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Last Updated :इस्लामाबाद , रविवार, 12 अप्रैल 2026 (10:12 IST)

ईरान और अमेरिका में क्यों फेल हुई शांति वार्ता, अमेरिका या ईरान कौन जिम्मेदार?

jd vance and mb galibaf
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटों तक चली बातचीत फेल हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान के शर्ते नहीं मानने से वार्ता बेनतीजा रही तो ईरान का कहना था कि अमेरिका बातचीत से हटने का बहाना ढूंढ रहा था। जानिए दोनों देशों के बीच बातचीत क्यों सफल नहीं हो सकी? ALSO READ: 21 घंटे चली US-Iran वार्ता फेल, जेडी वेंस बोले– ईरान ने ठुकराया फाइनल ऑफर, बढ़ सकता है युद्ध

अमेरिका की पाकिस्तान को क्लीनचिट

अमेरिकी उपराष्‍ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत में जो भी कमियां थीं, वे पाकिस्तान की वजह से नहीं थीं, उन्होंने बहुत अच्छा काम किया और सच में हमारी और ईरानियों की मदद करने की कोशिश की ताकि वे इस गैप को कम कर सकें और एक डील कर सकें। वार्ता बेनतीजा समाप्त होने के बाद भी पाकिस्तान ने सीजफायर को बढ़ाने की मांग की है। उसका कहना है कि हम बातचीत को आगे बढ़ाने का प्रयास करते रहेंगे। 

क्या बोला ईरान?

ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि एक बैठक में नतीजे पर नहीं पहुंच सकते। 2-3 मुद्दों पर मतभेद था। हम अमेरिका की अवैध शर्तें नहीं मानेंगे। अमेरिका वार्ता से हटने का बहाना ढूंढ रहा था। अब हमारी अमेरिका से बातचीत की कोई योजना नहीं है।

दोनों देशों में इन 5 मुद्दों पर हुई बात

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई के अनुसार,  दोनों पक्षों के बीच 5 अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें होर्मुज स्ट्रेट, परमाणु कार्यक्रम, युद्ध की भरपाई, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाना और ईरान के खिलाफ तथा पूरे क्षेत्र में चल रहे युद्ध को पूरी तरह खत्म करने जैसे विषय शामिल रहे।

होर्मुज स्ट्रेट सबसे बड़ा अड़ंगा

अमेरिका-ईरान की बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट सबसे बड़ा अड़ंगा बना रहा। इस मुद्दे पर अमेरिका का असली रुख क्या है, यह अभी भी साफ नहीं है। इस बीच राष्‍ट्रपति ट्रंप के साथ ही अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने भी दावा कर दिया कि स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से माइनिंग हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। ईरान हार्मुज पर अपने कंट्रोल को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानता है और वह बिना पूरा फायदा लिए इसे छोड़ने के मूड में नहीं है।

ट्रंप के विवादित बयान

सीजफायर के बाद भी अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप लगातार ईरान को धमका रहे थे। बातचीत के दौरान भी उन्होंने कहा था कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि ईरान के साथ कोई समझौता होता है या नहीं। हमने उन्हें मिलिट्री तौर पर हरा दिया है... हम स्ट्रेट को क्लियर कर रहे हैं और इसका कारण यह है कि हम जीत गए हैं।
 
बहरहाल शांति वार्ता विफल रहने के लिए अमेरिका और ईरान दोनों ही जिम्मेदार है। अमेरिका का जोर शांति से ज्यादा जीत पर है तो ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है। 
edited by : Nrapendra Gupta 
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