हिन्दी दिवस या हिन्दी डे
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बच्चा ठीक ढंग से हिन्दी बोलना सीखे उसके पहले ही हिन्दी को उसके दैनिक जीवन से बाहर निकालने की कसरत इन दिनों शुरू हो जाती है। अपने बच्चों का अँग्रेजी भाषा पर अच्छा अधिकार बनाने की खातिर हिन्दी से बच्चों को दूर करना इन दिनों बहुत आम बात हो गई है। इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है।
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दो-चार दिनों पहले ही अंकिता मुझे रास्ते में मिल गई थी। अंकिता के बारे में मैं इतना जानती थी कि उसकी एमकॉम की पढ़ाई पूरी हो चुकी है। उस दिन दोबारा उसे झोला लटकाए जल्दबाजी में कही जाते देखा तो इस जल्दबाजी का कारण पूछने से खुद को रोक न सकी। उसने बताया कि वह क्लास में टाइम पर पहुँचने की जल्दी में है। वो किसी इंग्लिश और पर्सनालिटी डेवलपमेंट क्लास की स्टुडेंट बन चुकी है।
इस क्लास में प्रवेश लेने का कारण स्पष्ट करते हुए अंकिता ने बताया कि ‘दीदी मुझे कोई जॉब नहीं करनी। मैं तो अपना घर बसाकर उसमें हाउस वाइफ की तरह रहना चाहती हूँ। आजकल अच्छे लड़कों को ऐसी लड़कियाँ चाहिए, जो फ्लुएंटली इंग्लिश बोल सके। बस इसलिए ही क्लास ज्वॉइन की है।’
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अभी हम हिन्दी दिवस या हिन्दी पखवाड़े के बहाने ही सही लेकिन शुद्ध हिन्दी को एक बार याद तो करते हैं। अगर हमारी भाषा और बोली इसी पटरी पर चलती रही तो हो सकता है कि आने वाले कुछ सालों में 14 सितंबर भी हिन्दी दिवस के स्थान पर हिन्दी डे के रूप में मनाया जाए और आने वाली पीढ़ी हिंग्लिश को ही अपनी मातृभाषा स्वीकार कर ले।

