नसीरुद्दीन शाह के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर भड़के गजेंद्र चौहान, चुनाव लड़ने की दी चुनौती, बोले- मैं हराकर दिखाऊंगा
भारतीय सिनेमा और राजनीति के गलियारों में एक बार फिर वैचारिक जंग तेज हो गई है। दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह द्वारा केंद्र सरकार की नीतियों और विश्वविद्यालय परिसरों में चल रहे छात्र आंदोलनों के खिलाफ दिए गए तीखे बयानों पर वरिष्ठ अभिनेता और भाजपा के नेता गजेंद्र चौहान ने सख्त रुख अपनाया है।
गजेंद्र चौहान ने शाह के बयानों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें सीधे तौर पर चुनावी मैदान में उतरने और लोकतंत्र की वास्तविक कसौटी पर अपनी लोकप्रियता आंकने की सीधी चुनौती दे डाली है।
अगर विरोध का इतना ही शौक है तो चुनाव लड़ें
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए गजेंद्र चौहान ने नसीरुद्दीन शाह के रुख पर गहरा असंतोष और नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने शाह के राजनीतिक बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा, "यदि आपको सरकार का विरोध करने का इतना ही शौक है, तो आप चुनावी राजनीति में कदम क्यों नहीं रखते? चुनाव लड़िए और जनमत का सामना कीजिए।"
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए गजेंद्र चौहान ने नसीरुद्दीन शाह को एक सीधा और खुला चुनावी चैलेंज भी दे दिया। उन्होंने कहा, मैं आपको खुली चुनौती देता हूं—आप देश के किसी भी कोने से चुनाव लड़ेंगे, मैं आपके खिलाफ मैदान में उतरूंगा और आपको शिकस्त दूंगा।
उन्होंने कहा, यह देश आपको एक महान कलाकार के रूप में बहुत सम्मान और पहचान दे चुका है, लेकिन ऐसे बयानों से आपने वह सब गंवा दिया है। चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपनी पार्टी भाजपा से आधिकारिक रूप से अनुरोध करेंगे कि यदि नसीरुद्दीन शाह कभी चुनाव लड़ते हैं, तो उन्हें ही शाह के खिलाफ प्रत्याशी बनाया जाए।
सिनेमाई सम्मान और राजनीतिक बयानबाज़ी पर सवाल
'महाभारत' धारावाहिक में युधिष्ठिर की भूमिका से घर-घर में पहचाने जाने वाले गजेंद्र चौहान ने कहा कि नसीरुद्दीन शाह ने भारतीय सिनेमा में दशकों की मेहनत से जो मान-सम्मान अर्जित किया था, उनकी एकतरफा राजनीतिक बयानबाजी ने उस सम्मान को भारी नुकसान पहुंचाया है। चौहान के अनुसार, लोकतांत्रिक देश में चुनी हुई सरकार की नीतियों पर बात करते समय निष्पक्षता और संतुलन जरूरी है, न कि केवल एकतरफा हमला।
इस पूरे विवाद की नींव तब पड़ी जब नसीरुद्दीन शाह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में चल रहे छात्र प्रदर्शनों पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। अपने वीडियो संदेश में शाह ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट और जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों के साथ हुए प्रशासनिक व सरकारी व्यवहार का कड़ा विरोध जताया।
शाह ने वीडियो में बेबाक अंदाज में कहा था, मैं गर्व के साथ कहता हूं कि मैं दिमागी नक्सल हूं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और उसकी नीतियां देश के युवाओं का मनोबल तोड़ने, लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता को समाप्त करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ की जा रही ज्यादतियों को इतिहास में याद रखा जाएगा और देश के युवाओं का हौसला किसी भी प्रशासनिक दबाव से नहीं टूटने वाला है।

