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मान गए मुगल-ए-आज़म

मान गए मुगल-ए-आज़म
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निर्माता : चंपक जैन, गणेश जैन, रतन जैन
निर्देशक : संजय छैल
संगीत : अनु मलिक
कलाकार : राहुल बोस, मल्लिका शेरावत, परेश रावल, के.के. मेनन, पवन मल्होत्रा, ज़ाकिर हुसैन

’मान गए मुगल-ए-आजम’ ‘कलाकार थिएटर कंपनी’ की कहानी है जो वर्षों से मजबूरीवश ‘मान गए मुगल-ए-आजम’ नाटक का मंचन करता आया है। इस कहानी में दिखाया गया है कि कैसे एक छोटे शहर की ड्रामा कंपनी अपने देश को बचाने के मिशन में शामिल होती है।

बात 1993 की है जब देश में सांप्रदायिक दंगे हो रहे थे। चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ था। सेंट लुईस नामक एक छोटे शहर में पुलिस और सीबीआई ऑफिसर्स को सचेत कर दिया गया था कि उनके इलाके में कई गैरकानूनी गतिविधियों का संचालन हो रहा है।

इसी शहर में एक दिन कलाकार थिएटर कंपनी के कलाकारों को पता चलता है कि एक अंडरवर्ल्ड का डॉन देश में विस्फोट करने की योजना बना रहा है। इसके बाद शुरू होता है हास्य और रोमांच का सिलसिला।

ड्रामा कंपनी एक नाटक ‘ए डेडली गेम प्लान’ नामक प्लान बनाती है ताकि देश और शहर को बम विस्फोटों से बचाया जा सकें। कई तरह के स्वांग रचकर ये कलाकार किस तरह देश को बचाते हैं ये हँस-हँसकर लोटपोट कर देने वाले अंदाज में दिखाया गया है। हारने वाले जीत जाते हैं। ‘एक्टर्स’ ‘हीरो’ बन जाते हैं। यह हास्य फिल्म कुछ सोचने पर भी मजबूर करती है।

पात्र परिचय
क्वीन ऑफ ग्लैमर - शबनम (मल्लिका शेरावत)
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शबनम एक सेक्सी, स्मार्ट और चुलबुली अभिनेत्री है, जिसके बड़े-बड़े ख्वाब हैं। उसे लगता है कि बॉलीवुड को उसका इंतजार है। साथ ही अपनी बोरिंग वैवाहिक जिंदगी में उसे एक युवा प्रेमी का भी इंतजार है। ‘मिशन मुगल-ए-आजम’ की ‘अनारकली’ अपनी अदाओं से पूरे देश को दीवाना बना सकती है और उसकी यही खासियत अंत में देश को बचाने के काम आती है। वह इस फिल्म का ‘दिल’ है।
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प्रिंस ऑफ रोमांस - अर्जुन (राहुल बोस)
सीक्रेट एजेंट अर्जुन मन ही मन शबनम को बेहद चाहता है। उसके दिमाग में एक गंभीर एजेंडा और दिल में अपने प्यार को पाने की प्यारी-सी योजना है। वह पूरे थिएटर ग्रुप का उत्साह बढ़ाता है और उन्हें और बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है। वह इस फिल्म का ‘दिमाग’ है।

शहंशाह ऑफ कॉमेडी - उदय शंकर मज़ूमदार (परेश रावल)
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उदय शंकर अपनी पत्नी पर कुछ ज्यादा ही हक जमाते हैं। साथ ही वे अपने खुद के अभिनय के भी कायल हैं। वे एक्टिंग नहीं बल्कि ओवर एक्टिंग करते हैं। अकबर का पात्र ओथेलो की तरह और ओथेलो का अभिनय वो हनुमान की तरह करते हैं। अपने आपको वे ‘लीविंग लीजेण्ड’ मानते हैं, भले ही उनका अभिनय देख दर्शकों की जान निकल जाए। ‍आखिर में वे अपनी जान की कीमत लगाकर चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे इस फिल्म की ‘आत्मा’ हैं।
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हल्दी हसन (के.के. मेनन)
स्टाइलिश, रोमांटिक और उर्दू गज़ल गायक हल्दी हसन अपनी हर उस प्रशंसिका के प्यार में पड़ जाते हैं जो उनसे मिलने आती है। रोमांस उनकी रग-रग में है। गाने में रोमांस, बोलने में रोमांस और उनके जीने के अंदाज में रोमांस ही रोमांस नजर आता है। यह बात और है कि उनकी विशिष्ट उर्दू और रहस्यमयी दिमाग को कोई नहीं समझ पाता।
लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें