नाना पाटेकर 4 दिन पहले ही बोले थे- ‘हम सबको एक दिन जाना है’
नाना पाटेकर 4 दिन पहले ही बोले थे- हम सबको एक दिन जाना है
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह निधन हो गया। गोवा में कार्डियक अरेस्ट के बाद सुबह 5:20 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। हैरान करने वाली बात यह है कि निधन से महज 4 दिन पहले ही नाना पाटेकर गोवा के डोना पाउला में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। वहां जिंदगी और मौत को लेकर कही उनकी बातें अब बेहद भावुक कर देने वाली बन गई हैं।
चार दिन पहले ही मौत पर की थी बात
पद्मश्री से सम्मानित अभिनेता नाना पाटेकर 4 अक्टूबर को गोवा के डोना पाउला स्थित ताज सिडाडे डी गोवा में आयोजित सम्राट क्लब इंटरनेशनल, स्टेट-1 के इंस्टॉलेशन समारोह में पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में राजश्री ए. खांडेपारकर को 2026-27 के लिए स्टेट प्रेसिडेंट बनाया गया था और उनके साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने भी जिम्मेदारी संभाली।
कार्यक्रम के दौरान नाना पाटेकर ने गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर का जिक्र किया और उनके काम करने के तरीके की तारीफ की। सफेद कुर्ते और सफेद गमछे में नजर आए नाना ने इस दौरान जिंदगी को लेकर ऐसी बात कही, जो अब उनके निधन के बाद सोशल मीडिया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
नाना पाटेकर ने कहा था कि हम सभी को एक दिन जाना है। उन्हें नहीं पता कि वह अगले दिन यहां होंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि हर इंसान की जिंदगी आखिरकार उस मुकाम तक पहुंचती है, लेकिन उससे पहले उन्हें खुद से यह सवाल पूछना है कि क्या वह वह सब कर पा रहे हैं, जो वह करना चाहते हैं। उनका यह बयान अब उनके निधन के बाद और भी भावुक कर देने वाला हो गया है।
45 मिनट तक दी गई सीपीआर, नहीं बच सके नाना
मिली जानकारी के मुताबिक, नाना पाटेकर को उनके घर पर गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था। उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद नाना को पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। इस मामले में मेडिको-लीगल केस यानी एमएलसी दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम किया जाएगा।
ओ'रोमियो में आखिरी बार आए थे नजर
नाना पाटेकर को आखिरी बार फिल्म ओ'रोमियो में देखा गया था। फिल्म में उनके साथ शाहिद कपूर, तृप्ति डिमरी, अविनाश तिवारी और दिशा पाटनी नजर आए थे।
ऐसा रहा नाना पाटेकर का सिनेमा सफर
1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र में विश्वनाथ पाटेकर के रूप में जन्मे नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका दमदार और बेहद स्वाभाविक अभिनय था। पर्दे पर उनके निभाए किरदार लंबे समय तक दर्शकों की याद में रहे।
नाना पाटेकर ने 1978 में फिल्म गमन से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। उनके संवाद बोलने का अंदाज इतना खास था कि उनकी नकल करना कलाकारों और मिमिक्री आर्टिस्ट के लिए भी एक चुनौती माना जाता था।
नाना पाटेकर ने सिर्फ अभिनय तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने मराठी सिनेमा और थिएटर में भी काम किया। उनके निधन से हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक बेहद प्रभावशाली और अलग अंदाज वाले कलाकार को खो दिया है।

