ब्लॉग चर्चा : एक हिंदुस्‍तानी की डायरी

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शुक्र मनाइए कि भूपत कोळी संज्ञाशून्य है। उसे न तो अपने गुनाह की संजीदगी का एहसास है और न ही सज़ा की तकलीफ का। लेकिन हम तो संज्ञाशून्य नहीं हैं। और, प्रजावत्सल नरेंद्र मोदी तो कतई संज्ञाशून्य नहीं हो सकते क्योंकि यह उन्हीं के गुजरात की एक हिंदू प्रजा का मामला है।'

डायरी का एक और पन्‍ना, 'न कोई मुस्लिम दोस्‍त है न पड़ोसी' में अनिल सिंह लिखते हैं, 'बँटवारे की राजनीति और दंगों ने हमारे शहरों में धार्मिक आधार पर मोहल्लों और बस्तियों का ध्रुवीकरण कर दिया है। इसने हम से विविधता का वो चटख रंग छीन लिया है, बचपन से ही हम जिसके आदी हो चुके थे। मैं राम जन्मभूमि और अवध के उस इलाके से आता हूँ जहाँ हमारे चाचा, ताऊ और पिताजी आजी सलाम, बड़की माई सलाम और बुआ सलाम कहा करते थे। ताजिया के मौके पर आजी हम बच्चों को धुनिया (जुलाहों की) बस्ती में भेजती थी, मन्नत माँगती थी। बकरीद पर मुसलमानों के घर से हमारे यहाँ भी खस्सी का गोश्त आता था।'

ऐसी ढेरों बेहतरीन चीजें हैं, उनके ब्‍लॉग पर। 'एक हिंदुस्‍तानी की डायरी' लगातार अपडेट होती रहती है। प्रतिदिन आपको वहाँ कुछ नया, कुछ बेहतरीन पढ़ने को मिलेगा।

हिंदी ब्‍लॉगिंग के बढ़ते संसार से अनिल काफी उत्‍साहित हैं और इसे बहुत सकारात्‍मक नजरिए से देखते हैं। उनका मानना है कि ब्‍लॉग के माध्‍यम से बहुत सारी चीजें बहुत बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुँच रही हैं। विश्‍व साहित्‍य से लेकर क्‍लासिक किताबें तक ब्‍लॉग के माध्‍यम से आ रही हैं। ब्‍लॉग प्रिंट मीडिया की तुलना में अधिक सशक्‍त माध्‍यम है।

उनका मानना है कि ब्‍लॉगिंग के माध्‍यम से हिंदी भाषा और साहित्यिक लेखन का भी निश्चित ही विकास होगा। नए लेखकों की पौध तैयार होगी। हिंदी लेखन की दुनिया वैसे ही बहुत संकुचित और बहुत सारी घटिया राजनीति का शिकार रही है। ब्‍लॉग जरूर उस दलवाद को तोड़ने का काम करेंगे और इस दुनिया का विस्‍तार होगा। हिंदी साहित्‍य की वर्तमान दशा ऐसी है कि उसमें एक किस्‍म का ठहराव आ गया है। जीवन के साथ उसका संबंध टूटा है। हिंदी ब्‍लॉग साहित्‍य और जीवन के बीच इस ठहराव को खत्‍म करने और तोड़ने का काम करेंगे।

अनिल सिंह कहते हैं कि वैसे तो बहुत से विषयों पर लिखा जा रहा है, लेकिन बहुत-सी बातें अब भी छूटी हुई हैं। उनके अनुसार हिंदी में मनोविज्ञान, दर्शन, इतिहास और राजनीतिक विषयों पर कुछ गंभीर किस्‍म के ब्‍लॉग होने चाहिए। विज्ञान और अर्थशास्‍त्र पर गंभीर, वैचारिक लेखन होना चाहिए। नारे या जुमलेबाजी नहीं, बल्कि एक चिंतनपरक लेखन। ब्‍लॉग के माध्‍यम से नए विचारों को स्‍थान मिले। नए विश्‍वास और नई आस्‍थाएँ पैदा हों।

ब्‍लॉग - एक हिंदुस्‍तानी की डायर
URL - //diaryofanindian.blogspot.com/



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