खामेनेई की हत्या पर 'चुप्पी' को लेकर बरसे सोनिया-राहुल, क्या PM मोदी हत्या का समर्थन करते हैं?', संसद में चर्चा की मांग
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत में सियासी पारा गरमा गया है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार की चुप्पी को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे भारत की साख और विदेश नीति के लिए चिंताजनक बताया है।
विपक्ष ने संकेत दे दिए हैं कि 9 मार्च से संसद में इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा होगा। सोनिया गांधी ने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार ने ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन पर भी कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। कांग्रेस का आरोप है कि भारत अपनी पारंपरिक 'स्वतंत्र विदेश नीति' से भटक रहा है। ईरान में उपजे इस तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदल रहे समीकरणों के बीच, अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार संसद के आगामी सत्र में इस पर क्या जवाब देती है।
सोनिया गांधी ने एक अंग्रेजी दैनिक अखबार में लिखे अपने लेख में सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी पद पर आसीन राष्ट्राध्यक्ष की हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक 'भयावह विघटन' का संकेत है।
सोनिया गांधी ने लिखा कि जारी कूटनीतिक वार्ता के बीच इस तरह की घटना स्तब्ध करने वाली है, लेकिन उससे भी ज्यादा हैरान करने वाली नई दिल्ली की चुप्पी है। सरकार का यह रुख भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह पैदा करता है। उन्होंने मांग की कि आगामी 9 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र के दूसरे चरण में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के इस बिखराव पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
क्या पीएम मोदी हत्या का समर्थन करते हैं?
दूसरी तरफ राहुल गांधी ने सरकार से इस मामले में अपना नैतिक रुख स्पष्ट करने की अपील की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भारत सरकार किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या जैसे कदम का समर्थन करती है?
राहुल गांधी ने दावा किया कि वैश्विक मंच पर इस तरह की चुप्पी से भारत की साख गिर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ईरान युद्ध और खामेनेई की हत्या पर भारत का स्टैंड क्या है? नैतिक रूप से चुप रहना इस समय विकल्प नहीं हो सकता। Edited by : Sudhir Sharma