Live Updates : 29 दिसंबर को हो सकती है सरकार और किसानों की बातचीत
नई दिल्ली। कृषि सुधार कानूनों के विरोध में किसान संगठन का आंदोलन 26 दिसम्बर, शनिवार को 31वें दिन भी जारी है। आंदोलन से जुड़ी हर जानकारी....
07:04 PM, 26th Dec
-राजस्थान से सांसद एवं आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल ने कृषि कानूनों को लेकर राजग से अलग होने की घोषणा की।
-भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने बताया कि किसान संगठनों के नेताओं का सरकार के साथ बातचीत फिर शुरू करने का निर्णय किया है और 29 दिसंबर को बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि नए कृषि कानूनों को समाप्त करने के तौर-तरीके, न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी सरकार के साथ के बातचीत का मुख्य एजेंडा होगा।
03:28 PM, 26th Dec
-केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली सीमा पर चल रहे किसानों के धरने और आंदोलन को और मजबूत करने के लिये पंजाब के हजारों किसान के जत्थे धरना स्थल की ओर रवाना हो चुके हैं।
-शनिवार को लगभग 15 हजार किसानों ने संगरूर जिले की खनौरी सीमा से दिल्ली ओर प्रस्थान किया। इनमें बच्चे, महिलाएं और पुरूष शामिल हैं। इन लोगों का शुक्रवार रात से ही खनौरी सीमा पर पहुंचना शुरू हो गया था।
-वहीं 27 दिसम्बर रविवार को डबवाली सीमा से लगभग 15 हजार किसान दिल्ली के लिये रवाना होंगे। दिल्ली कूच आहवान संयुक्त किसान मोर्चा ने की है।
-मोर्चा किसानों आंदोलन के खिलाफ कथित दुष्प्रचार की काट के लिये कृषि कानूनों की सच्चाई जनता तक ले जाने के लिये पंजाब समेत देशभर में हिंदी और पंजाबी में लगभग दस लाख पुस्तकें वितरित करने का फैसला लिया है।
03:21 PM, 26th Dec
-कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बाॅर्डर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में राजस्थान शिक्षक संघ शामिल हुआ। संगठन के एक प्रतिनिधि ने बताया, 'हमारे संगठन ने सरकार के खिलाफ राजस्थान में जगह-जगह प्रदर्शन किए हैं। इन कानूनों का प्रभाव पूरे मध्यम वर्ग पर पड़ेगा।'
कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बाॅर्डर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में राजस्थान शिक्षक संघ शामिल हुआ। संगठन के एक प्रतिनिधि ने बताया, "हमारे संगठन ने सरकार के खिलाफ राजस्थान में जगह-जगह प्रदर्शन किए हैं। इन कानूनों का प्रभाव पूरे मध्यम वर्ग पर पड़ेगा।" #FarmersProtest pic.twitter.com/PBqiXjc0dZ
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 26, 2020
10:07 AM, 26th Dec
-किसान आंदोलन के समर्थन में राजस्थान के किसानों का हरियाणा सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर लगातार जमावड़ा बढ़ता जा रहा है।
-किसान आंदोलन के समर्थन में जहां शाहजहांपुर बार्डर पर किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट के नेतृत्व में करीब चार किलोमीटर क्षेत्र में टेंट लगाकर पड़ाव डाल रखा है वहीं -राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल भी अपने समर्थकों के साथ आज पूर्वाह्न कोटपुतली से दिल्ली के लिए कूच करेंगे।
-दिल्ली कूच करने वाले लोगों को हरियाणा सीमा पर शाहजहांपुर में रोका जा रहा है, इसलिए राजमार्ग के दोनों तरफ किसान एवं उनके समर्थन में आए लोग अपने ट्रेक्टरों एवं सड़क के किनारे पर ही टेंट लगा रखा है।
-जाट ने बताया कि आंदोलन के समर्थन में किसानों के आने का सिलसिला लगातार जारी है और आज दोपहर में श्री बेनीवाल के साथ भी किसानों का जत्था शाहजहांपुर बार्डर पहुंचेगा।
-हरियाणा पुलिस प्रशासन द्वारा दिल्ली- मुम्बई सड़क बन्द कर दिया गया है।
09:43 AM, 26th Dec
-किसान संगठन की ओर से राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर लगातार धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। इस बीच सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है।
-संयुक्त किसान मोर्चा की आज बैठक होने वाली है जिसमे सरकार की ओर से आए बातचीत के प्रस्ताव तथा अन्य मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
-किसान संगठनों के प्रतिनिधियों का राजधानी में आना शुरु हो गया है। ये लोग पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और कई अन्य राज्यों से आए रहे हैं।
09:42 AM, 26th Dec
-भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) ने सभी इकाईयों से 26 दिसम्बर को धिक्कार दिवस तथा कारपोरेट विरोध दिवस मनाने की अपील की।
-सरकार का धिक्कार उसकी संवेदनहीनता और किसानों की पिछले सात माह के विरोध और ठंड में एक माह के दिल्ली धरने के बावजूद मांगें न मानने के लिए किया जा रहा है।
-संगठन ने आरोप लगाया है कि सरकार तीन कृषि कानून व बिजली बिल 2020 को रद्द करने की किसानों की मांग को हल नहीं करना चाहती।
09:42 AM, 26th Dec
-आईकेएससीसी के वर्किंग ग्रुप ने कहा कि सरकार का दावा कि वह खुले मन से सहानुभूतिपूर्वक वार्ता कर रही है, एक छलावा है। उसका दिमाग पूरी तरह से बंद है और कानूनों में कुछ सुधारों पर अड़ा हुआ है।
-वह देश के लोगों को धोखा और किसान आन्दोलन को बदनाम करना चाहती है।
-उसकी योजना है कि यह दिखा कर कि किसान वार्ता के लिए नहीं आ रहे, वह किसानों को हतोत्साहित कर दे, विफल हो जाएगी।
-किसान नेताओं ने कभी भी वार्ता के लिए मना नहीं किया। वे किसी भी तरह की जल्दी में नहीं हैं और कानून वापस कराकर ही घर जाएंगे।

