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उज्जैन के विश्‍व प्रसिद्ध राजा विक्रमादित्य

सोमवार,अगस्त 5, 2019
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तीन अप्रैल, 1914 को अमृतसर के एक पारसी परिवार में जन्मे सैम मानेकशॉ'- पूरा नाम सैम होर्मूसजी फ्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ- एकमात्र ऐसे सेनाधिकारी थे, जिन्हें सेवानिवृत्ति से पहले ही पांच सितारा रैंक तक पदोन्नति दी गई थी।
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भारतीय इतिहास में राजपुताने का गौरवपूर्ण स्थान रहा है। यहां के रणबांकुरों ने देश, जाति, धर्म तथा स्वाधीनता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने में कभी संकोच नहीं किया। उनके इस त्याग पर संपूर्ण भारत को गर्व रहा है। वीरों की इस भूमि में ...
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इतिहास में बादशाह औरंगजेब के बारे में कई बातों का उल्लेख मिलता है। उसमें अच्छी और बुरी सभी तरह की बातों का उल्लेख है। मुगल बादशाहों में औरंगजेब सबसे ज्यादा विवादित बादशह था। उसकी एक कहानी यहां प्रस्तुति है जिसके बारे में इतिहासकारों में मतभेद हैं।
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सम्राट चन्द्रगुप्त महान थे। उन्हें चन्द्रगुप्त महान कहा जाता है। सिकंदर के काल में हुए चन्द्रगुप्त ने सिकंदर के सेनापति सेल्युकस को दो बार बंधक बनाकर छोड़ दिया था। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु चाणक्य थे। चन्द्रगुप्त ने अपने पुत्र बिंदुसार को ...
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दुर्गावती नाम था उसका। साक्षात दुर्गा थी वह। बुंदेलखंड के प्रसिद्ध चंदेल राजपूतों में उसका जन्म हुआ था। वंश इतना उच्च माना जाता था कि चित्तौड़ के महाराणा संग्रामसिंह (राणा सांगा) की बहन भी इस वंश में ब्याही थी। दुर्गावती का विवाह हुआ था, गोंड ...
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धर्म-अधर्म की जंग, प्राकृतिक आपदा और वैराग्य भाव के चलते दुनिया के कई ऐसे समाज, कौम या धार्मिक समूह रहे हैं जिनको कई कारणों से अपने देश या स्थान को छोड़कर किसी अन्य देश या स्थान पर जाना पड़ा। इस तरह के पलायन के चलते एक ओर जहां मानवता दर-ब-दर हुई, तो ...
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सिर पर पहानावे का प्रचलन तो भारत में ही हुआ, लेकिन ग्रीक, रोमन, फारस, हूण, कुषाण, मंगोल, मुगल आदि के काल में भारतीय परिधानों के साथ ही सिर के पहनावे में भी बदलावा आते गए लेकिन आज भी कुछ पहनावे तो वैसे के वैसे ही हैं। हालांकि परिवर्तन के चलते कई नए ...
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हमें वेद-पुराणों में उल्लेखित ययाति के कुल-खानदान को याद रखना चाहिए, क्योंकि इसी से एशिया की जातियों का जन्म हुआ। ययाति से ही आगे चंद्रवंश चला जिसमें से यदुओं, तुर्वसुओं, आनवों और द्रुहुओं का वंश चला।
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हल्दीघाटी युद्ध के बाद भी अकबर ने महाराणा को पकड़ने या मारने के लिए 1577 से 1582 के बीच करीब एक लाख सैन्यबल भेजे। अंगेजी इतिहासकारों ने लिखा है कि हल्दीघाटी युद्ध का दूसरा भाग जिसको उन्होंने 'बैटल ऑफ दिवेर' कहा है, मुगल बादशाह के लिए एक करारी हार ...
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विभाजन के समय ही कश्मीर पर पाकिस्तानी सेना ने कबाइलियों के साथ मिलकर आक्रमण कर दिया और जम्मू एवं कश्मीर के बहुत बड़े भू भाग पर कब्जा कर लिया। इस आक्रमण का भारतीय सेना मुंहतोड़ जवाब देते हुए कब्जा मुक्ति का अभियान चला रही थी लेकिन बीच में ही ...
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मुगलवंश का संस्थापक बाबर एक लूटेरा था। उसने उत्तर भारत में कई लूट को अंजाम दिया। मध्य एशिया के समरकंद राज्य की एक बहुत छोटी सी जागीर फरगना (वर्तमान खोकन्द) में 1483 ई. में बाबर का जन्म हुआ था। उसका पिता उमर शेख मिर्जा, तैमूरशाह तथा माता कुनलुक निगार ...
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क्या सिकंदर (अलक्षेन्द्र) एक महान विजेता था? ग्रीस के प्रभाव से लिखी गई पश्चिम के इतिहास की किताबों में यही बताया जाता है और पश्चिम जो कहता है दुनिया उसे आंख मूंदकर मान लेती है। मगर ईरानी, भारतीय और चीनी इतिहास के नजरिए से देखा जाए तो यह छवि कुछ अलग ...
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भारत में वैसे तो सैंकड़ों ऐसे राजा, महाराज या सम्राट हुए हैं जिनका भारतीय इतिहास में जिक्र नहीं किया जाता है। उनका जिक्र नहीं किए जाने के कई कारण हो सकते हैं। उन सैंकड़ों राजाओं में से यहां प्रस्तुत है ऐसे 10 राजाओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी ...
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आचार्य चाणक्य की मौत एक रहस्य है। इतिहासकारों में इसको लेकर मतभेद है। हालांकि कुछ शोधकर्ता उनकी मृत्यु को लेकर तीन तरह की थ्योरी प्रस्तुत करते हैं। आओ जानते हैं कि आखिर आचार्य चाणक्य की मौत कैसे हुई थी।
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भारत के वीर सपूतों में से एक श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में सभी लोग जानते हैं। बहुत से लोग इन्हें हिन्दू हृदय सम्राट कहते हैं तो कुछ लोग इन्हें मराठा गौरव कहते हैं, जबकि वे भारतीय गणराज्य के महानायक थे। छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म सन्‌ ...
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पेशवा बाजीराव का जन्म 18 अगस्त सन् 1700 को एक भट्ट परिवार में पिता बालाजी विश्वनाथ और माता राधाबाई के घर में हुआ था।
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लगभग 632 ई. में हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफात (मृत्यु) के बाद 6 वर्षों के अंदर ही उनके उत्तराधिकारियों ने सीरिया, मिस्र, उत्तरी अफ्रीका, स्पेन एवं ईरान को जीत लिया। इस समय खलीफा साम्राज्य फ्रांस के लायर नामक स्थान से लेकर आक्सस एवं ...
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राजा कृष्ण देवराय के पूर्वजों ने एक महान साम्राज्य की नींव रखी जिसे विजयनगर साम्राज्य (लगभग 1350 ई. से 1565 ई.) कहा गया। देवराय ने इसे विस्तार दिया और मृत्यु पर्यंत तक अक्षुण बनाए रखा। विजयनगर साम्राज्य की स्थापना इतिहास की एक कालजयी घटना है। ...
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19वीं शताब्दी के इतिहास में बिस्मार्क का नाम उल्लेखनीय रहेगा। बिस्मार्क का वास्तविक नाम ऑटोवान बिस्मार्क रकानहौसिन था।
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