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अनंगपाल तोमर और तोमरों का शासन

शुक्रवार,जुलाई 23, 2021
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मध्यकालिन भारत की शुरुआत सम्राट हर्षवर्धन (590-647) से होती है। हर्षवर्धन का दक्षिण भारत के सम्राट पुलकेशी द्वितीय (शासनकाल 609-642) से हुआ था। इसी काल में कश्मीर में बहुत ही शक्तिशाली सम्राट ललितादित्‍य (सन् 697 से सन् 738) का राज्य भी रहा था। इसी ...
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मध्यकालीन भारत की सीरिज में हमने जाना की पश्चिम में राजा दाहिर तो उत्तर भारत में जहां सम्राट हर्षवर्धन का साम्राज्य था वहीं दक्षिण भारत में चालुक्य वंश के पुलकेशिन द्वितीय का दबदबा था। परंतु पल्लवशंव के राजाओं से चालुक्यवंशी राजाओं की टक्कर होती ...
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मध्यकालीन भारत की सीरिज में हमने जाना की उत्तर भारत में जहां सम्राट हर्षवर्धन का साम्राज्य था वहीं दक्षिण भारत में चालुक्य वंश के पुलकेशिन द्वितीय का दबदबा था। परंतु पल्लवशंव के राजाओं से चालुक्यवंशी राजाओं की टक्कर होती रहती थी। आओ जानते हैं ...
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कश्मीर में लोहरवंशी की एक रानी थी जिसे लोग लंगड़ी और चुडैंल रानी कहते थे, परंतु वह बहुत ही बहादुर और सुंदर थी। उसके चर्चे संपूर्ण भारत में थे। प्राचीन संस्कृत कवि कल्हण ने कश्मीर के इतिहास की सबसे शक्तिशाली महिला शासक दिद्दा का उल्लेख किया है। आखिर ...
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Mahmud Ghaznavi, Muhammad bin Qasim, Raja Dahir, History of India, Medieval History of India, Medieval Period, Islamic Invasion of India, महमूद गज़नवी, मुहम्मद बिन कासिम, राजा दाहिर, भारत का इतिहास, भारत का मध्यकालीन इतिहास, मध्यकाल, भाररत पर ...
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गुप्त वंश के पतन के बाद मध्यकाल की शुरुआत होती है। उत्तर भारत में राजा हर्षवर्धन (590-647) सबसे शक्तिशाली राजा थे तो दक्षिण भारत में चालुक्य वंश के सबसे बड़े राजा पुलकेशी द्वितीय थे। बाकी छोटे-छोटे स्वतंत्र लेकिन शक्तिशाली राज्य भी थे। जैसे आज का ...
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भारतीय राजनीतिक इतिहास को मुख्यत: 4 भागों में बांट सकते हैं- प्राचीन, मध्य, आधुनिक और वर्तमान। प्राचीन काल में हम वैदिक काल, रामायण काल, महाभारत का काल, सिंधुघाटी का काल, मौर्य साम्राज्य, विक्रमादित्य साम्राज्य, गुप्त वंश को लेते हैं। गुप्त वंश के ...
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महाराणा प्रताप उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे। उनके कुल देवता एकलिंग महादेव हैं। मेवाड़ के राणाओं के आराध्यदेव एकलिंग महादेव का मेवाड़ के इतिहास में बहुत महत्व है।
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शक, कुषाण और हूणों के पतन के बाद भारत का पश्‍चिमी छोर कमजोर पड़ गया, तब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ हिस्से फारस साम्राज्य के अधीन थे तो बाकी भारतीय राजाओं के, जबकि बलूचिस्तान एक स्वतंत्र सत्ता थी। 7वीं सदी की शुरुआत के दौरान भारत के अफगानिस्तान ...
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उत्तर प्रदेश के बहराइच में महाराजा सुहेलदेव का भव्य स्मारक बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार, 16 फरवरी 2021 को राजा सुहेलदेव की जयंती के मौके पर उनके भव्य स्मारक का बहराइच में वर्चुअल शिलान्यास किया था। वहां एक संग्रहालय भी बनेगा, ...
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विजयनगर साम्राज्य (लगभग 1350 ई. से 1565 ई.)। 'विजयनगर' का अर्थ होता है 'जीत का शहर'। मध्ययुग के इस शक्तिशाली हिन्दू साम्राज्य की स्थापना के बाद से ही इस पर लगातार आक्रमण हुए लेकिन इस साम्राज्य के राजाओं से इसका कड़ा जवाब दिया। यह साम्राज्य कभी ...
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वर्तमान में इसराइल के 4 प्रमुख क्षेत्र हैं- तेल अवीव, यरुशलम, हैफा और बीयर शेव। परंतु प्राचीन समय में इसमें फिलिस्तीन के क्षेत्र गाजापट्टी और रामल्लाह भी शामिल थे। आओ जानते हैं कि कैसे इजराइल बना यहुदियों का अधिकृत क्षेत्र।
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बाजीराव घुड़सवारी करते हुए लड़ने में सबसे माहिर थे और यह माना जाता है कि उनसे अच्छा घुड़सवार सैनिक भारत में आज तक देखा नहीं गया। उनके 4 घोड़े थे- नीला, गंगा, सारंगा और औलख। उनकी देखभाल वे स्वयं करते थे। बाजीराव 6 फुट ऊंचे थे, उनके हाथ भी लंबे थे। ...
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राजा कृष्ण देवराय के पूर्वजों ने एक महान साम्राज्य की नींव रखी जिसे विजयनगर साम्राज्य (लगभग 1350 ई. से 1565 ई.) कहा गया। देवराय ने इसे विस्तार दिया और मृत्यु पर्यंत तक अक्षुण बनाए रखा। विजयनगर साम्राज्य की स्थापना इतिहास की एक कालजयी घटना है। ...
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सम्राट चन्द्रगुप्त महान थे। उन्हें चन्द्रगुप्त महान कहा जाता है। सिकंदर के काल में हुए चन्द्रगुप्त ने सिकंदर के सेनापति सेल्युकस को दो बार बंधक बनाकर छोड़ दिया था। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु चाणक्य थे। चन्द्रगुप्त ने अपने पुत्र बिंदुसार को ...
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भारत में ऐसी बहुत सारी परंपराएं और ज्ञान प्रचलन में था, जो अब लुप्त हो गया है या जो अब प्रचलन से बाहर है। लोक नृत्य-गान, लोकभाषा, लोक संगीत, लोक पोशाक, लोक व्यंजन सहित लोक चित्रकला भी भारतीय परंपरा की पहचान है। प्राचीन भारत में 64 कलाएं प्रचलित थीं ...
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झांसी की रानी लक्ष्मीबाई 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना थीं। उन्होंने कभी भी विदेशी आक्रांताओं और शासकों की दासता स्वीकार नहीं की और अपनी मातृभूमि की रक्षार्थ बलिदान दे दिया।
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प्राचीन काल में ऐसी कई भाषाएं या उनकी लिपियां लुप्त होकर अब रहस्य का विषय बनी हुई है। भारत की इन लिपियों का रहस्य खुल जाए तो भारत के प्राचीन इतिहास का भी एक नया ही आयाम खुल सकता है। भारत में कई जगह ऐसी लिपियों में कुछ लिखा हुआ है जिन्हें अभी तक पढ़ा ...
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आजकल इतिहास को पुरावशेषों से सर्टिफाइड किया जाता है। रामायण में क्या लिखा है, महाभारत में क्या लिखा है या वेदों में क्या लिखा है इसका कोई महत्व नहीं, परंतु यदि खुदाई में मिट्टी के बर्तन पाए गए हैं, रथ निकले हैं, आभूषण निकले हैं तो उससे तय होगा कि इस ...
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