AI पर काजोल का बड़ा बयान, बोलीं- मशीन इंसानी क्रिएटिविटी और जज्बातों की जगह नहीं ले सकती
सिनेमाई पर्दे पर तीन दशकों से ज्यादा समय से अपनी भावपूर्ण अदाकारी का लोहा मनवा रहीं एक्ट्रेस काजोल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव पर खुलकर बात की है। बाज़ीगर, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, गुप्त, फना और माई नेम इज़ खान जैसी फिल्मों में यादगार किरदार निभाने वाली काजोल का दृढ़ विश्वास है कि कोई भी मशीन मानवीय रचनात्मकता और मौलिकता की जगह नहीं ले सकती।
इंसानी जज्बातों की जगह नहीं ले सकती मशीन
AI और इंसानी सोच के फर्क को स्पष्ट करते हुए काजोल ने कहा, एक मशीन के पास वही विचार होते हैं जो पहले से किसी लाइब्रेरी में दर्ज हैं, लेकिन इंसानों में ऐसे जज्बात और अहसास पैदा करने की क्षमता होती है जो शायद पहले कभी वजूद में ही न रहे हों।
कामचलाऊ हो सकता है AI, पर नहीं ला सकता इंसानी आत्मा
काजोल के अनुसार, AI केवल उस विशाल डेटा और जानकारी के आधार पर ही कंटेंट बना सकता है जो पहले से उपलब्ध है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया, अगर आप AI को प्रॉम्प्ट देकर कहें कि मेरे लिए पांच पंक्तियों की कोई कविता, हाइकु या उर्दू नज़्म लिखो, तो वह इसे बहुत अच्छे से कर देगा। मैं इसे शानदार नहीं कहूंगी, लेकिन वह ठीक-ठाक लिख देगा। लेकिन वहीं अगर आप किसी बेहतरीन लेखक या शायर से वही काम करवाएंगे, तो उसमें एक अलग रूह और गहराई होगी, जो मशीन कभी नहीं ला सकती।
अद्वितीय नजरिया ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत
अभिनेत्री ने जोर देकर कहा कि इंसान किसी भी चीज को एक नए और अनूठे दृष्टिकोण से देखने की काबिलियत रखता है। मशीनें केवल अतीत में सृजित सामग्री को दोहराने तक सीमित हैं, जबकि एक इंसान बिल्कुल नई और अनोखी सोच सामने ला सकता है।
मनोरंजन और सिनेमा की दुनिया में जिस दौर में पटकथा लेखन, फिल्म मेकिंग और स्टोरीटेलिंग में AI के इस्तेमाल को लेकर तीखी बहस छिड़ी है, उस दौर में काजोल का यह नजरिया मानवीय कला और अहसासों की अहमियत को रेखांकित करता है।

