Ground Report : राजस्थान की राजधानी जयपुर के आसमान में उड़ता 'कोरोना'!

Author डॉ. रमेश रावत| Last Updated: मंगलवार, 31 मार्च 2020 (22:17 IST)
देशभर में जहां सभी लोग सोशल डिस्टेंसिंग की बात करते हुए एक दूसरे से दूरी बनाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर की राजधानी एवं आसपास के तहसील एवं गांवों में लोग पतंगें उड़ाकर अपना समय व्यतीत कर रहे हैं।

जयपुर के आसमान में पतंगें इतनी तादात में उड़ रही हैं कि लॉकडाउन के दौर में भी मकर संक्रांति जैसा अहसास हो रहा है। ऐसा करके लोग प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सोशल डिस्टेंसिंग की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। उड़ाने वालों के साथ ही पतंग लूटने वालों को भी शायद इस बात का अंदाजा नहीं होगा कि अनजाने में उनके घर में घुसकर उन्हें सक्रमित कर सकता एवं उनके परिजनों संक्रमण का शिकार हो सकते हैं।

एक ओर जहां लोग दूध लाने, सब्जी लाने के लिए भी ऐहतियात बरत रहे हैं, वहीं कई लोगों ने तो अपने घरों में संक्रमण फैलने के डर से अखबार भी बंद करवा दिया है। दूसरी ओर पंतगबाजी का लुत्फ उठा रहे लोग कोरोना वायरस के संक्रमण से अनजान हैं। समाचार पत्र भी छपने की प्रक्रिया में सैनेटाइज होकर लोगों के घरों में जा रहे हैं ताकि संक्रमण नहीं हो, वहीं ये पतंग-मांझा संक्रमण का बहुत बड़ा कारण बन सकते हैं।

जयपुर की कुल जनसंख्या करीब 40 से 50 लाख है। जयपुर एवं जयपुर ग्रामीण में हजारों की तादात में पतंगें प्रतिदिन उड़ाई जा रही हैं। इनसे कोरोना संक्रमण की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। कोरोना को ध्यान में रखकर लॉकडाउन, स्क्रीनिंग, टीवी एवं समाचार पत्रों में विज्ञापनों के सारे के सारे प्रयास भी धरे रह जाएंगे।

यह स्थिति राजस्थान के जयपुर जिले के अतिरिक्त अन्य जिलों में भी हो सकती है। इस पर ध्यान देना उतना ही जरूरी है। शासन, प्रशासन को इस संबंध में गाइड लाइन जारी करनी चाहिए, जिसमें पतंग एवं मांझे से कोरोना वायरस के संक्रमण की आशंका का उल्लेख हो।
ऐसे फैल सकता है पंतग उड़ाने से संक्रमण :
1. जब कोई भी पतंग उड़ाता है तो वह नंगे हाथों से पतंग की डोर पकड़कर उसे उड़ाता है।
2. पतंग के तंग डालते समय भी पतंग को पकड़ता है व तंग डालता है।
3. कागज एवं पन्नी की बनी होती है पतंगें, जिनको छूने में अनजाने में संक्रमित व्यक्ति कीटाणु छोड़ सकता है।
4. जब पतंग लंबी होती है व पेंच लड़ाने पर कटती है तो उसे सैकड़ों मीटर दूर तक लोग लूटते हैं।
है। वे लूटी हुई पतंग के साथ संक्रमण भी अनजाने में अपने घर ले जा सकते हैं।
5. कोरोना वायरस संपर्क में आने से, संक्रमित व्यक्ति को छूने से, संक्रमित व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल की गई चीजों को छूने से फैलता है। पतंग एवं मांझे से भी यह स्थिति बन सकती है।

दरअसल, जयपुर में परकोटे एवं बाहर की कॉलोनियों में मकानों की छतें एक-दूसरे सटी हुई हैं। इससे लोग आसानी से एक-दूसरे की छतों पर जा रहे हैं। दूसरी और जब जांच-पड़ताल की गई एवं लोगों से बात की गई तो कुछ ने कहा कि पतंग उड़ाने से कोई वायरस नहीं फैलता है। वहीं कोरोना के खौफ में जी रहे लोगों ने कहा कि पतंग उड़ाने से कोरोना फैल सकता है। अत: इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए।

इस संबंध में डॉ. आषुतोष गुप्ता (एमडी, फिजिशियन) कहना है कि कोरोना वायरस मुख्यत: तीन कारणों से फैलता है। पहला जो व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित है और वह छींकता है, खांसता है या उससे जो अंश या बूंदें गिरती हैं।
इसे ड्रॉपलेट कहते हैं। दूसरा हवा में ड्रापलेट कुछ देर के लिए या हवा में नमी के कारण बहुत देर तक रहती है तो इसे ऐरोसोल कहते हैं। इससे हमें मास्क बचाता है। तीसरा फोमाइक्स के जरिए अर्थात जहां संक्रमित व्यक्ति के ड्रापलेट गिरते हैं, वहां यदि कोई व्यक्ति उस स्थान को छू ले तो इससे भी संक्रमण फैलता है।

अब पतंग के तंग डालना, इसे उड़ाना एवं मांझे के हाथ लगाना तीसरे प्रकार के कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने का तरीका फोमाइक्स हो सकता है। इसमें यदि कोई व्यक्ति संक्रमित है एवं इसे इसका पता नहीं है और वह पतंग उड़ाता है, चरखी पकड़ता है एवं मांझे के संपर्क में आता है एवं वातावरण का तापमान कम है, वातावरण में नमी है और पतंग, मांझे एवं चरखी पर यदि ऐसी ड्रापलेट है तो कोरोना वायरस से संक्रमण फैलने की संभावना पूरी है।

इसलिए पतंग उड़ाना भी जाने-अनजाने में सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाने के आदेश का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से उल्लंघन है। फोमाइक्स से बचने के लिए हैंड वॉशिंग एवं सैनेटाजेशन की सलाह दी जाती है। साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने से भी कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है।





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