आँखों के तारे को संभालें
बाल दिवस के संदर्भ में...
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बच्चों की भावना समझने वाले बहुत कम ही माता-पिता या शिक्षक रह गए हैं। उनसे प्रेम करने के बजाए उन पर शिक्षाएँ और उपदेश थोपे जाते रहे हैं। यही कारण रहता है कि ज्यादातर बच्चों का बचपन उनसे छीन लिया जाता है। बहुत बड़े होने का बाद ही उनका विजन स्पष्ट हो पाता है कि आखिर मुझे जिंदगी में करना क्या चाहिए था।
बच्चों के प्रति बहुत ही मानवीय और प्रेमपूर्ण रहना आवश्यक है अन्यथा हम बच्चों का ही नहीं समाज, देश और दुनिया का जाने-अनजाने भविष्य बिगाड़ रहे होंगे, और ऐसा होता ही रहा है।
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पति का गुस्सा पत्नी बच्चों पर ही निकाल देती है और पत्नी का गुस्सा पति भी बच्चों पर निकाल देता है। बच्चा समझ नहीं पाता है कि आखिर हर बात पर मुझे डाँटा क्यों जा रहा है। यही कारण रहता है कि बच्चा धीरे-धीरे कुंठित होता जाता है। अंतत: वह माता-पिता के प्रति कभी भी प्रेमपूर्ण नहीं रहता। पूरी दुनिया के तारे जमीन पर आँसू बहा रहे हैं।

