गणेश चतुर्थी: विघ्नहर्ता श्री गणेश का आगमन एवं शुभ मुहूर्त
किसी भी कार्य का शुभारंभ 'श्री गणेश' लिखकर ही किया जाता है। वे विघ्नहर्ता, बाधाओं को दूर करने वाले और प्रथम पूज्य हैं। इसी कारण भाद्रपद मास में हर कोई 10 दिनों के लिए बप्पा को अपने घर लाता है, ताकि उनके घर में सुख, संपत्ति, विद्या, बुद्धि, शुभ और लाभ का आगमन हो सके। इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को है। ज्योतिर्विद डॉ. पं. सोमेश्वर जोशी के अनुसार, पंचांग में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह 7:00 बजे से अगले दिन सुबह 7:45 बजे तक रहेगी।
इस बार विशेष और उत्साहवर्धक बात यह है कि तीन बड़े ग्रह—शुक्र, सूर्य और बुध अपने स्वगृही भाव में हैं तथा गुरु व बुध ग्रह उच्च के हैं। यह पूरे विश्व के लिए अत्यंत शुभ ज्योतिषीय योग बना रहा है। ऐसे में गणेश जी का आगमन इन्हें और भी कल्याणकारी बनाएगा। इसमें कोई शंका नहीं है कि गणेश चतुर्थी सोमवार को ब्रह्म, छत्र, मुद्गर और दग्ध योग के शुभ मुहूर्त में मनाई जाएगी।
मालवा के धर्म विशेषज्ञ पं. देवेश्वर जोशी ने बताया कि गणेश जी का जन्म बुधवार को मध्याह्न काल में हुआ था। इसी दिन सिद्धिविनायक व्रत और कलंक चतुर्थी भी है। चंद्रमा द्वारा श्री गणेश के मूषक-भ्रमण पर उपहास उड़ाने के कारण गणेश जी ने चंद्रमा को शाप दिया था, जिसके कारण इस दिन चंद्र-दर्शन करने से कलंक लगता है (इसी दोष का प्रभाव स्वयं श्री कृष्ण पर भी पड़ा था)।
डॉ. पं. जोशी ने आगे बताया कि 'गणेश पुराण' के क्रीड़ाखंड में श्री गणेश के चार अवतारों का वर्णन किया गया है। इसमें वर्णित श्री गणेश की विविध लीलाओं पर श्रीमद्भागवत में वर्णित श्री कृष्ण की लीलाओं का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है। चार युगों के अनुसार श्री गणेश के चार अवतार इस प्रकार हैं:
सतयुग: कश्यप मुनि और उनकी पत्नी अदिति के पुत्र के रूप में जन्म लिया तथा 'महोत्कट विनायक' के नाम से प्रसिद्ध हुए। इन्होंने देवांतक, नरांतक एवं धूम्राक्ष नामक दैत्यों का संहार किया।
त्रेता युग: 'गुणेश' (या महेश्वर) नाम से शिवपुत्र के रूप में अवतार लिया और सिंधु नामक असुर का वध किया।
द्वापर युग: 'गजानन' नाम से शिवपुत्र के रूप में अवतार लेकर सिंदूर नामक दैत्य का वध किया।
कलयुग: श्री गणेश 'धूम्रकेतु' नाम से अवतार लेंगे। यह अवतार म्लेच्छ सेना के विनाश के लिए होगा।
श्री गणेश जी के चार मुख्य वर्ण (रंग) हैं- श्वेतवर्ण, पीतवर्ण, सिंदूरवर्ण और नीलवर्ण।
प्रसिद्ध 'गणपति अथर्वशीर्ष' श्री गणेश पर आधारित एक श्रेष्ठ उपनिषद है, जिसमें गणेश जी को ओंकार स्वरूप से लेकर विद्या, गायत्री और ब्रह्म देवता आदि की उपाधि दी गई है। गणपति का वर्णन वेदों में भी मिलता है। शिव पुराण के अनुसार, पार्वती-शिव विवाह में भी सबसे पहले गणपति पूजन ही हुआ था।
भविष्य पुराण के अनुसार 'शिवा', 'शांता' और 'सुख'- ये तीन प्रकार की चतुर्थी होती हैं, जिनमें भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को 'शिवा चतुर्थी' कहा गया है। इसमें स्नान, दान, जप और उपवास करने से सौ गुना फल प्राप्त होता है।
व्रत एवं त्योहारों की सूची:
हरतालिका तीज: रविवार, 13 सितंबर 2026
गणेश चतुर्थी / सिद्धिविनायक व्रत / विश्व हिंदी दिवस: सोमवार, 14 सितंबर 2026
ऋषि पंचमी: मंगलवार, 15 सितंबर 2026
जलझूलनी एकादशी व्रत (सर्वेषाम्): मंगलवार, 22 सितंबर 2026
प्रदोष व्रत: गुरुवार, 24 सितंबर 2026
अनंत चतुर्दशी: शुक्रवार, 25 सितंबर 2026
महालय श्राद्ध पक्ष आरंभ / पूर्णिमा श्राद्ध: शनिवार, 26 सितंबर 2026
।। गणेश स्थापना के चौघड़िया मुहूर्त ।।
अमृत (प्रातः): 06:12 से 07:45 तक
शुभ (प्रातः): 09:17 से 10:49 तक
चल (दोपहर): 01:54 से 03:26 तक
लाभ (अपराह्न): 03:26 से 04:59 तक
अमृत (सायं): 04:59 से 06:31 तक
चल (सायं): 06:31 से 07:59 तक
विशेष ध्यान देने योग्य बातें:
मिट्टी, गोबर, कुमकुम, हल्दी, गुलाल, अबीर, अक्षत, सिंदूर, दूध और घी के उपयोग से बनाई गई गणेश प्रतिमा को ही शुभ मुहूर्त में स्थापित करें।
आवाहन एवं षोडशोपचार विधि से पूजन, अभिषेक, आरती व पुष्पांजलि करें।
गणेश जी के 21 नामों के साथ मोदक/लड्डू एवं दूर्वा अर्पित करने से सहस्रार्चन का फल मिलता है।
इस दिन स्नान, दान, जप और व्रत का विशेष महत्व है।

