भारत पर मुस्लिमों का सबसे पहला आक्रमण कब हुआ?

Last Updated: सोमवार, 14 जून 2021 (17:52 IST)
शक, कुषाण और हूणों के पतन के बाद भारत का पश्‍चिमी छोर कमजोर पड़ गया, तब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ हिस्से फारस साम्राज्य के अधीन थे तो बाकी भारतीय राजाओं के, जबकि बलूचिस्तान एक स्वतंत्र सत्ता थी। 7वीं सदी की शुरुआत के दौरान भारत के अफगानिस्तान और पाकिस्तान पर आक्रमण बढ़ गए और यह भारत का हिस्सा नहीं रहा। इतिहासकारों अनुसार के प्रवेश के पहले अफगानिस्तान (कम्बोज और गांधार) में बौद्ध एवं हिन्दू धर्म यहां के राजधर्म थे।
1. कुछ इतिहासकारों के अनुसार भारत पर पहला आक्रमण 638 ईस्वी में खलीफाओं की सेना ने किया। उमायद खलीफा ने बलूचिस्‍तान पर आक्रमण किया था। सन् 652 में मुस्लिम खलीफा उमर ने बलूचिस्तान के कामरान पर आक्रमण के आदेश दिए और बाद में यह खिलाफत का हिस्सा बन गया। बाद में उम्मयदों ने इसपर कब्जा कर लिया।
2. भारत पर पहला सफल आक्रमण 20 जून 712 ईस्वी में ने सिंध प्रांत पर किया। इससे पहले 711 ईस्वी में उसने पश्चिमोत्तर भारत पर आक्रमण किया था। उसने बलूचिस्तान और मुल्तान में भी सफल अभियान चलाए।


3. कुछ इतिहासकारों के अनुसार 638 से 711 ई. तक के 74 वर्षों के काल में 9 खलीफाओं ने 15 बार आक्रमण किया। 15वें आक्रमण का नेतृत्व मोहम्मद बिन कासिम ने किया।
4. मोहम्मद बिन कासिम ने जब सिंध पर आक्रमण किया था तो उस समय सिन्ध के राजा दाहिर से उसका मुकाबला हुआ था।

5. बगदाद के गवर्नर हुज्जाज बिन यूसुफ के आदेश पर उनके भतीजे और 17 वर्षीय जवान सिपहसालार मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर हमला करके राजा दाहिर को शिकस्त दी और यहां अपनी हुकूमत कायम की थी।
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7वीं सदी के बाद भारत पर अरब और तुर्क के मुसलमानों ने आक्रमण करना शुरू किए। अरब के खलीफाओं ने भारत पर कई अभियान चलाए। पहले भारत में अफगानिस्तान भी शामिल था। कुछ इतिहासकारों के अनुसार 870 ई. में अरब सेनापति याकूब एलेस ने अफगानिस्तान को अपने अधिकार में कर लिया था। इससे पहले मोहम्मद बिन कासिम ने भारत के सिंध और मुल्तान पर आक्रमण करके यहां पर खलिफाओं के शासन का रास्ता साफ किया।

इस्लामिक खलीफाओं ने सिन्ध फतह के लिए कई अभियान चलाए। 10 हजार सैनिकों का एक दल ऊंट-घोड़ों के साथ सिन्ध पर आक्रमण करने के लिए भेजा गया। सिन्ध पर ईस्वी सन् 638 से 711 ई. तक के 74 वर्षों के काल में 9 खलीफाओं ने 15 बार आक्रमण किया। 15वें आक्रमण का नेतृत्व मोहम्मद बिन कासिम ने किया।

भारत में इस्लामिक शासन का विस्तार 7वीं शताब्दी के अंत में मोहम्मद बिन कासिम के सिन्ध पर आक्रमण और बाद के मुस्लिम शासकों द्वारा हुआ। लगभग 712 में इराकी अरब शासक अल हज्जाज के भतीजे एवं दामाद मुहम्मद बिन कासिम ने 17 वर्ष की अवस्था में सिन्ध और बलूच पर के अभियान का सफल नेतृत्व किया।
इतिहासकारों के मुताबिक राजा दाहिर की हुकूमत पश्चिम में मकरान तक, दक्षिण में अरब सागर और गुजरात तक, पूर्व में मौजूदा मालवा के केंद्र और राजपूताने तक और उत्तर में मुल्तान से गुजरकर दक्षिणी पंजाब तक फैली हुई थी। बगदाद के गवर्नर हुज्जाज बिन यूसुफ के आदेश पर उनके भतीजे और नौजवान सिपहसालार मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर हमला करके राजा दाहिर को शिकस्त दी और यहां अपनी हुकूमत कायम की।
राजा दाहिर का जन्म 663 में हुआ था और सन्न 679 में वे सिंध के राजा बने। कुछ इतिहासकारों के अनुसार उनका शासनकाल: 695-712 ई.पू. के बीच रहा।

सर्वप्रथम अरब व्‍यापारियों के माध्‍यम से इस्‍लाम धर्म 7वीं शताब्‍दी में दक्षिण भारत में आया। केरल और बंगाल दो उनके प्रमुख केंद्र थे, जबकि पश्चिम भारत में अफगानिस्तान। इसके बाद 7वीं में ही मोहम्मद बिन कासिम जो आक्रमण किया उसे इतिहास में मुस्लिमों द्वारा भारत पर किया गया पहला आक्रमण माना जाता है जबकि कहना यह चाहिए कि यह पहला सफल आक्रमण था जिसके पहले खलिफाओं के नेतृत्व में भारत पर 14 बार आक्रमण हो चुके थे।
कहते हैं कि लगभग 632 ई. में हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफात (मृत्यु) के बाद 'खिलाफत' संस्था का गठन हुआ। हज. मुहम्मद स.अ.व के दोस्त अबू बकर को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया गया। पहले 4 खलीफाओं ने हज. मुहम्मद साहब से अपने रिश्तों के कारण खिलाफत हासिल की। उनमें से उमय्यदों और अब्बासियों के काल में इस्लाम का विस्तार हुआ।



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