी साबित हो सकते हैं।
टूर्नामेंट के सुपर आठ चरण के बाद से उनकी फॉर्म में लगातार गिरावट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। चक्रवर्ती को टूर्नामेंट के अंतिम चरण में खराब प्रदर्शन करने के बाद अपने मन में मौजूद शंकाओं को दूर करने की जरूरत होगी।
इंग्लैंड के खिलाफ गुरुवार को खेले गए सेमीफाइनल मैच में जैकब बेथेल ने चक्रवर्ती को अपने निशाने पर रखा था। इस भारतीय गेंदबाज ने चार ओवर में 64 रन देकर एक विकेट लिया।बात सिर्फ सेमीफाइनल मैच की नहीं है। वेस्टइंडीज के खिलाफ भी वह खासे महंगे साबित हुए थे। जबकि उन्होंने शाई होप को बोल्ड किया था। उन्होंने इस वर्चुअल क्वार्टरफाइनल में 4 ओवर में 40 रन दिए थे। जिम्बाब्वे के खिलाफ भी वह 4 ओवर में 1 विकेट पर 35 रन दे बैठे थे। भारतीय टीम जिस एकमात्र मैच में हारी उसकी सबसे कमजोर कड़ी वरुण चक्रवर्ती ही थे। द.अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने 4 ओवर में 1 विकेट लेकर 47 रन दिए।
ऐसे में फैंस का मानना है कि कुलदीप यादव को टीम में शामिल किया जाना चाहिए लेकिन कुलदीप यादव को न्यूजीलैंड टीम ने एकदिवसीय सीरीज में बेहतर ढंग से खेला था। ऐसे में यह देखना होगा कि क्या टीम प्रंबधन यह जोखिम लेता है या नहीं।
लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर आठ के करो या मरो वाले मुकाबले ने परिस्थितियों में काफी बदलाव कर दिया है। सैमसन ने पिछले दो मैच में शानदार प्रदर्शन किया जिससे अब सभी का ध्यान अभिषेक की फॉर्म पर केंद्रित हो गया है।
इस बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज को पूरे टूर्नामेंट में लय हासिल करने में काफी संघर्ष करना पड़ा है। अपने पिछले छह मैचों में उन्होंने क्रमशः 0, 0, 0, 15, 10 और 9 रन बनाए हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ अर्धशतक को छोड़कर उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है।
मुंबई में पहले लीग मैच के बाद अभिषेक के पेट में संक्रमण हो गया था जिसके लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। इससे उनका वजन कम हो गया और प्रतियोगिता के महत्वपूर्ण चरण के दौरान उनकी लय बिगड़ गई। यही नहीं विरोधी टीमों ने उसे शांत रखने का स्पष्ट तरीका ढूंढ लिया है।
पाकिस्तान के खिलाफ पावरप्ले में उन्होंने ऑफ स्पिनर पर आक्रामक शॉट खेलने के प्रयास में गेंद को हवा में लहरा दिया। नीदरलैंड के खिलाफ ऑफ स्पिनर ने उन्हें कोण लेती गेंद पर आउट किया। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भी धीमी गेंद पर शॉट खेलने की कोशिश में वह फिर से जल्दबाजी कर बैठे और मनचाहा शॉट नहीं लगा पाए।
एक और तकनीकी पहलू उनके बल्ले के डाउनस्विंग की गति है। जब गेंद तेजी ये आती है तो तेज डाउनस्विंग के कारण उन्हें धीमी गेंदों से तालमेल बिठाने में मुश्किल हो सकती है।
वहीं वरुण चक्रवर्ती के खराब प्रदर्शन को देखकर लग रहा है कि उनकी रहस्यमयी गेंदबाजी का रहस्य अब सुलझता नजर आ रहा है।अगर टीम प्रबंधन रविवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 विश्व कप के फाइनल में दुनिया के शीर्ष गेंदबाज को टीम में बनाए रखने का फैसला करता है, तो वह भारत के लिए कमजोर कड़ी साबित हो सकते हैं।
टूर्नामेंट के सुपर आठ चरण के बाद से उनकी फॉर्म में लगातार गिरावट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। चक्रवर्ती को टूर्नामेंट के अंतिम चरण में खराब प्रदर्शन करने के बाद अपने मन में मौजूद शंकाओं को दूर करने की जरूरत होगी।
इंग्लैंड के खिलाफ गुरुवार को खेले गए सेमीफाइनल मैच में जैकब बेथेल ने चक्रवर्ती को अपने निशाने पर रखा था। इस भारतीय गेंदबाज ने चार ओवर में 64 रन देकर एक विकेट लिया।बात सिर्फ सेमीफाइनल मैच की नहीं है। वेस्टइंडीज के खिलाफ भी वह खासे महंगे साबित हुए थे। जबकि उन्होंने शाई होप को बोल्ड किया था। उन्होंने इस वर्चुअल क्वार्टरफाइनल में 4 ओवर में 40 रन दिए थे। जिम्बाब्वे के खिलाफ भी वह 4 ओवर में 1 विकेट पर 35 रन दे बैठे थे। भारतीय टीम जिस एकमात्र मैच में हारी उसकी सबसे कमजोर कड़ी वरुण चक्रवर्ती ही थे। द.अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने 4 ओवर में 1 विकेट लेकर 47 रन दिए।

