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अमीन सयानी ने 'जयमाला' के जरिये जीता दिल

सीमान्त सुवीर|
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1981 में 15 अगस्त के दिन 'जयमाला' के जरिये ऋषिकेश मुखर्जी मुखातिब हुए। उन्होंने जो प्रोग्राम पेश किया वह इस तरह रहा। मेरा सौभाग्य है कि जिनके हाथों में हमारी आजादी सुरक्षित है, मैं उनसे बात कर रहा हूँ। मेरे विचार से हमारी असली लड़ाई अपने आपसे होती है। यही कारण है‍ कि 'गुड्‍डी' में मैंने वसंत देसाई के खूबसूरत गीत 'हमको मन की शक्ति देना...' को वाणी जयराम से गवाया। भारतीय संस्कृति का यह गुरुमंत्र है कि हमें खुद को मजबूत करना होगा, तभी हम दूसरों पर विजय प्राप्त कर सकेंगे।
मदन मोहन : मेरे विचार से भारत का शास्त्रीय संगीत हमेशा अमर रहेगा। कुछ लोग पश्चिम की नकल कर रहे हैं, लेकिन ऐसे गीतों की उम्र अधिक नहीं होती। शास्त्रीय संगीत पर आधारित गीत हमेशा सुने और पसंद किए जाएँगे। 'बैजू बावरा' ऐसी पहली फिल्म रही, जिसने फि‍ल्मी दुनिया को शास्त्रीय संगीत की तरफ मोड़ा। राग मालकोंस में रफीजी का गीत 'मधुबन में राधिका नाचे...' बेहद कर्णप्रिय है।

1962 में चीन के साथ युद्ध करने के बाद फिल्मी सितारे भारतीय फौजियों का मनोरंजन करने के लिए सरहदों पर पहुँचने लगे थे। सुनील दत्त भी इस भूमिका में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते रहे। उन्होंने 'जयमाला' पेश करते हुए कहा- फौजी भाइयों मैं सरहद पर आपसे कई बार मिला हूँ। एक मजेदार वाकया याद आ रहा है। किशोर कुमार कभी भी स्टेज पर गीत नहीं गाते थे, लेकिन मैंने उनसे यह काम भी करवा लिया।

हमें नथुला-गंगटोक में फौजी भाइयों का मनोरंजन करना था। वहाँ काफी बर्फ थी और जवानों ने लकड़ी का स्टेज बनाया था। किशोर से मैंने कहा गीत गाइए। वे मना कर गए। तय हुआ कि मैं होंठ हिलाऊँगा और पीछे से वे गीत गाएँगे। वह गीत था 'पड़ोसन' का 'एक चतुर नार करके सिंगार...' कुछ समय तक तो मैं होंठ हिलाता रहा और फिर चुपके से हट गया। और इस तरह किशोर की शर्म का घूँघट हट गया।
नादिरा : मैं यहूदी परिवार से रही हूँ और भारतीय सिनेमा जगत में मुझे काफी शोहरत हासिल हुई। मेरा फिल्मी सफर मेहबूब साहब की फिल्म 'आन' से शुरू हुआ। यह देश की पहली टेक्निकल फिल्म थी और इसी फिल्म से दिलीप कुमार ने भी आगाज किया था। मैं भाग्यशाली हूँ कि मुझे पहली ही फिल्म में बतौर नायिका इतनी जबरदस्त सफलता मिली। ऐसी शुरुआत शायद ही किसी और को मिली होगी।
अमीन सयानी ने‍‍ विविध भारती पर 'जयमाला' के जो अमर टेप्स के अंश पेश किए, उन्हें पेश करने वाली हस्तियाँ थीं गीता दत्त, मीना कुमारी, जीवन, प्रेमनाथ और पंडित नरेन्द्र शर्मा। आप खुद सोचें कि इन महारथियों ने जो प्रोगाम पेश किए थे, वे कितने दिलकश और रोमांचित कर देने वाले रहे होंगे।

और अब अंत में यह बताना जरूरी है कि विविध भारती अपनी स्वर्ण जयंती पूरे साल मनाएगा। हर तीन तारीख को विशेष प्रस्तुत‍ि पेश की जाएगी। यदि आप 3 नवम्बर की तारीख चूक गए हों तो मलाल मत कीजिए, क्योंकि 3 दिसम्बर की तारीख आने में वक्त बाकी है।



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