झेलना पड़ सकता है भितरघात
नई दिल्ली। वर्तमान विधायकों को फिर से चुनाव मैदान में उतारने से भारतीय जनता पार्टी को खामियाजा उठाना पड़ सकता है। भाजपा के निगम पार्षद को टिकट न देने से पार्टी उम्मीदवारों को भितरघात का सामना करना पड़ेगा। पिछली बार चुनाव हारे उम्मीदवारों को फिर से मैदान में उतारने के तैयारी से कार्यकर्ताओं की नाराजगी बढ़ रही है। ऐसे उम्मीदवारों के लिए चुनाव जीतना आसान नहीं होगा।
भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार विजय कुमार मल्होत्रा की कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की सूची पर प्रतिक्रिया थी-वर्तमान विधायकों को चुनाव मैदान में उतारने से पार्टी को फायदा मिलेगा। भाजपा के 19 विधायक हैं। इनमें कुछ ऐसे विधायकों के खिलाफ कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल रखा है।जगह-जगह विरोध हो रहा है। पार्टी आलाकमान को विधायकों के खिलाफ पत्र भेजे गए हैं। कार्यकर्ता पूछ रहे हैं कि कांग्रेस के मौजूदा विधायकों को जनता की नाराजगी झेलनी पड़ेगी तो क्या भाजपा के वर्तमान विधायकों की राह आसान है?
भाजपा के निगम पार्षदों को टिकट न देने पर भी सवाल उठ रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्षदों को टिकट केवल प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन की वजह से नहीं दिया जा रहा है। इससे कई मजबूत पार्षदों की जगह भाजपा को कमजोर उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारने पड़ रहे हैं।
कार्यकर्ता हैरान हैं कि जिन्हें नगर निगम चुनाव लड़ाने लायक नहीं समझा उन्हें अब विधानसभा का चुनाव लड़ाया जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता भी मानते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन बेवजह पार्षदों को चुनाव न लड़ाने की जिद ठाने हुए हैं। प्रदेश भाजपा द्वारा तय किए उम्मीदवारों पर अभी भाजपा संसदीय बोर्ड की मोहर लगनी है। निगम पार्षदों को उम्मीद हैं कि संसदीय बोर्ड में निगम पार्षदों को टिकट देने का फैसला हो सकता है। संसदीय बोर्ड की 31 अक्टूबर को बैठक होगी।
भाजपा के नेता यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जब भाजपा के बड़े नेताओं को अपने-अपने चंपुओं को टिकट देनी है तो फिर मंडल और जिलों को टिकट प्रक्रिया में शामिल करने की जरूरत की क्या है। (नईदुनिया)
भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार विजय कुमार मल्होत्रा की कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की सूची पर प्रतिक्रिया थी-वर्तमान विधायकों को चुनाव मैदान में उतारने से पार्टी को फायदा मिलेगा। भाजपा के 19 विधायक हैं। इनमें कुछ ऐसे विधायकों के खिलाफ कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल रखा है।जगह-जगह विरोध हो रहा है। पार्टी आलाकमान को विधायकों के खिलाफ पत्र भेजे गए हैं। कार्यकर्ता पूछ रहे हैं कि कांग्रेस के मौजूदा विधायकों को जनता की नाराजगी झेलनी पड़ेगी तो क्या भाजपा के वर्तमान विधायकों की राह आसान है?
भाजपा के निगम पार्षदों को टिकट न देने पर भी सवाल उठ रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्षदों को टिकट केवल प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन की वजह से नहीं दिया जा रहा है। इससे कई मजबूत पार्षदों की जगह भाजपा को कमजोर उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारने पड़ रहे हैं।
कार्यकर्ता हैरान हैं कि जिन्हें नगर निगम चुनाव लड़ाने लायक नहीं समझा उन्हें अब विधानसभा का चुनाव लड़ाया जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता भी मानते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन बेवजह पार्षदों को चुनाव न लड़ाने की जिद ठाने हुए हैं। प्रदेश भाजपा द्वारा तय किए उम्मीदवारों पर अभी भाजपा संसदीय बोर्ड की मोहर लगनी है। निगम पार्षदों को उम्मीद हैं कि संसदीय बोर्ड में निगम पार्षदों को टिकट देने का फैसला हो सकता है। संसदीय बोर्ड की 31 अक्टूबर को बैठक होगी।
भाजपा के नेता यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जब भाजपा के बड़े नेताओं को अपने-अपने चंपुओं को टिकट देनी है तो फिर मंडल और जिलों को टिकट प्रक्रिया में शामिल करने की जरूरत की क्या है। (नईदुनिया)

