ganesh chaturthi

मैं गीत बन अधरों पर आऊंगा

Updated: शनिवार, 25 जुलाई 2026 (17:04 IST)
ये चांद तारे नील गगन में
कुछ गीत प्यारे गुनगुनाते है
ये गीत कुछ और नही बस
तेरी मेरी कहानी सुनाते है
 
उस कहानी को सुनते-सुनते
फिर ये भावुक मन फिर रोया है
अधर तो कुछ सुना न सके
पर नयनों ने सब कुछ बोला है
 
इन नयनों की भाषा को पढ़ तुम
मेरे आंगन में आ जाओ
सूनी पड़ी दिल की बगिया में
रातरानी बनकर बिखर जाओ
 
तुम्हारे संग जो पल है गुजारे
मैं उसे भुला ना पाऊंगा
तुम छन्दों में बस जाओ
मैं गीत बन अधरों पर आऊंगा। 

लेखक के बारे में
राकेशधर द्विवेदी

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नॉर्वे के राजा हाराल्ड पंचम का निधन, 1991 में बने थे राजा

सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

अगला लेख