शिवा शर्मा हत्याकांड में बड़ा एक्शन, नागपुर में श्रद्धा दुबे पकड़ी गईं, बहन रश्मि और दानिश भी गिरफ्तार
उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ के कारोबारी और कैफे संचालक शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में फरार चल रहीं मॉडल एवं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रद्धा दुबे को आखिरकार पुलिस ने नागपुर से गिरफ्तार कर लिया गया। 150 कैमरों की जांच पड़ताल के साथ उत्तर प्रदेश एसटीएफ, लखनऊ पुलिस और नागपुर क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में श्रद्धा के साथ उनकी बहन रश्मि दुबे और दानिश उर्फ तनवीर अली को भी गिरफ्तार किया गया है।
यह तीनों को नागपुर के चिंचभवन क्षेत्र में स्थित एक अपार्टमेंट के अंदर से छुपे हुए थे, करीब 11 दिनों से कड़ी मशक्कत के बाद नागपुर में श्रृद्धा दुबे उनकी बहन रश्मि और दानिश पुलिस के हत्थे चढ़ गये है।
श्रृद्धा और उसके साथ गिरफ्तार दो लोगों को बेलतरोड़ी पुलिस स्टेशन लाया गया, जहां उनसे पूछताछ के बाद नागपुर मेडिकल कॉलेज ले परीक्षण कराते हुए बेलतरोड़ी थाने से हुड़केश्वर थाने में शिफ्ट किया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश की एसटीएफ टीम अब उन्हें लखनऊ ले जाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए संबंधित अदालत से ट्रांजिट रिमांड मांगी जाएगी। रिमांड मिलने के बाद पुलिस उत्तर प्रदेश में इनसे पूछताछ होगी।
150 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से मिला अहम सुराग
पुलिस की जांच में नागपुर तक पहुंचने के लिए सीसीटीवी फुटेज की अहम भूमिका रही है। चकमा देकर फरार हो रही श्रद्धा तक पहुंचने के लिए लखनऊ पुलिस और नागपुर पुलिस ने मिलकर करीब 150 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाला। पुलिस की पैनी नजर उन रास्तों और स्थानों पर थी, जहां से गुजरते हुए आरोपी नागपुर में अपने ठिकाने तक पहुंचे थे।
जांच के दौरान गणेशपेठ इलाके से ई-रिक्शा लेने से जुड़ा सुराग मिला। इसके बाद पुलिस ने कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए सभी मार्गों की सीसीटीवी फुटेज खंगालनी शुरू की। कैमरों में लह आते-जाते दिखाई दिए और पुलिस के पास उपलब्ध सूचनाओं को आपस में जोड़कर पुलिस ने आरोपियों की लोकेशन का पता लगाया। इसी सुराग के आधार पर जांच टीम चिंचभवन इलाके के उस अपार्टमेंट में पहुंची जहां तीनों के होने की जानकारी मिली।
रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के साथ इंटरनेट रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर मिली सूचनाओं का भी सहारा लिया। कई राज्यों में तलाश के बाद नागपुर में मिली यह सफलता जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
9 अक्टूबर को हुई थी शिवा शर्मा की मौत
यह पूरा मामला लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट में 9 अक्टूबर 2026 को हुई शिवा शर्मा की मौत से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, 28 वर्षीय शिवा शर्मा अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए थे। उनकी मौत के बाद घटना को लेकरतमाम तरह के सवाल उठ रहें थे, जिसके बाद यह मामला हत्या के आरोपों तक पहुंच गया।
शिवा की मां रंजना शर्मा ने बेटे की मौत को हादसा या सुसाइड मानने से इंकार करते हुए हत्या का आरोप लगाया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर हजरतगंज थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए श्रृद्धा दुबे और उसके सहयोगियों की जांच पड़ताल शुरू कर दी।
शिवा की मौत के मामले में श्रद्धा दुबे को मुख्य आरोपी के रूप में तलाशा जा रहा था। इसी दौरान उनकी बहन रश्मि दुबे और दानिश का नाम भी जांच के दायरे में आया। हालांकि, शिवा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसमें किसकी क्या भूमिका रही है, यह पुलिस पूछताछ के बाद से साफ हो पायेगा।
मौत के बाद से फरार थे तीनों
शिवा शर्मा की मौत के बाद से श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और दानिश पुलिस की तलाश में थे। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने उनकी संभावित लोकेशन का पता लगाने के लिए अलग-अलग जगहों पर तलाश तेज की। मामला उत्तर प्रदेश से बाहर तक पहुंचा और जांच एजेंसियों ने दूसरे राज्यों में भी सुराग तलाशे।
मिली जानकारी के मुताबिक इन तीनों के ऊपर अलग-अलग 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस इनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी, लेकिन यह बार-बार अपने ठिकाने बदल रहे थे। जिसके चलते जांच टीम को उनकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए अलग-अलग स्थानों के रिकॉर्ड और डिजिटल सुरागों को जोड़ना पड़ा।
आखिरकार, उत्तर प्रदेश एसटीएफ और लखनऊ पुलिस को नागपुर में उनकी मौजूदगी का सुराग मिला। नागपुर पुलिस की मदद से संयुक्त टीम ने चिंचभवन इलाके में कार्रवाई की और तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
श्रद्धा दुबे ने सोशल मीडिया पर दी थी सफाई
इस मामले में एक और अहम पहलू यह है कि गिरफ्तारी से पहले श्रद्धा दुबे सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी बात रख चुकी थीं। उन्होंने खुद को निर्दोष बताया और शिवा की मौत को आत्महत्या। उन्होंने दावा किया था कि से शिवा पर कर्ज था, आर्थिक दबाव के चलते उसने आत्महत्या की है।
दूसरी ओर, शिवा की मां ने बेटे की मौत को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में मामले में दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो, ऑडियो या अन्य सामग्री को भी तब तक निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता, जब तक उनकी प्रामाणिकता और प्रासंगिकता की पुष्टि जांच एजेंसियां नहीं कर देतीं।
पुलिस अधिकारियों पर भी उठा था सवाल
शिवा शर्मा की मौत का मामला सामने आने के बाद पुलिस की शुरुआती जांच को लेकर भी सवाल उठे थे। इस प्रकरण की गंभीरता बढ़ने के बीच लखनऊ पुलिस के कुछ अधिकारियों के तबादले और जिम्मेदारियों में बदलाव की खबरें भी सामने आई थीं। इसके बाद फरार आरोपितों की तलाश और मामले की जांच को लेकर पुलिस पर दबाव बढ़ गया।
मामले में इन घटनाक्रमों का पूरा महत्व जांच की प्रगति और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता आरोपितों को लखनऊ लाना, उनसे पूछताछ करना और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि करना है।
ट्रांजिट रिमांड के बाद लखनऊ ले जाने की तैयारी
नागपुर में गिरफ्तारी के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया तीनों आरोपितों को उत्तर प्रदेश ले जाने की है। इसके लिए पुलिस संबंधित अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड की मांग करेगी। ट्रांजिट रिमांड मिलने पर उत्तर प्रदेश एसटीएफ और लखनऊ पुलिस उन्हें अपने साथ ले जा सकेंगी।
लखनऊ पहुंचने के बाद पुलिस शिवा शर्मा की मौत से जुड़े घटनाक्रम, आरोपितों की गतिविधियों, आपसी संबंधों और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ कर सकती है। सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का मिलान भी जांच का अहम हिस्सा होगा।
फिलहाल इस मामले में गिरफ्तारी को जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, शिवा शर्मा की मौत के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं, घटना में किसकी क्या भूमिका थी और आरोपों की पुष्टि किन साक्ष्यों से होगी।

