बस इतनी ही है कहानी
फर्नांदो पेसोआ की कविता और चित्रकृति
Ravindra Vyas
WDहम अपने आसपास ही नजर दौड़ाएँ तो कितने चेहरे, कितने लोग और उनका बीतता जीवन देख सकते हैं, महसूस कर सकते हैं। पुर्तगाल के महान कवि फर्नांदो पेसोआ ने एक इतनी साद कविता लिखी है, इतने सादा व्यक्ति पर कि वह उसके जीवन के दर्द बहुत धीमे से चुपचाप बयाँ कर जाती है। और लगता है यह कहानी सालोमन की नहीं हमारी अपनी ही कहानी है।
तो पढ़िए पेसोआ की यह कहानी एक कविता के रूप में।
बस इतनी ही है सालोमन वेस्ट की कहानी
दिखता था हमेशा हड़बड़ी में पर जल्दी कभी न थी उसे
वह झींकता, मशक्कत करता जानवरों की तरह
लेकिन अन्त में किया कुछ नहीं उसने
बस इतनी ही है सालोमन वेस्ट की कहानी
उसने इच्छा करने और उन्हें पाने की मेहनत में जीवन बिताया
और कुछ बना ही नहीं उसके जीवन का
दर्द और पसीने के बावजूद वह किया करता था मशक्कत
लेकिन किसी काम नहीं आया वह सारा
बस इतनी ही है सालोमन वेस्ट की कहानी
बाक़ी की चीज़ें शुरू होती थीं ख़त्म नहीं
और बहुत सारा जो किया जाना था नहीं किया गया
तमाम ग़लत चीज़ों को सुधारा नहीं गया
बस इतनी ही है सालोमन वेस्ट की कहानी
हर दिन की नई योजनाओं से मिलता था धोखा
तो भी हर दिन था बाक़ी दिनों सा
इन्हीं के बीच वह जिया और मरा
वह ख़ुद को चिढ़ाता ख़ुद ही चिन्ता करता था
वह भागा, फ़िक्रमन्द रहा और रोया
लेकिन कुछ और नहीं कहा जा सकता उसके जीवन को लेकर
सिवाय इन दो साफ़ तथ्यों के -
वह जिया और मरा।
बस इतनी ही है सालोमन वेस्ट की कहानी
क्या हमारी जीवन भी इन दो तथ्यों से ही मिलकर नहीं बनता कि हम जीते हैं और मरते हैं। लेकिन कोई कवि ही है जो इस जीने और मरने के बीच जीवन के मर्म को उसके दर्द को उसकी असल कहानी को देख लेता है, समझ लेता है और महसूस कर लेता है।

