देवनागरी लिपि के तकनीकी खतरे
हिन्दी दिवस (14 सितंबर) पर विशेष
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हर हाथ में मोबाइल फोन और हर घर तक इंटरनेट की पहुँच बनाने की कंपनियों की कोशिश के बीच हिन्दी भाषा के समक्ष नई प्रौद्योगिकी ने उसकी लिपि देवनागरी के लोप का खतरा पैदा कर दिया है। यह मानना है विशेषज्ञों का जो इस बात से चिंतित हैं कि मोबाइल फोन से एसएमएस करने और इंटरनेट से चिट्ठी लिखने में अँगरेजी भाषा की रोमन लिपि का इस्तेमाल हिन्दी लिखने में किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिनों दिन बढ़ते मोबाइल फोन और इंटरनेट के इस्तेमाल में सामग्री लिखने के लिए आमतौर पर लोग अँगरेजी के की-बोर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं और ज्यादातर रोमन लिपि में हिन्दी लिख रहे हैं जिसमें शब्दों का उच्चारण तो हिन्दी का होता है लेकिन वह लिखी रोमन की वर्णमाला में जाती है।
इन विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह का प्रयोग स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ज्यादा कर रहे हैं जो भविष्य के नागरिक हैं। उनमें यदि शुरू से ही हिन्दी में इनपुट देने की प्रवृत्ति नहीं होगी तो आने वाले समय में देवनागरी लिपि के लुप्त होने का खतरा पैदा हो जाएगा।
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सरकार देश के ग्रामीण क्षेत्रों मोबाइल टेलीफोनी और इंटरनेट का उपयोग बढ़ाने पर जोर दे रही है और इस दिशा में आधारभूत ढाँचे का विस्तार किया जा रहा है। सेवा प्रदाता कंपनियों को भी भारत के गाँवों में बाजार दिख रहा है। ऐसे में इन दोनों माध्यमों का इस्तेमाल करने वाले लोगों में हिन्दी लिखने के लिए अँगरेजी भाषा का उपयोग जारी रहा तो स्थिति की विकटता को समझा जा सकता है।
देव ने कहा कि देश में प्रौद्योगिकी की सख्त आवश्यकता है लेकिन हिन्दी के विकास के लिए हिन्दी के की-बोर्ड के इस्तेमाल की भी जरूरत है और इस बात का सर्वेक्षण करने की आवश्यकता है कि कितने लोग लिखने में हिन्दी के की-बोर्ड का उपयोग कर रहे हैं।
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