सम्बंधित जानकारी
- उत्तर भारत में मानसून का इंतजार बढ़ा, स्थितियां अनुकूल नहीं
- Weather Update : धीमी पड़ी मानसून की रफ्तार, उत्तर भारत के कई राज्यों को करना होगा इंतजार
- Monsoon Tracker : उत्तर भारत के कई हिस्सों में करना पड़ सकता है झमाझम बारिश का इंतजार
- Medieval Indian History: मध्यकाल का समय क्या निर्धारित होता है?
- राजा हरिहर प्रथम जो थे 'दो समुद्रों के अधिपति'
Harshavardhana and Pulakesin | सम्राट हर्षवर्धन का दक्षिण भारत के सम्राट पुलकेशिन द्वितीय से जब हुआ युद्ध
गुप्त वंश के पतन के बाद मध्यकाल की शुरुआत होती है। उत्तर भारत में राजा हर्षवर्धन (590-647) सबसे शक्तिशाली राजा थे तो दक्षिण भारत में चालुक्य वंश के सबसे बड़े राजा पुलकेशी द्वितीय थे। बाकी छोटे-छोटे स्वतंत्र लेकिन शक्तिशाली राज्य भी थे। जैसे आज का राजस्थान पहले गुर्जर स्थान था। कश्मीर और पंजाब में कश्मीरी राजाओं का राज था और उड़िसा भी एक स्वतंत्र राज्य था तो दूसरी ओर दक्षिण भारत के नीचले हिस्सा में चौल, पाल्लव और पाड्य राजाओं का राज था। परंतु हर्षवर्धन के काल में सबसे शक्तिशाली वर्धन और चालुक्य साम्राज्य ही थे।
हर्षवर्धन का शासन गुजरात, मध्यभरत, उत्तराखंड, हिमाचल, उत्तरप्रदेश, बिहार, बंगाल सहित पूर्वोत्तर के कुछ भागों पर राज था। दूसरी ओर पुलकेशी द्वितीय का गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र तक साम्राज्य था। उसके साम्राज्य में केरल और तमिलनाडु के भी कुछ हिस्से शामिल थे।
दक्षिण भारत को उत्तर भारत से अलग करने वाली एक नदी नर्मदा और दूसरी विध्यांचल की पहाड़ियां थीं। मालवा व गुजरात में जहां यह नदी बहती है वहीं इसी के समानांतर और महाराष्ट्र में विस्तारित विध्यांचल की पर्वतमालाएं हैं। यहीं पर सम्राट हर्षवर्धन और पुलकेशिन द्वितीय की साम्राज्य विस्तार की योजनाएं टकराती थीं।
अंतत: बहुत ही कशमकश के बाद दोनों शक्तिशाली सम्राटों में युद्ध तय हो गया। युद्ध का एक कारण सम्राट हर्ष के वलभी पर आक्रमण भी था। यह युद्ध नर्मदा के समीप 612 ईस्वी के लगभग लड़ा गया। हालांकि इस युद्ध में हर्ष को पराजय का सामना करना पड़ा था।
पुलकेशी द्वितीय, पुलकेशी प्रथम का पौत्र तथा चालुक्य वंश का चौथा राजा था, जिसने 609-642 ई. तक राज्य किया। यह दक्षिण भारत का पहला शासक था जिसने स्वर्ण सिक्कें जारी किए थे। दूसरी ओर ह्वेनसांग के कथनानुसार हर्ष ने अपना विजय अभियान 6 वर्ष (606-612 ई.) में समाप्त कर 30 वर्ष तक शांतिपूर्वक शासन किया। उसके शासन में कला, संस्कृति और धर्म का भरपूर विकास हुआ।
ALSO READ: महान राजा दाहिर की 10 खास बातें
दूसरे चालुक्य सम्राट् पुलकेशिन (पुलकेशी) द्वितीय के हैदराबाद दानपत्र (शक संवत् 535-613 ई.) में कहा गया है कि चालुक्य राजा ने अन्य राजाओं को परास्त कर परमेश्वर की उपाधि ग्रहण की।अनेक युद्धों में कई राजाओं को हराकर यह उपाधि धारण की। दानपत्र की तिथि 613 ई. है अत: हर्ष को 612 ई. में पराजित किया होगा।
