30% ज्यादा तपेगी धरती! कुदरत का 'फीडबैक लूप' मचाने वाला है तबाही, वैज्ञानिकों ने जारी किया अलर्ट
ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन को लेकर वैज्ञानिकों ने एक बेहद चौंकाने वाली और डरावनी चेतावनी जारी की है। एनवायरनमेंटल रिसर्च लेटर्स (Environmental Research Letters) में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, प्राकृतिक फीडबैक लूप्स (Feedback Loops) के कारण ग्लोबल वार्मिंग में 30 प्रतिशत तक की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।
अब तक हम सिर्फ इंसानी गतिविधियों और जीवाश्म ईंधनों (Fossil Fuels) के धुएं को ही जिम्मेदार मान रहे थे, लेकिन अब प्रकृति खुद इस तबाही की रफ्तार को बढ़ाने लगी है।
इन प्राकृतिक परिवर्तनों की वजह से मिट्टी, पेड़-पौधों और झीलों में दबा मीथेन (Methane) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) जैसी जहरीली गैसें भारी मात्रा में वायुमंडल में रिहा हो रही हैं। यानी इंसानी प्रदूषण से शुरू हुई गर्मी अब कुदरती गैसों को बाहर निकाल रही है, जो धरती को और ज्यादा गर्म कर रही हैं। इसी चक्र को 'फीडबैक लूप' कहा जाता है।
जलवायु मॉडलों में बड़ी चूक : 0.4°C तक और बढ़ सकता है तापमान
वैज्ञानिकों का कहना है कि वे लंबे समय से इन प्रक्रियाओं के बारे में जानते थे, लेकिन वर्तमान जलवायु मॉडलों और अंतरराष्ट्रीय नीतियों में इन्हें शामिल नहीं किया गया था।
शोध के अनुसार, ये प्राकृतिक स्रोत इस सदी के अंत तक वैश्विक हीटिंग में 20% से 30% तक का इजाफा कर सकते हैं। इससे औसतन तापमान में 0.2°C से 0.4°C तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी।
सुनने में 0.2°C या 0.4°C बहुत छोटा आंकड़ा लग सकता है, लेकिन जलवायु विज्ञान में तापमान में मामूली वृद्धि भी भीषण लू (Heatwaves), विनाशकारी बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है।
'पॉइंट ऑफ नो रिटर्न' की ओर बढ़ती पृथ्वी
- संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी इस बात की आशंका जताई है कि वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने का अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य जल्द ही टूट सकता है।
- यदि यह प्राकृतिक चक्र इसी तरह जारी रहा, तो पृथ्वी जल्द ही एक ऐसे टिपिंग पॉइंट (Tipping Point) या पॉइंट ऑफ नो रिटर्न पर पहुँच जाएगी, जहाँ से जलवायु प्रणाली पूरी तरह इंसानी नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।
- क्लाइमेट एक्शन ट्रैकर का अनुमान : वर्तमान सरकारी नीतियों के हिसाब से दुनिया का तापमान 2.6°C तक बढ़ सकता है, जिससे पृथ्वी पर मौजूद अरबों लोगों का जीवन प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होगा।
क्या अभी भी बचा जा सकता है?
वैज्ञानिकों का स्पष्ट मानना है कि इस अनियंत्रित वैश्विक हीटिंग को रोकने का एक ही रास्ता है—जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल, डीजल, कोयला) के उत्सर्जन में तुरंत और भारी कटौती।
यदि इंसानी उत्सर्जन को तेजी से घटाया जाए, तो प्राकृतिक स्रोतों से होने वाली इस अतिरिक्त वार्मिंग की रफ्तार को धीमा किया जा सकता है। इसके अलावा, दुनिया भर के देशों को अपने जलवायु मॉडलों में इन प्राकृतिक उत्सर्जनों को शामिल कर नई रणनीतियाँ बनानी होंगी।

