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गणेश चतुर्थी 2026: गणपति को कैसे कराएं घर में मंगल प्रवेश, खरीदी का शुभ मुहूर्त

ganesh chaturthi katha
14 सितंबर 2026 को मध्यान्ह काल 11:20 से 01:48 के बीच गणपति प्रतिमा की स्थापना होगी। इससे पहले गणेश मूर्ति का घर में शुभ मुहूर्त में विधिवत आगमन कराया जाता है जिसे मंगल प्रवेश कहेत हैं। इस बार गणेश उत्सव का पर्व 25 सितंबर तक यानी 12 दिनों तक चलेगा। अनंत चतुर्दशी पर प्रतिमा विसर्जन होगा। चलिए जानते हैं मंगल प्रवेश का मुहूर्त और विधि।

गणेश प्रतिमा लाने का शुभ मुहूर्त:

अमृत चौघड़िया: प्रात: 06:05 से 07:38 के बीच।
शुभ चौघड़िया: सुबह 09:11 से 10:44 के बीच।
नोट: उपरोक्त समय में गणेश प्रतिमा खरीदकर घर लाएं। 
 

श्री गणेश मंगल प्रवेश एवं स्थापना विधि

1. पूजा स्थान की तैयारी:

श्री गणेश जी के आगमन से पूर्व घर के मुख्य द्वार और पूजा घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें तथा उसे सजाएं। जहाँ गणेश जी की स्थापना करनी है, उस स्थान को स्वच्छ करके कुमकुम से 'स्वास्तिक' बनाएं और हल्दी की 4 बिंदियां लगाएं।

2. चौकी एवं आसन की स्थापना:

स्वास्तिक के ऊपर एक मुट्ठी अक्षत (चावल) रखें। उस पर लकड़ी की चौकी या बाजोट रखें और उस पर लाल, पीला या केसरिया रंग का पवित्र वस्त्र बिछाएं। पूजा और आरती की संपूर्ण सामग्री पहले से ही एकत्र करके रख लें।
 

3. बाजार जाते समय ध्यान रखने योग्य बातें:

गणेश जी की प्रतिमा लेने जाने से पूर्व स्वयं नवीन वस्त्र धारण करें, सिर पर टोपी या साफा बांधें। साथ में पीतल या तांबे की थाली (अथवा लकड़ी का पाट), घंटी और मंजीरा अवश्य ले जाएं, ताकि भगवान को आदरपूर्वक लाया जा सके।

4. मूर्ति का चयन करते समय विशेष सावधानियां:

  • प्रतिमा बैठी हुई मुद्रा में हो।
  • मूर्ति में साथ में उनका वाहन (मूषक) और रिद्धि-सिद्धि अवश्य हों।
  • प्रतिमा का रंग सफेद या सिंदूरी हो और वे पीतांबर (पीले) या लाल वस्त्र धारण किए हों।
  • मूर्ति में गणेश जी की सूंड बाईं ओर (वामवर्ती) मुड़ी हुई हो तथा हाथ में मोदक/लड्डू की थाली हो।
 

5. प्रतिमा क्रय एवं निमंत्रण:

बाजार जाकर जो गणेश प्रतिमा पसंद आए, उसका मोलभाव (मोल-तोल) न करें। विक्रेता को सादर दक्षिणा देकर गणेश जी को अपने घर पधारने का भावपूर्ण निमंत्रण दें।
 

6. द्वार पर आरती एवं स्वागत:

गणेश जी की प्रतिमा को आतिशबाजी और धूमधाम के साथ घर के मुख्य द्वार तक लाएं। गृह प्रवेश से पहले द्वार पर ही बप्पा की आरती उतारें।
 

7. मंगल गीत एवं मंत्रोच्चार:

द्वार पूजन के समय मंगल गीत गाएं, शुभ मंत्रों का उच्चारण करें अथवा गणेश जी के नाम का जप करें।
 

8. घर में मंगल प्रवेश एवं विराजमान करना:

इसके बाद 'गणपति बाप्पा मोरया' के जयकारों के साथ प्रसन्नचित्त होकर प्रतिमा को घर के अंदर लाएं और पूर्व से तैयार की गई चौकी पर आदरपूर्वक स्थापित (विराजित) करें।
 

9. विधिवत पूजन व आरती:

मंगल प्रवेश के तुरंत बाद भगवान श्री गणेश की अक्षत, दूर्वा, मोदक आदि से विधिवत पूजा करें और आरती उतारें।
 

10. मंगल प्रवेश का महत्व:

माना जाता है कि इस शास्त्रीय और भक्तिपूर्ण विधि से किए गए श्री गणेश के मंगल प्रवेश से जीवन के सभी विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं तथा घर में सुख, समृद्धि और मंगल का वास होता है; क्योंकि श्री गणेश विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता हैं।
 
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