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बाल गीत : करने दो आबाद हमें घर

Updated: बुधवार, 5 जून 2024 (15:23 IST)
कांधे बस्ता लादे-लादे,
हालत हो गई खस्ता जी।
नहीं छुएंगे बस्ता जी।
 
नाम न लो पुस्तक कॉपी का,
 फेंको रबर पेन्सिल दूर।
संडे की छुट्टी में पढ़ने,
लिखने का हो दूर फितूर।
हमको ख़ा लेने दो छककर,
गरम-समोसे खस्ता जी।
 
होम वर्क जैसे शब्दों को,
भूल जाओ गर्मी भर में।
कूदम-फादम, हल्लम-गुल्लम
की ही बातें हो घर में।           
स्कूलों की कूट-चाल में,
ना फंसने दें  बस्ता जी।
 
खेल कबड्डी, गुल्ली डंडा,
खो-खो-का आयोजन हो। 
हर घंटे रसगुल्ले-चमचम,  
मालपुओं का भोजन हो।
करने दो आबाद हमें घर 
दिन भर मस्ता-मस्ता जी।
 
(यहां पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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